सवाई माधोपुर के किसान अवधेश मीणा एक बीघा में मौसमी और अंतरफसल से सालाना 6 लाख रुपये से ज्यादा कमा रहे हैं। जानें उनकी सफल खेती का तरीका।
राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के वजीरपुर क्षेत्र के फुलवाड़ा गांव के किसान अवधेश मीणा ने सीमित जमीन में खेती का ऐसा मॉडल तैयार किया है, जिससे उन्हें सालाना छह लाख रुपये से अधिक की आमदनी हो रही है। उन्होंने एक बीघा खेत में मौसमी की बागवानी के साथ अंतरफसल का प्रयोग कर अपनी कृषि आय में बड़ा इजाफा किया है।
अवधेश मीणा के इस नवाचार को देखते हुए उन्हें हाल ही में आईसीएआर-पूसा, नई दिल्ली की ओर से इनोवेटिव फार्मर अवार्ड से सम्मानित किया गया। उनका खेती मॉडल खास तौर पर छोटे और सीमांत किसानों के लिए आय बढ़ाने का प्रभावी उदाहरण माना जा रहा है।
150 मौसमी पौधों से मिली 6 टन उपज
अवधेश ने अपनी एक बीघा जमीन में कटोल गोल्ड किस्म के करीब 150 मौसमी पौधे लगाए थे। बागवानी के चौथे वर्ष में इन पौधों से लगभग 6 टन मौसमी का उत्पादन हुआ।
इस हिसाब से प्रत्येक पौधे से औसतन करीब 40 किलोग्राम फल प्राप्त हुए। बाजार में मौसमी का औसत भाव लगभग 40 रुपये प्रति किलो रहा, जिससे केवल फलों की बिक्री से करीब 2.25 लाख रुपये की सकल आय हुई।
पौधों के बीच खाली जमीन से भी कमाई
अवधेश की खेती की खासियत केवल मौसमी की बागवानी तक सीमित नहीं है। उन्होंने फलदार पौधों के बीच उपलब्ध खाली जगह का इस्तेमाल अंतरफसल के लिए किया।
बाग लगाने के शुरुआती तीन वर्षों में मौसमी के पौधे छोटे होने के कारण फलों का उत्पादन कम था। ऐसे में खेत की खाली जगह में दूसरी फसलें उगाकर उन्होंने अतिरिक्त आमदनी हासिल की। इससे बाग के पूरी तरह उत्पादन में आने से पहले भी खेत से नियमित कमाई होती रही।
टमाटर से 2.18 लाख और शकरकंद से 1.80 लाख रुपये
मौसमी के पौधों के बीच अवधेश ने टमाटर और शकरकंद की अंतरफसल लगाई। इन दोनों फसलों से उन्हें अच्छी अतिरिक्त आय मिली।
- टमाटर की अंतरफसल से करीब 2.18 लाख रुपये
- शकरकंद की फसल से करीब 1.80 लाख रुपये
मौसमी की बिक्री और दोनों अंतरफसलों से हुई आमदनी को मिलाकर उनकी कुल सालाना आय छह लाख रुपये से अधिक पहुंच गई।
एक खेत, दोहरी कमाई का मॉडल
अवधेश मीणा का मॉडल यह बताता है कि फलदार बाग लगाने के बाद शुरुआती वर्षों में किसान को केवल पेड़ों के फल उत्पादन पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। पौधों के बीच उपलब्ध स्थान में कम अवधि वाली फसलें उगाकर उस जमीन से लगातार आय प्राप्त की जा सकती है।
मौसमी के पौधे धीरे-धीरे बड़े होते हैं और पूरी उत्पादन क्षमता तक पहुंचने में समय लेते हैं। इस दौरान अंतरफसल किसान की आय को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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कम पानी वाले क्षेत्रों के लिए मौसमी की खेती उपयोगी
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नींबू वर्गीय फलों की बागवानी राजस्थान के कई कम पानी वाले क्षेत्रों में किसानों के लिए उपयोगी विकल्प हो सकती है। पौधे स्थापित हो जाने के बाद पानी की आवश्यकता कई पारंपरिक फसलों की तुलना में अपेक्षाकृत कम हो सकती है।
कटोल गोल्ड मौसमी की ऐसी किस्म है, जिसे अच्छी पैदावार और स्वाद के कारण किसान पसंद करते हैं। हालांकि किसी भी बागवानी मॉडल को अपनाने से पहले स्थानीय मिट्टी, पानी, जलवायु और बाजार की स्थिति का आकलन करना जरूरी है।
पारंपरिक खेती से अलग अपनाया नया रास्ता
वजीरपुर क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसान अब भी बाजरा, सरसों और चने जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भर हैं। ऐसे में अवधेश ने बागवानी और अंतरफसल का मॉडल अपनाकर खेती से अधिक आय हासिल करने का रास्ता दिखाया है।
उनके खेत को देखने के लिए आसपास के गांवों के किसान भी पहुंच रहे हैं। कई किसान उनकी तकनीक और फसल संयोजन को समझकर अपनी जमीन पर इसी तरह के प्रयोग की योजना बना रहे हैं।
छोटे किसानों के लिए फायदेमंद हो सकती है अंतरफसल
सीमित जमीन वाले किसानों के लिए बागवानी के साथ अंतरफसल एक उपयोगी विकल्प बन सकती है। फलदार पौधों को तैयार होने में कई वर्ष लग सकते हैं, लेकिन उनके बीच खाली स्थान में सब्जियों या कम अवधि वाली फसलों की खेती करके शुरुआती वर्षों में भी आमदनी प्राप्त की जा सकती है।
इससे किसान को एक ही खेत से अलग-अलग समय पर कई प्रकार की उपज मिलती है और किसी एक फसल पर निर्भरता भी कम होती है।
इनोवेटिव फार्मर अवार्ड से मिला सम्मान
अवधेश मीणा के खेती मॉडल और नवाचार को आईसीएआर-पूसा की ओर से सम्मानित किया जाना इस बात का संकेत है कि फसल विविधीकरण और आधुनिक कृषि तकनीक के जरिए छोटी जोत में भी बेहतर आय हासिल की जा सकती है।
उनकी सफलता अब क्षेत्र के दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है। मौसमी की बागवानी के साथ टमाटर और शकरकंद जैसी अंतरफसलों का संयोजन सीमित जमीन से अधिक आर्थिक लाभ हासिल करने का उदाहरण पेश करता है।
किसानों के लिए क्या है सीख?
अवधेश मीणा की कहानी से यह सीख मिलती है कि खेती में केवल जमीन का आकार ही आय तय नहीं करता। सही फसल का चयन, बागवानी, अंतरफसल, बाजार की मांग और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल किसान की आमदनी बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
एक बीघा जमीन पर मौसमी और अंतरफसल का यह मॉडल छोटे किसानों के लिए खेती को अधिक लाभकारी और विविध बनाने की दिशा में एक प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आया है।

