नबरंगपुर में 65 हजार हेक्टेयर में मक्का उत्पादन और 15 FPO से किसानों को बाजार मिल रहा है। जानें उत्पादन वृद्धि, सरकारी सहायता और MSP की चुनौतियां।
ओडिशा के नबरंगपुर जिले में मक्का की खेती आदिवासी किसानों की आय बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरी है। कभी सीमित संसाधनों के सहारे गुजर-बसर करने वाले किसानों के लिए पहचाने जाने वाले इस जिले ने अब मक्का उत्पादन में खास पहचान बनाई है। किसान उत्पादक संगठनों (FPO) की मदद से किसानों को उन्नत बीज, बाजार तक पहुंच और सामूहिक कारोबार के नए अवसर मिल रहे हैं।
जिले में लगभग 65 हजार हेक्टेयर भूमि पर मक्के की खेती की जाती है। यहां सालाना करीब 7.8 लाख मीट्रिक टन मक्का उत्पादन होने का अनुमान है, जो ओडिशा के कुल उत्पादन का लगभग 30 प्रतिशत है। कृषि विभाग के अनुसार, बीते 12 वर्षों में जिले में मक्का उत्पादन की उत्पादकता में 50 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है।
मक्का उत्पादन में बढ़ोतरी, किसानों को मिल रही बेहतर उपज
नबरंगपुर में आधुनिक कृषि तकनीकों और उन्नत संकर बीजों के इस्तेमाल से मक्के की पैदावार में सुधार हुआ है। पहले रबी सीजन में प्रति एकड़ अधिकतम 30 क्विंटल उत्पादन मिलता था, जबकि अब यह बढ़कर 40 से 45 क्विंटल तक पहुंच गया है।
खरीफ सीजन में भी उत्पादन में वृद्धि देखने को मिली है। पहले जहां प्रति एकड़ लगभग 20 क्विंटल मक्का पैदा होता था, वहीं अब किसानों को 25 से 35 क्विंटल तक उपज मिल रही है।
इस बदलाव में बेहतर बीजों, कृषि संबंधी मार्गदर्शन और किसान उत्पादक कंपनियों की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जा रही है।
किसान उत्पादक कंपनियों ने मजबूत की बाजार तक पहुंच
नबरंगपुर जिले में करीब 15 किसान उत्पादक संगठन सक्रिय हैं। इनमें नबरंगी फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी और माता डोंगरी फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी प्रमुख हैं। इन संगठनों के माध्यम से किसानों को बीज उपलब्ध कराने, उपज के विपणन और सामूहिक व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में मदद मिल रही है।
वर्ष 2021 में स्थापित नबरंगी एफपीओ से लगभग 700 शेयरधारक जुड़े हैं। इनमें करीब 350 किसान मक्का उत्पादन करते हैं। कंपनी का सालाना कारोबार लगभग 4 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।
वहीं, वर्ष 2024 में गठित माता डोंगरी एफपीओ में 842 शेयरधारक शामिल हैं। इन संगठनों के विस्तार से किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए संगठित बाजार उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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एफपीओ से किसानों को मिल रहा आर्थिक संबल
उमरकोट प्रखंड के कोपेना गांव की किसान लक्ष्मी सांउता लगभग सात एकड़ भूमि पर मक्के की खेती करती हैं। उनके मुताबिक, उन्हें अपने खेतों से करीब 350 क्विंटल तक उत्पादन मिलता है। वह अपनी उपज लगभग 1,900 से 1,920 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेचती हैं।
इसी क्षेत्र के सेमला गांव की किसान सुआती भात्रा ने तीन एकड़ में डीकेसी9126 किस्म का मक्का लगाया। उन्होंने बताया कि इस बार बीज का आकार छोटा होने के कारण उन्हें पिछले साल के मुकाबले कम भाव मिला। पिछले वर्ष मक्का लगभग 2,200 रुपये प्रति क्विंटल बिका था, जबकि इस बार कीमत घटकर करीब 1,900 रुपये प्रति क्विंटल रह गई।
