उत्तराखंड कैबिनेट ने मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा कौशल संवर्धन योजना-2026 को मंजूरी दी। 1.19 लाख छात्रों को कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के लिए तैयार किया जाएगा।
उत्तराखंड की धामी सरकार ने युवाओं के कौशल विकास और रोजगार क्षमता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। चंपावत जिले के बनबसा स्थित एनएचपीसी परिसर में हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा कौशल संवर्धन योजना-2026 को मंजूरी दी गई। इस योजना के तहत राज्य के करीब 1.19 लाख छात्र-छात्राओं को रोजगार के लिए जरूरी कौशल से प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई बैठक में युवाओं के कौशल विकास के अलावा सरकारी कर्मचारियों की आचरण नियमावली और संपत्ति की रजिस्ट्री से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर भी निर्णय लिया गया।
1.19 लाख छात्रों को मिलेगा कौशल प्रशिक्षण
कैबिनेट के फैसले के मुताबिक मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा कौशल संवर्धन योजना-2026 के जरिए शासकीय और निजी विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में पढ़ने वाले लगभग 1.19 लाख विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता बढ़ाई जाएगी।
योजना का उद्देश्य विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ ऐसे व्यावहारिक और तकनीकी कौशल उपलब्ध कराना है, जिनकी मदद से वे रोजगार हासिल करने के साथ उद्यमिता के क्षेत्र में भी आगे बढ़ सकें।
यह योजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की अवधारणा पर आधारित होगी। इसके तहत डिजिटल साक्षरता और तकनीकी दक्षता को उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रम की क्रेडिट व्यवस्था से जोड़े जाने की योजना है। सरकार इस योजना पर अगले पांच वर्षों में 200 करोड़ रुपये खर्च करेगी।
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कर्मचारियों की संपत्ति का ब्योरा देना होगा जरूरी
कैबिनेट ने राज्य कर्मचारियों की आचरण नियमावली में संशोधन को भी मंजूरी दी है। नए प्रावधानों के अनुसार समूह क, ख, ग और घ के कर्मचारियों के लिए आयकर विवरणी दाखिल करते समय संपत्ति का विवरण देना जरूरी होगा।
संशोधित नियमों के तहत कर्मचारियों को संपत्ति की खरीद से संबंधित कुछ मामलों में सरकार को जानकारी भी देनी होगी। यदि खरीद की राशि दो माह के वेतन से अधिक है, तो निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार शासन से अनुमति लेना आवश्यक होगा।
समूह क, ख और ग के कर्मचारी हर वर्ष आयकर विवरणी में अपनी संपत्ति की जानकारी देंगे, जबकि समूह घ के कर्मचारियों के लिए यह विवरण पांच वर्ष में एक बार देने का प्रावधान किया गया है।
सरकारी लेनदेन करने वाली संस्था से संपत्ति खरीदने पर देनी होगी जानकारी
संशोधित आचरण नियमावली में सरकारी लेनदेन करने वाली किसी संस्था से संपत्ति खरीदने वाले कर्मचारियों के लिए भी जानकारी देना आवश्यक किया गया है।
इसके साथ ही संपत्ति की खरीद की सीमा से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया है। अब कर्मचारियों के लिए खरीद सीमा केंद्र सरकार के अनुरूप दो माह के वेतन के बराबर रखी गई है।
10 लाख से ज्यादा की संपत्ति की रजिस्ट्री में PAN सत्यापन अनिवार्य
कैबिनेट ने संपत्ति की खरीद-बिक्री में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए भी अहम फैसला लिया है। अब 10 लाख रुपये से अधिक मूल्य की संपत्ति की रजिस्ट्री के दौरान खरीदार और विक्रेता दोनों के PAN नंबर का सत्यापन अनिवार्य होगा।
रजिस्ट्री प्रक्रिया में PAN नंबर दर्ज किए जाने के बाद सॉफ्टवेयर के माध्यम से उसका स्वतः सत्यापन किया जाएगा। यदि किसी पक्ष का PAN नंबर गलत या अमान्य पाया जाता है, तो संपत्ति की रजिस्ट्री आगे नहीं बढ़ सकेगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य संपत्ति लेनदेन में पारदर्शिता बढ़ाने और संभावित आयकर चोरी पर रोक लगाने में मदद करना है।
चंपावत में पहली बार हुई कैबिनेट बैठक
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विधानसभा क्षेत्र चंपावत में पहली बार कैबिनेट बैठक आयोजित की गई। बैठक में कुल 24 प्रस्ताव रखे गए, जिन पर चर्चा के बाद विभिन्न महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई।
सरकार का मानना है कि उच्च शिक्षा में कौशल विकास को बढ़ावा देने से युवाओं को बदलते रोजगार बाजार के लिए तैयार करने में मदद मिलेगी। वहीं संपत्ति और कर्मचारियों से जुड़े नए नियम प्रशासनिक पारदर्शिता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।

