मध्य प्रदेश में प्याज की भंडारण क्षमता 38,000 टन बढ़ाने की योजना, जानें प्याज की बर्बादी रोकने, सरकारी खरीद और किसानों को उचित दाम दिलाने की पूरी जानकारी।
प्याज की फसल को खराब होने से बचाने और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए सरकार ने भंडारण सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया है। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और ओडिशा में प्याज की भंडारण क्षमता बढ़ाने की योजना बनाई गई थी। इसके तहत मध्य प्रदेश में 38,000 टन, महाराष्ट्र में 12,000 टन और ओडिशा में 6,800 टन अतिरिक्त भंडारण क्षमता विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया था। तीनों राज्यों में कुल 56,800 टन भंडारण क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।
प्याज जल्दी खराब होने वाली फसलों में शामिल है। उचित भंडारण व्यवस्था नहीं होने पर किसानों को कटाई के बाद अपनी उपज कम कीमत पर बेचनी पड़ सकती है। वहीं, बाजार में प्याज की उपलब्धता घटने पर उपभोक्ताओं को महंगी कीमतों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में भंडारण सुविधाओं का विस्तार किसानों और उपभोक्ताओं, दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
मध्य प्रदेश में प्याज उत्पादन बढ़ने से भंडारण की जरूरत
मध्य प्रदेश में प्याज की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। संबंधित रिपोर्ट के अनुसार, उस समय राज्य में लगभग 1.30 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में प्याज की बुवाई की गई थी और उत्पादन 40 लाख टन से अधिक रहने का अनुमान था। इससे पिछले वर्ष करीब 1.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में प्याज की खेती हुई थी, जिसमें लगभग 29 लाख टन उत्पादन दर्ज किया गया था।
प्याज के उत्पादन में बढ़ोतरी के साथ इसकी सुरक्षित भंडारण व्यवस्था की आवश्यकता भी बढ़ जाती है। पर्याप्त भंडारण सुविधाएं उपलब्ध होने से किसान अपनी उपज को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकते हैं और बाजार में बेहतर कीमत मिलने की संभावना का लाभ उठा सकते हैं।
प्याज का बफर स्टॉक बनाने पर सरकार का जोर
सरकार ने प्याज की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी को नियंत्रित करने और बाजार में इसकी उपलब्धता बनाए रखने के लिए बफर स्टॉक तैयार करने पर भी ध्यान दिया था। संबंधित जानकारी के मुताबिक, निर्धारित लक्ष्य से अधिक प्याज की खरीद कर भंडार तैयार करने की योजना बनाई गई थी।
पिछले वर्ष जहां सरकार ने लगभग 8,000 टन प्याज खरीदा था, वहीं बाद में खरीद का लक्ष्य बढ़ाया गया। इसका उद्देश्य जरूरत पड़ने पर बाजार में प्याज की आपूर्ति करना और कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को कम करना था।
सरकार ने शीत भंडारण सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर नीति तैयार करने की दिशा में भी काम करने की बात कही थी। ऐसी व्यवस्था से प्याज की कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।
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किसानों को उचित कीमत दिलाने के लिए ₹6 प्रति किलो खरीद की योजना
मध्य प्रदेश में किसानों को प्याज का उचित मूल्य दिलाने के लिए राज्य सरकार ने संबंधित अवधि में ₹6 प्रति किलोग्राम की दर से प्याज खरीदने की योजना घोषित की थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को राहत देने के उद्देश्य से सरकारी खरीद की जानकारी दी थी।
इस व्यवस्था के तहत मध्य प्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ यानी मार्कफेड को खरीद की नोडल एजेंसी बनाया गया था। किसानों को भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में भेजने की व्यवस्था निर्धारित की गई थी।
प्याज की गुणवत्ता की जांच उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों की ओर से की जानी थी। वहीं, भंडारण के लिए मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉरपोरेशन की सुविधाओं का उपयोग करने की योजना बनाई गई थी।
प्रदेश में बनाए गए थे 71 प्याज खरीद केंद्र
योजना के तहत मध्य प्रदेश में 71 खरीद केंद्र निर्धारित किए गए थे। इनमें भोपाल, सीहोर, रायसेन, इंदौर, उज्जैन, देवास, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, मंदसौर, नीमच, रतलाम, शाजापुर, सागर, दमोह, छिंदवाड़ा, जबलपुर, रीवा, सतना, शिवपुरी, गुना और मुरैना सहित कई जिलों के मंडी क्षेत्र शामिल थे।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, प्याज की खरीद 4 जून से 30 जून तक की जानी थी। यदि मंडियों में पर्याप्त गोदाम उपलब्ध नहीं होते, तो अन्य निर्धारित स्थानों पर निगम के गोदामों में खरीद केंद्र बनाने की व्यवस्था भी रखी गई थी।
यह खरीद व्यवस्था किसानों को बाजार में कम कीमत मिलने की स्थिति में राहत देने के उद्देश्य से तैयार की गई थी। हालांकि, ₹6 प्रति किलोग्राम की खरीद दर और संबंधित तारीखें पुरानी योजना से जुड़ी हैं; इन्हें वर्तमान सरकारी दर या चालू खरीद कार्यक्रम नहीं माना जाना चाहिए।
प्याज भंडारण क्षमता बढ़ने से क्या होगा फायदा?
प्याज के लिए पर्याप्त भंडारण सुविधाएं विकसित होने से किसानों को कई तरह के लाभ मिल सकते हैं। उपज का नुकसान कम होने के साथ बाजार में जरूरत के समय प्याज की आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
इसके प्रमुख फायदे हैं:
- फसल की बर्बादी में कमी: बेहतर भंडारण से खराब होने वाली प्याज की मात्रा घटाने में मदद मिल सकती है।
- किसानों को बेहतर मूल्य: किसान मजबूरी में तुरंत बिक्री करने के बजाय बाजार की स्थिति के अनुसार बिक्री का निर्णय ले सकते हैं।
- बाजार में नियमित आपूर्ति: भंडार उपलब्ध रहने से ऑफ-सीजन में प्याज की कमी को कम किया जा सकता है।
- कीमतों में स्थिरता: जरूरत पड़ने पर बफर स्टॉक से बाजार में आपूर्ति बढ़ाकर कीमतों के उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