एफपीओ के माध्यम से किसानों को एडीवी759, डीकेसी9126 और सीपी333 जैसी संकर किस्मों के बीज उपलब्ध कराने तथा बाजार से जोड़ने में सहायता मिल रही है। इससे बिचौलियों पर निर्भरता घटाने और सामूहिक रूप से बेहतर विपणन व्यवस्था विकसित करने की संभावना बढ़ी है।
एफपीओ को सरकारी योजनाओं से मिल रही सहायता
नबरंगपुर में किसान उत्पादक कंपनियों को मजबूत बनाने के लिए सरकारी संस्थाओं से वित्तीय सहयोग भी मिला है। ग्रामीण विकास अभिकरण ओआरएमएएस के माध्यम से नबरंगी एफपीओ को लगभग 61.5 लाख रुपये और माता डोंगरी एफपीओ को करीब 45 लाख रुपये की सहायता प्रदान की गई है।
इसके अलावा, मक्का उत्पादन के विस्तार में दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का भी सहयोग लिया जा रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य किसानों को संगठित करना, कृषि आधारित कारोबार को बढ़ावा देना और ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों का विस्तार करना है।
मुख्यमंत्री मक्का मिशन से सिंचाई को प्रोत्साहन
ओडिशा सरकार ने वर्ष 2023 में मुख्यमंत्री मक्का मिशन की शुरुआत की थी। इसके शुरुआती चरण में राज्य के 15 जिलों के लगभग 45 प्रखंडों को शामिल किया गया।
मिशन के तहत ड्रिप सिंचाई प्रणाली अपनाने के लिए 70 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रावधान बताया गया है। हालांकि, सिंचाई व्यवस्था स्थापित करने में प्रति एकड़ करीब 35 से 40 हजार रुपये का खर्च आने के कारण छोटे किसानों के लिए शेष राशि जुटाना चुनौती बना हुआ है।
यदि किसानों को सिंचाई सुविधाओं के लिए समय पर सहायता और सस्ती वित्तीय व्यवस्था उपलब्ध होती है, तो मक्का उत्पादन को और बढ़ावा मिल सकता है।
न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम दाम मिलना बड़ी चुनौती
नबरंगपुर में मक्का उत्पादन बढ़ने के बावजूद किसानों के सामने उचित बाजार मूल्य प्राप्त करने की समस्या बनी हुई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार ने मक्के का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए 2,400 रुपये और 2026-27 के लिए 2,410 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है।
इसके बावजूद जिले के कई किसान अपनी उपज लगभग 2,200 रुपये प्रति क्विंटल या उससे कम कीमत पर बेचने को मजबूर हैं। एमएसपी की पर्याप्त जानकारी का अभाव और व्यापारियों द्वारा बीज के आकार व गुणवत्ता के आधार पर कीमत घटाना किसानों की आमदनी को प्रभावित करता है।
खेती की लागत बढ़ने और उपज का उचित मूल्य नहीं मिलने से छोटे किसानों की आर्थिक स्थिति पर दबाव पड़ता है। कुछ किसानों को खेती का खर्च पूरा करने के लिए स्थानीय साहूकारों से लगभग पांच प्रतिशत मासिक ब्याज दर पर कर्ज भी लेना पड़ता है। इससे उनकी शुद्ध आय और कम हो जाती है।
किसानों की आय बढ़ाने के लिए जरूरी हैं बेहतर बाजार और सस्ता ऋण
नबरंगपुर में मक्का उत्पादन की बढ़ती संभावनाएं आदिवासी किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण का अवसर प्रस्तुत करती हैं। एफपीओ के विस्तार, गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता, आधुनिक सिंचाई सुविधाओं और कृषि तकनीकों से उत्पादन में सुधार संभव हुआ है।
हालांकि, किसानों को वास्तविक लाभ दिलाने के लिए उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करना, न्यूनतम समर्थन मूल्य से जुड़ी जानकारी बढ़ाना, सस्ती ऋण सुविधाएं उपलब्ध कराना और भंडारण व विपणन व्यवस्था मजबूत करना भी आवश्यक है।
यदि इन चुनौतियों का प्रभावी समाधान किया जाता है, तो नबरंगपुर का मक्का उत्पादन मॉडल ओडिशा के अन्य कृषि क्षेत्रों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है।

