Gram Chikitsalaya Review: ग्राम चिकित्सालय नामक टीवीएफ सीरीज प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम हो चुकी है। यहां आप जान सकते हैं कि ग्रामीण जीवन पर आधारित ये शो देखने लायक हैं या नहीं।
Gram Chikitsalaya Review: यह सीरीज अच्छी है, कहानी अच्छी है, किरदार अच्छे हैं, एक्टर अच्छे हैं, लेकिन बार-बार लगता है कि यह पंचायत की तरह है। जिस तरह का फील देने की कोशिश की गई या वही सेटअप वही बोली, अब ओटीटी भी उसी भेड़चाल में फंसता जा रहा है, जिसमें अब तक बॉलीवुड वाले फंस चुके थे, और TVF से खासकर उम्मीद नहीं की जाती कि वह एक ही तरह का कंटेंट बनाएगा।
कहानी: ग्राम चिकित्सालय में आने वाले एक डॉक्टर की कहानी है। यहां कोई इलाज नहीं लेता। यहां का कर्मचारी भी नहीं आता। लोग खुश होकर एक झोला छाप डॉक्टर के पास जाते हैं। यहां की स्थिति अब कैसे सुधारी जाए? इस सीरीज में गांव की राजनीति और ये डॉक्टर की कार्रवाई दिखाई देती है।
कैसी है सीरीज: यह सीरीज देखते हुए बार-बार लगता है कि आपने सब देख लिया है। डॉक्टर साहब, आपको पंचायत सचिव की तरह लगता है। उनका कंपाउंडर पंचायत का बनराकस लगता है। चाय पीना और देसी बोली दोनों काफी मिलते जुलते है।
पंचायत से पहले ये सीरीज देखी होती तो बहुत शानदार लगती। अब यह सिर्फ ठीक ठाक लगती है। कुल पांच एपिसोड हैं, जिसमें से अंतिम थोड़ा भटक गया लगता है। कहानी कहां से आती है? इस सीरीज को देखना बुरा नहीं है; यह एक बेहतरीन सीरीज है। परिवार के साथ देख सकते हैं, लेकिन लगता है कि ये पंचायत का सस्ता संस्करण है।
एक्टिंग: इस सीरीज में प्रत्येक किरदार ने बेहतरीन काम किया है। अमोल पराशर ने डॉक्टर की भूमिका में बेहतरीन काम किया है। उन्होंने इस किरदार को बहुत अच्छा पकड़ा है। अब पंचायत सचिव जी, आप निर्णय लेंगे कि क्या अच्छा है या बुरा।
एक दिन, आकांक्षा रंजन कपूर एक गैर-ग्लैमरस भूमिका में होंगी। उन्हें देखकर आप उन्हें नहीं पहचान पाएंगे, लेकिन उन्हें सीन तो देने चाहिए थे। किरदार पूरी तरह से उभरने तक नहीं दिया गया। डॉक्टर के रोल में विनय पाठक झोला छाप है। आनंदेश्वर द्विवेदी ने अद्भुत कार्य किया है, वो सीरीज में बेहतरीन हैं, जबकि बाकी सारे एक्टर अच्छे हैं।
TVF के संस्थापक अरुणाभ कुमार ने खुद इस कहानी को निर्देशित और लिखा है। इसे उनके सहयोगी दीपक कुमार मिश्रा, श्रेय श्रीवास्तव और वैभव सुमन ने लिखा है। इसका निर्देशन राहुल पांडे ने किया है।
वर्तमान समस्या यह है कि TVF ने अपने कंटेंट से इतनी लंबी लकीर खींच ली है कि उनसे काफी उम्मीदें की जाती हैं, जिससे स्थिति पंचायत की तरह हो गई है। पंचायत की कामयाबी इस सीरीज की कमजोरी बन गई है, इससे बचना होगा और अलग कंटेंट बनाना होगा।
कुल मिलाकर ये सीरीज देख सकते हैं अगर आपको पंचायत के फील वाली सीरीज पसंद हो
रेटिंग: 3 स्टार
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