रांची के ICAR-IIAB में 1500 किसानों को रबी सीजन से पहले नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और बीज किट वितरित की गईं। नई कृषि सुविधाओं का भी उद्घाटन हुआ।
भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (ICAR-IIAB), रांची में कृषि अनुसंधान, किसान प्रशिक्षण और आधुनिक सुविधाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई। 8 अक्टूबर को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संस्थान में नवनिर्मित भवनों और अन्य सुविधाओं का उद्घाटन किया। इस अवसर पर रबी सीजन की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए किसान गोष्ठी और कृषि सामग्री वितरण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में रांची, खूंटी, गुमला और रामगढ़ जिलों से करीब 1,500 किसानों ने भाग लिया। किसानों को नैनो उर्वरक, उन्नत बीज और कृषि उपयोगी सामग्री प्रदान की गई। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को बेहतर कृषि संसाधन उपलब्ध कराना, आधुनिक तकनीकों के प्रति जागरूक करना और आगामी रबी फसल की तैयारी में सहायता देना था।
ICAR-IIAB में नई इमारतों और आधुनिक सुविधाओं का उद्घाटन
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संस्थान में कई नई सुविधाओं का उद्घाटन किया। इनमें प्रशासनिक सह विद्यालय भवन, बिरसा मुंडा बहुउद्देशीय सभागार, जयपाल सिंह मुंडा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और नेक्स्टजेन ब्रीडिंग फैसिलिटी शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त संस्थान परिसर में नए गेस्ट हाउस के निर्माण की आधारशिला भी रखी गई। प्रस्तावित गेस्ट हाउस की अनुमानित लागत करीब 119 करोड़ रुपये बताई गई है।
इन सुविधाओं के विकसित होने से संस्थान में कृषि अनुसंधान, वैज्ञानिक गतिविधियों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और शैक्षणिक आयोजनों के संचालन को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। इससे झारखंड के किसानों और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को भी लाभ मिल सकता है।
वैज्ञानिक अनुसंधान को किसानों के खेतों तक पहुंचाने पर जोर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री ने कृषि वैज्ञानिकों के शोध और नई तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने मिट्टी की सेहत सुधारने और उर्वरकों के संतुलित उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए देशव्यापी खेत बचाओ अभियान शुरू करने की बात कही।
इस पहल का उद्देश्य किसानों को मिट्टी के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और खेती में पोषक तत्वों का जरूरत के अनुसार उपयोग करने के लिए प्रेरित करना है।
इससे पहले कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने भी संस्थान के वैज्ञानिकों के साथ संवाद किया था। उन्होंने कृषि अनुसंधान में नए विचारों और आधुनिक कार्यप्रणालियों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
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1,500 किसानों को नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और बीज किट मिले
रबी सीजन से पहले आयोजित किसान गोष्ठी में अनुसूचित जाति उपयोजना और जनजातीय उपयोजना के अंतर्गत किसानों को विभिन्न कृषि इनपुट वितरित किए गए। इसमें नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और मिनरल मिक्सचर जैसी सामग्री शामिल रही।
किसानों को आगामी फसल सीजन की तैयारी के लिए गेहूं, मटर, सरसों और सब्जियों के उन्नत बीजों की किट भी दी गईं। इसके अलावा टमाटर और बैंगन की अधिक उत्पादन क्षमता वाली किस्मों के बीज वितरित किए गए, ताकि किसान अपनी जरूरत और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार खेती की योजना बना सकें।
इस कार्यक्रम में कुछ किसानों को दूध को ठंडा रखने के लिए मिल्क कैन कूलर भी उपलब्ध कराए गए। इससे स्पष्ट हुआ कि किसानों की फसल उत्पादन संबंधी जरूरतों के साथ पशुपालन से जुड़ी आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखा गया।
मिट्टी की जांच और संतुलित उर्वरक उपयोग की दी जानकारी
किसान गोष्ठी के दौरान वैज्ञानिकों ने मिट्टी की जांच कराने और फसल की आवश्यकता के अनुसार उर्वरकों का इस्तेमाल करने की सलाह दी। किसानों को बताया गया कि मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्वों की जानकारी के आधार पर खाद का उपयोग करने से पोषण प्रबंधन अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसे उत्पादों के उचित इस्तेमाल के लिए सही मात्रा, समय और निर्धारित उपयोग विधि का पालन करना आवश्यक है। किसानों को कृषि विशेषज्ञों की सलाह और उत्पाद के निर्देशों के अनुसार इनका उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
कार्यक्रम में कृषि संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल, खेती की लागत को नियंत्रित रखने और फसल उत्पादन में सुधार के लिए वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने पर भी जोर दिया गया।
आदिवासी और छोटे किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीक पहुंचाने की पहल
भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान लंबे समय से झारखंड और आसपास के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में कृषि अनुसंधान, बेहतर बीज और आधुनिक खेती की तकनीकों पर काम कर रहा है।
संस्थान में नई सुविधाओं के विस्तार और किसान प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि संबंधी जानकारी पहुंचाने के प्रयासों को मजबूती मिलने की उम्मीद है। छोटे और सीमांत किसानों को उन्नत बीज, मिट्टी प्रबंधन और फसल विविधीकरण जैसी जानकारियां उपलब्ध कराना इस दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
झारखंड में बड़ी संख्या में किसान मौसम पर निर्भर खेती करते हैं। ऐसे में समय पर बीज उपलब्धता, जल प्रबंधन और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने संबंधी जानकारी किसानों के लिए उपयोगी हो सकती है।
चार जिलों में आगे भी होंगे किसान जागरूकता कार्यक्रम
कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि रांची, खूंटी, गुमला और रामगढ़ जिलों में आने वाले महीनों में भी किसानों के लिए जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है। इन कार्यक्रमों में मिट्टी के स्वास्थ्य, जल संसाधनों के बेहतर उपयोग और फसल विविधीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
इसके साथ ही डिजिटल कृषि मिशन के तहत किसानों का पंजीयन करने की प्रक्रिया को भी ऐसे आयोजनों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इसका उद्देश्य किसानों की जानकारी को व्यवस्थित करना और सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र किसानों तक पहुंचाने की प्रक्रिया को आसान बनाना है।
कृषि विकास और किसान कल्याण को मिलेगा प्रोत्साहन
रांची स्थित ICAR-IIAB में आयोजित यह कार्यक्रम कृषि अनुसंधान, आधुनिक सुविधाओं और किसानों तक उपयोगी संसाधन पहुंचाने के प्रयासों का हिस्सा है। नई इमारतों के उद्घाटन के साथ किसानों को नैनो उर्वरक, बीज किट और पशुपालन संबंधी उपकरण उपलब्ध कराए गए।
आगामी रबी सीजन को देखते हुए इस तरह के कार्यक्रम किसानों को फसल नियोजन, उर्वरक प्रबंधन और आधुनिक कृषि तकनीकों के बारे में जानकारी देने का माध्यम बन सकते हैं। इससे झारखंड के किसानों को अपनी कृषि गतिविधियों को बेहतर ढंग से संचालित करने में सहायता मिलने की उम्मीद है।

