सितंबर के आखिरी हफ्ते में संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने की चर्चा है। जानें परिसीमन विधेयक, महिला आरक्षण और संभावित 3 दिवसीय सत्र से जुड़ी अहम जानकारी।
संसद के विशेष सत्र को लेकर एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि केंद्र सरकार सितंबर के अंतिम सप्ताह में संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर सकती है। इस दौरान परिसीमन से जुड़े विधायी प्रस्तावों को आगे बढ़ाने पर चर्चा होने की संभावना बताई जा रही है।
हालांकि, विशेष सत्र की तारीख और एजेंडे को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है। सूत्रों के मुताबिक, संभावित कार्यक्रम 24 से 26 सितंबर के बीच हो सकता है।
NDA सहयोगियों से बातचीत की चर्चा
रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार ने विशेष सत्र की संभावनाओं को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के कुछ प्रमुख सहयोगी दलों से बातचीत की है। एक सहयोगी दल के वरिष्ठ नेता के हवाले से बताया गया है कि उन्हें 24-26 सितंबर के संभावित कार्यक्रम की जानकारी दी गई है।
दूसरी ओर, संसद के अधिकारियों की ओर से विशेष सत्र की तैयारियों को लेकर किसी औपचारिक निर्देश की पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में फिलहाल यह प्रस्तावित कार्यक्रम ही माना जा रहा है।
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परिसीमन से जुड़े विधेयक क्यों अहम हैं?
परिसीमन से जुड़े तीन विधेयक अप्रैल 2026 में लोकसभा में पेश किए गए थे। इनमें संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, परिसीमन विधेयक, 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 शामिल थे। प्रस्तावों का संबंध लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण तथा महिला आरक्षण को लागू करने की व्यवस्था से था।
संविधान संशोधन विधेयक 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में आवश्यक विशेष बहुमत हासिल नहीं कर सका। इसके बाद इससे जुड़े अन्य दोनों विधेयक भी आगे नहीं बढ़ सके।
महिला आरक्षण से भी जुड़ा है मामला
प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण को लागू करने की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव का प्रस्ताव था। इसके साथ परिसीमन की प्रक्रिया और इस्तेमाल किए जाने वाले जनगणना आंकड़ों से जुड़े प्रावधान भी प्रस्तावित थे।
कांग्रेस ने क्या कहा?
विपक्ष की ओर से परिसीमन के प्रस्तावों पर व्यापक चर्चा की मांग पहले भी उठाई गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में सर्वदलीय बैठक बुलाने और राजनीतिक दलों व राज्य सरकारों को प्रस्तावों का अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय देने की मांग की थी।
ऐसे में यदि विशेष सत्र बुलाया जाता है, तो परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दे संसद में फिर राजनीतिक चर्चा का प्रमुख विषय बन सकते हैं।
अभी आधिकारिक घोषणा का इंतजार
फिलहाल सितंबर में विशेष सत्र बुलाए जाने की खबरें सूत्रों पर आधारित हैं। संसद की आधिकारिक घोषणा और कार्यसूची जारी होने के बाद ही सत्र की तारीख तथा उसमें लिए जाने वाले विधायी कार्यों की स्थिति स्पष्ट होगी।
परिसीमन से जुड़े पहले के विधेयकों की संसदीय स्थिति को देखते हुए आगामी घटनाक्रम पर राजनीतिक दलों और राज्यों की नजर बनी हुई है।

