नशे की लत से मुक्ति: मणिपुर के एल. डिले ने ओडीआईसी की मदद से नशे की लत से उबरकर नई जिंदगी शुरू की। जानें काउंसलिंग, उपचार, पुनर्वासन और परिवार के सहयोग की कहानी।
नशे की लत से मुक्ति: सही समय पर उपचार, काउंसलिंग और परिवार का सहयोग किसी व्यक्ति को नशे की समस्या से उबरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। मणिपुर के थोउबल जिले के 24 वर्षीय एल. डिले की कहानी भी इसी बदलाव की मिसाल है। नशे की समस्या के कारण पढ़ाई, पारिवारिक रिश्तों और मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ने के बाद उन्होंने आउटरीच एंड ड्रॉप इन सेंटर (ODIC) की मदद ली और धीरे-धीरे सामान्य जीवन की ओर लौटने में सफल रहे।
दोस्तों के दबाव में शुरू हुई थी शराब की आदत
एल. डिले ने 12वीं कक्षा पूरी करने के बाद दोस्तों के दबाव में शराब का सेवन शुरू किया था। शुरुआत में यह आदत कभी-कभार तक सीमित थी, लेकिन समय के साथ इसका असर बढ़ता गया और शराब उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गई।
नशे की बढ़ती समस्या का सीधा असर उनकी पढ़ाई और पारिवारिक जीवन पर पड़ा। घर में विवाद बढ़ने लगे और सामाजिक स्तर पर भी उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा। इससे उनकी मानसिक स्थिति और अधिक प्रभावित हुई और परिवार से दूरी बढ़ती चली गई।
रिश्तेदार की मदद से ओडीआईसी तक पहुंचे
परिवार में विवाद के बाद एल. डिले ने घर छोड़ दिया और बिष्णुपुर जिले में अपने एक करीबी रिश्तेदार के साथ रहने लगे। उनकी स्थिति को देखते हुए रिश्तेदार ने उन्हें पेशेवर सहायता दिलाने का फैसला किया और मणिपुर के बिष्णुपुर जिले के नामबोल फोइजिंग मखा स्थित आउटरीच एंड ड्रॉप इन सेंटर तक पहुंचाया।
ओडीआईसी में उन्हें उनकी जरूरत के अनुसार उपचार और पुनर्वासन संबंधी सहायता उपलब्ध कराई गई। समय पर मिली इस मदद ने उन्हें नशे की समस्या से बाहर निकलने की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर दिया।
काउंसलिंग और उपचार से मिला नया आत्मविश्वास
एल. डिले को ओडीआईसी की ओर से उपचार और पुनर्वासन का एक व्यवस्थित पैकेज उपलब्ध कराया गया। इसमें डिटॉक्सिफिकेशन, चिकित्सा सहायता, मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग, व्यवहार संबंधी पुनर्वासन और पारिवारिक परामर्श जैसी सेवाएं शामिल थीं।
उन्हें साथियों के दबाव से निपटने और दोबारा नशे की ओर जाने से बचने के लिए भी मार्गदर्शन दिया गया। इसके साथ ही सामाजिक और पारिवारिक रिश्तों को बेहतर बनाने तथा रोजगार से जुड़ने में सहायता प्रदान की गई।
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तीन महीने की सहायता से जीवन में आया बदलाव
लगातार करीब तीन महीने तक उपचार, परामर्श और सहयोग मिलने के बाद एल. डिले ने शराब की समस्या से उबरने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की। पुनर्वासन प्रक्रिया ने उन्हें नियमित और अनुशासित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया।
इस बदलाव में परिवार की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। लगातार भावनात्मक सहयोग मिलने से उन्हें दोबारा जिम्मेदारियां संभालने और अपने जीवन को स्थिर बनाने में मदद मिली। धीरे-धीरे उनका आत्मविश्वास भी वापस आने लगा और उन्होंने भविष्य को लेकर सकारात्मक सोच विकसित की।
अब नौकरी कर परिवार को दे रहे हैं आर्थिक सहारा
आज एल. डिले काकचिंग बाजार स्थित एक बड़े स्टोर में सेल्समैन के रूप में काम कर रहे हैं। नौकरी के जरिए उन्हें नियमित आय प्राप्त हो रही है और वे अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों में योगदान दे रहे हैं।
नशे की समस्या, पारिवारिक तनाव और आर्थिक अस्थिरता के दौर से निकलकर अब वे रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उनके जीवन में आया यह बदलाव समय पर मिली सहायता और निरंतर सहयोग के महत्व को दर्शाता है।
समय पर मदद से संभव है नई शुरुआत
एल. डिले की कहानी यह बताती है कि नशे की समस्या से जूझ रहे व्यक्ति को समय पर चिकित्सा सहायता, मनोवैज्ञानिक परामर्श, पुनर्वासन और परिवार का सहयोग मिले तो वह सामान्य जीवन की ओर लौट सकता है।
पुनर्वासन सेवाएं केवल नशे से दूरी बनाने तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि व्यक्ति को आत्मविश्वास हासिल करने, रिश्तों को सुधारने, रोजगार से जुड़ने और समाज में दोबारा सम्मानजनक जीवन जीने में भी मदद कर सकती हैं। एल. डिले का अनुभव इसी बात का उदाहरण है कि सही सहायता और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ जिंदगी को दोबारा नई दिशा दी जा सकती है।

