लाडवा में एचएयू कृषि विकास मेले के समापन पर मंत्री श्याम सिंह राणा ने प्राकृतिक खेती, एमएसपी और किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दिया।
हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री Shyam Singh Rana ने लाडवा की अनाज मंडी में आयोजित दो दिवसीय प्रदेश स्तरीय कृषि विकास मेले के समापन अवसर पर कहा कि बढ़ती आबादी और घटती कृषि भूमि को देखते हुए खेती में भी आधुनिक तकनीक अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जैसे शहरी क्षेत्रों में बढ़ती जनसंख्या के कारण फ्लैट निर्माण की तकनीक अपनाई जा रही है, वैसे ही कृषि क्षेत्र में भी नवाचार और संसाधन संरक्षण पर जोर देना होगा।
यह मेला Chaudhary Charan Singh Haryana Agricultural University द्वारा आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में कुलपति प्रो. बी.आर. काम्बोज ने मंत्री का स्वागत कर स्मृति चिन्ह भेंट किया। मंत्री ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और ड्रा योजना के तहत कृषि यंत्रों का वितरण भी किया।
प्राकृतिक खेती और कम पानी वाली फसलें जरूरी
श्याम सिंह राणा ने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने और कम पानी वाली फसलों की ओर रुख करने की अपील की। उन्होंने कहा कि भूमि का दायरा सीमित है और परिवार बढ़ने के साथ जोत घटती जा रही है, ऐसे में संसाधनों का संरक्षण अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि “उत्तम खेती, मध्यम व्यापार” की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए कृषि को लाभकारी बनाना होगा।
एमएसपी और 48 घंटे में भुगतान
मंत्री ने कहा कि हरियाणा देश का पहला राज्य है जिसने सभी फसलों को एमएसपी पर खरीदने की पहल की। बागवानी फसलों को भी समर्थन मूल्य के दायरे में लाया गया है। भावांतर भरपाई योजना के तहत मंडी भाव और एमएसपी के अंतर की भरपाई की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि फसल बिकते ही 48 घंटे के भीतर भुगतान सीधे किसानों के खातों में पहुंचाया जाता है।
कांग्रेस पर साधा निशाना
श्याम सिंह राणा ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया कि उस समय फसल का भुगतान किसानों के बजाय अन्य खातों में चला जाता था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में “जिसकी फसल, उसका पैसा” की नीति लागू हुई, जिससे पारदर्शिता आई है।
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किसानों की आय चार गुना बढ़ाने का लक्ष्य
मंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए किसानों की वास्तविक आय चार गुना बढ़ाने की दिशा में योजनाएं बनाई जा रही हैं। प्रदेश में किसान सम्मेलनों के माध्यम से नई तकनीक और योजनाओं की जानकारी दी जा रही है।
प्रगतिशील किसानों को सम्मान
कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया। इनमें पलवल, भिवानी, झज्जर, करनाल, यमुनानगर, महेंद्रगढ़, पंचकूला, सोनीपत, कुरुक्षेत्र, अंबाला, रोहतक और सिरसा सहित कई जिलों के किसान शामिल रहे।
हर साल होगा कृषि विकास मेला
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बी.आर. काम्बोज ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों—पानी, भूमि और वातावरण—का संरक्षण आवश्यक है। उन्होंने घोषणा की कि कृषि विकास मेला अब हर वर्ष आयोजित किया जाएगा, ताकि किसानों को नई तकनीकों और शोध से सीधे जोड़ा जा सके।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रभारी कैलाश सैनी, मार्केट कमेटी चेयरमैन डॉ. गणेश दत्त, कुलसचिव डॉ. पवन कुमार सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

