Bhadli Navami 2025 इस बार 4 जुलाई को मनाई जाएगी। जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और क्यों यह दिन विवाह व मांगलिक कार्यों के लिए अबूझ माना जाता है।
Bhadli Navami 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ महीने की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भड़ली नवमी (Bhadli Navami) मनाई जाती है। यह दिन मांगलिक कार्यों के लिए अबूझ मुहूर्त माना जाता है, जिसका अर्थ है कि इस दिन बिना किसी ज्योतिषीय गणना के भी विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और नामकरण जैसे शुभ कार्य किए जा सकते हैं।
भड़ली नवमी 2025 में कब है?
साल 2025 में भड़ली नवमी 4 जुलाई, शुक्रवार को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार, नवमी तिथि की शुरुआत 3 जुलाई को सुबह 7:25 बजे होगी और समाप्ति 4 जुलाई को सुबह 8:38 बजे होगी। इसी दिन भड़ल्या नवमी, भदरिया नवमी, या भड़रिया नौमी के नाम से भी यह पर्व देशभर में मनाया जाएगा।
भड़ली नवमी का महत्व
भड़ली नवमी एक स्वयं सिद्ध मुहूर्त है, यानी इस दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए पंचांग या मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती। इस दिन किए गए धार्मिक व मांगलिक कार्यों को अक्षय तृतीया के समान फलदायक माना गया है।
यह तिथि देवशयनी एकादशी से दो दिन पहले आती है, जिसके बाद चातुर्मास शुरू हो जाता है। चातुर्मास में विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश आदि मांगलिक कार्यों पर रोक होती है। ऐसे में भड़ली नवमी विवाह जैसे मांगलिक कार्यों के लिए आखिरी शुभ तिथि होती है।
भड़ली नवमी पर कौन से कार्य करें?
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विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण संस्कार जैसे कार्य इस दिन बिना मुहूर्त कर सकते हैं।
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मां दुर्गा, भगवान शिव और श्री गणेश की विशेष पूजा करनी चाहिए।
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भगवान विष्णु का पूजन और हवन करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
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दान-पुण्य का महत्व इस दिन अत्यधिक है। अनाज, वस्त्र, छाता, चप्पल और धन का दान करना शुभ माना गया है।
Bhadli Navami 2025: पूजा विधि और सुझाव
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सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र पहनें।
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देवी-देवताओं की पूजा के बाद मांगलिक कार्यों की शुरुआत करें।
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व्रत रखने वाले लोग फलाहार करें और संध्या समय दीप दान करें।
भड़ली नवमी 2025, विवाह और अन्य शुभ कार्यों के लिए एक दुर्लभ और अबूझ मुहूर्त है। चातुर्मास से पहले यह एकमात्र दिन होता है जब बिना किसी बाधा के मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं। यदि आप घर में कोई शुभ कार्य करने की योजना बना रहे हैं, तो 4 जुलाई 2025 को ज़रूर नोट करें।
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