रायलसीमा में ₹1 लाख करोड़ के ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब की योजना, 201 क्लस्टर और 9.6 लाख किसानों को लाभ। जानें निवेश, AI, ड्रोन और कृषि तकनीक की पूरी जानकारी।
आंध्र प्रदेश के रायलसीमा क्षेत्र में बागवानी और कृषि को नई दिशा देने के लिए करीब ₹1 लाख करोड़ की लागत से ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब (GHH) विकसित करने की योजना है। इस परियोजना के तहत करीब 10 जिलों में 201 हॉर्टिकल्चर क्लस्टर तैयार किए जाएंगे। सरकार का अनुमान है कि इससे लगभग 9.6 लाख किसानों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिल सकता है।
परियोजना का उद्देश्य सिर्फ खेती का क्षेत्र बढ़ाना नहीं, बल्कि रायलसीमा को उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण और निर्यात तक एक मजबूत कृषि केंद्र के रूप में विकसित करना है।
8.4 लाख से 14.4 लाख हेक्टेयर होगा बागवानी क्षेत्र
ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब के तहत क्षेत्र में बागवानी का दायरा बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जाएगा। वर्तमान में करीब 8.4 लाख हेक्टेयर में बागवानी होती है, जिसे बढ़ाकर 14.4 लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य रखा गया है।
इस विस्तार के साथ किसानों को अधिक मूल्य वाली फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करने की योजना है। इससे उत्पादन बढ़ाने के साथ किसानों की आय के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर करेंगे निवेश
करीब ₹1 लाख करोड़ की अनुमानित परियोजना में ₹40,000 करोड़ सरकारी एवं सार्वजनिक निवेश और लगभग ₹60,000 करोड़ निजी क्षेत्र के निवेश का प्रस्ताव है।
तीन साल की योजना में सिंचाई के लिए करीब ₹20,884 करोड़, हॉर्टिकल्चर के लिए ₹14,906 करोड़ और ग्रामीण सड़कों के विकास के लिए करीब ₹4,562 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है।
इस निवेश से कृषि क्षेत्र के साथ-साथ ग्रामीण बुनियादी ढांचे को भी मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है।
रिलायंस लाएगा AI, ड्रोन और डिजिटल एग्रीकल्चर
रायलसीमा हॉर्टिकल्चर हब में तकनीक की भूमिका भी अहम रहने वाली है। 2 अक्टूबर को रिलायंस इंडस्ट्रीज के कार्यकारी निदेशक अनंत अंबानी ने रायलसीमा हॉर्टिकल्चर हब और अन्नामय्या जिले के मदनपल्ले स्थित इंडियन स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर (ISA) में रिलायंस की भागीदारी की घोषणा की।
प्रस्तावित तकनीकी सहयोग में जियो कृषि तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा आधारित खेती, ड्रोन, रोबोटिक्स, डिजिटल किसान प्रशिक्षण, मूल्य इंटेलिजेंस और हाईटेक पशुपालन जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
इस पहल का एक उद्देश्य युवाओं को आधुनिक तकनीक के जरिए कृषि क्षेत्र से जोड़ना भी है।
‘बीज से बाजार और निर्यात’ तक तैयार होगी वैल्यू चेन
ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब का फोकस केवल फसल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा। योजना के तहत कृषि की पूरी वैल्यू चेन विकसित करने की तैयारी है।
इसमें:
सिंचाई → उत्पादन → संग्रहण → कोल्ड स्टोरेज → प्रोसेसिंग → पैकेजिंग → लॉजिस्टिक्स → घरेलू बाजार → निर्यात
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तक का नेटवर्क तैयार करने का लक्ष्य है।
इससे किसानों को फसल बेचने के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराने और उत्पादन के बाद होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।
इन फसलों पर रहेगा खास जोर
परियोजना में कई उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलों को बढ़ावा देने की योजना है। इनमें आम, केला, टमाटर, अनार, खजूर, ड्रैगन फ्रूट, तरबूज, नींबू, मीठा संतरा, एवोकाडो, सेब और बेरीज जैसी फसलें शामिल हैं।
इसके साथ ही कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण पर भी जोर दिया जाएगा। आम का पल्प, केले से बने उत्पाद, टमाटर प्यूरी और डिहाइड्रेटेड फलों जैसे उत्पादों के लिए प्रोसेसिंग यूनिट विकसित करने की योजना है।
किसानों को उत्पादन के साथ मिलेगी वैल्यू एडिशन की सुविधा
हॉर्टिकल्चर हब के जरिए किसानों को केवल फसल उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय वैल्यू एडिशन और प्रोसेसिंग से जोड़ने की कोशिश होगी।
उदाहरण के लिए, कच्चे आम या टमाटर की बिक्री के बजाय उनसे तैयार उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने से कृषि उत्पाद की वैल्यू बढ़ सकती है। कोल्ड चेन, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स के विकास से किसानों को बड़े घरेलू बाजारों और निर्यात बाजारों तक पहुंच बनाने में भी मदद मिल सकती है।
₹1 लाख करोड़ रिलायंस का अकेला निवेश नहीं
इस परियोजना को लेकर एक अहम बात स्पष्ट करना जरूरी है। ₹1 लाख करोड़ का आंकड़ा रिलायंस का अकेले का निवेश नहीं है। यह पूरे ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब के लिए अनुमानित कुल निवेश है, जिसमें सरकारी और निजी क्षेत्र दोनों की हिस्सेदारी प्रस्तावित है।
वहीं, रिलायंस का ₹65,000 करोड़ में 500 कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट लगाने का कार्यक्रम अलग परियोजना है। यह कृषि अवशेष और बायोमास से ऊर्जा उत्पादन से संबंधित है और इसे ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब के ₹1 लाख करोड़ के निवेश में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
रायलसीमा में बदल सकती है कृषि की तस्वीर
ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब की योजना सफल होने पर रायलसीमा में कृषि का ढांचा पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर तकनीक, सिंचाई, प्रोसेसिंग, कोल्ड चेन, बाजार और निर्यात से जुड़ी एक व्यापक कृषि अर्थव्यवस्था का रूप ले सकता है।
करीब 9.6 लाख किसानों को संभावित लाभ, 201 क्लस्टरों का विकास और बागवानी क्षेत्र को 14.4 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने का लक्ष्य इस परियोजना को क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बना सकता है।

