कृषि मंत्रालय ने 22 अक्टूबर से देशभर में ‘खेत बचाओ अभियान’ शुरू करने का ऐलान किया है। जानें मिट्टी, पराली प्रबंधन, फार्मर आईडी और फसल बीमा से जुड़ी अहम जानकारी।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी पहली व्यापक मासिक समीक्षा बैठक आयोजित की। कृषि भवन में हुई इस बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 22 अक्टूबर से देशभर में ‘खेत बचाओ अभियान’ शुरू करने की घोषणा की। बैठक में कृषि सचिव अतीश चंद्र सहित मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि कृषि योजनाओं की सफलता केवल उत्पादन बढ़ने के आंकड़ों से तय नहीं होगी। सरकार का मुख्य उद्देश्य किसानों की आय और आर्थिक अवसर बढ़ाने के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में विदेशी आयात पर निर्भरता कम करना है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक योजना का आकलन इस आधार पर किया जाना चाहिए कि उसका वास्तविक आर्थिक लाभ किसान तक कितना पहुंच रहा है।
22 अक्टूबर से शुरू होगा ‘खेत बचाओ अभियान’
कृषि मंत्रालय के अनुसार प्रस्तावित ‘खेत बचाओ अभियान’ का मुख्य उद्देश्य देश में मिट्टी की गुणवत्ता सुधारना, फसल अवशेष यानी पराली के बेहतर प्रबंधन को बढ़ावा देना और रासायनिक उर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल के प्रति किसानों को जागरूक करना है।
यह राष्ट्रव्यापी अभियान 22 अक्टूबर से शुरू होकर आने वाले कई सप्ताह तक चलेगा। अभियान में राज्य सरकारों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी। कृषि वैज्ञानिकों और स्थानीय कृषि अधिकारियों की टीमें किसानों के बीच जाकर उन्हें खेती से जुड़े व्यावहारिक उपायों की जानकारी देंगी।
अभियान के दौरान किसानों को मिट्टी की जांच, उर्वरकों के संतुलित उपयोग और फसल अवशेषों के वैज्ञानिक प्रबंधन के बारे में जागरूक किया जाएगा।
मिट्टी की सेहत और पराली प्रबंधन पर विशेष जोर
पिछले कुछ वर्षों में कई राज्यों में पराली जलाने की घटनाएं पर्यावरण प्रदूषण के साथ-साथ कृषि भूमि की गुणवत्ता को लेकर भी चिंता का विषय रही हैं। फसल अवशेषों को खेत में जलाने से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होने और वायु प्रदूषण बढ़ने की समस्या सामने आती है।
इसी को ध्यान में रखते हुए कृषि मंत्रालय ने खेतों में पराली के वैकल्पिक और वैज्ञानिक उपयोग को अभियान का अहम हिस्सा बनाया है। मंत्रालय का जोर ऐसी कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने पर है, जिनसे मिट्टी की उत्पादकता लंबे समय तक बनी रहे।
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10.77 करोड़ किसानों की बनी यूनिक फार्मर आईडी
मासिक समीक्षा बैठक में डिजिटल कृषि मिशन की प्रगति की भी जानकारी दी गई। मंत्रालय के मुताबिक अब तक देश में 10.77 करोड़ किसानों की यूनिक फार्मर आईडी तैयार की जा चुकी है। सरकार का लक्ष्य लगभग 14 करोड़ किसानों को इस डिजिटल पहचान व्यवस्था से जोड़ना है।
फार्मर आईडी के जरिए किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया आसान बनाने की कोशिश की जा रही है। इसमें सब्सिडी, कृषि ऋण, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद, फसल बीमा और प्राकृतिक आपदा से संबंधित सहायता जैसी योजनाएं शामिल हैं।
डिजिटल व्यवस्था के विस्तार से सरकारी सहायता सीधे किसानों के बैंक खातों तक पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है। इससे भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और बिचौलियों की भूमिका कम करने में भी मदद मिल सकती है।
फसल बीमा में किसानों का पंजीकरण बढ़ा
बैठक में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जुड़ी प्रगति की भी समीक्षा की गई। मंत्रालय के अनुसार इस वर्ष फसल बीमा योजना में किसानों के पंजीकरण में 23 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
इसके अलावा देश में दलहन और तिलहन उत्पादन ने निर्धारित राष्ट्रीय लक्ष्य की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में भी विस्तार दर्ज किया गया है। सरकार इन क्षेत्रों को कृषि आत्मनिर्भरता और टिकाऊ खेती के लिए महत्वपूर्ण मान रही है।
किसान की आय और भविष्य की खेती पर सरकार का फोकस
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बैठक में कहा कि खेतों का संरक्षण केवल वर्तमान फसल उत्पादन से जुड़ा विषय नहीं है। इसका सीधा संबंध आने वाली पीढ़ियों की खाद्य और पोषण सुरक्षा से भी है।
उन्होंने अधिकारियों को राज्यों के साथ समन्वय कर ‘खेत बचाओ अभियान’ की दीर्घकालिक योजना तैयार करने के निर्देश दिए। सरकार का लक्ष्य खेती में ऐसी तकनीकों और पद्धतियों को बढ़ावा देना है, जिनसे उत्पादन के साथ मिट्टी की गुणवत्ता और किसानों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो सके।
हर महीने होगी कृषि योजनाओं की समीक्षा
कृषि मंत्रालय अब इस तरह की मासिक समीक्षा बैठकों को नियमित रूप से आयोजित करने की तैयारी में है। इन बैठकों के जरिए केंद्र सरकार कृषि योजनाओं की प्रगति, राज्यों की तैयारियों और किसानों से जुड़ी जमीनी समस्याओं की लगातार निगरानी करेगी।
आने वाले महीनों में ‘खेत बचाओ अभियान’, डिजिटल कृषि मिशन और अन्य प्रमुख योजनाओं की राज्यवार प्रगति की समीक्षा की जाएगी। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में सामने आने वाली समस्याओं को समय रहते दूर करने पर जोर रहेगा।
रबी सीजन से पहले अभियान की शुरुआत
कृषि मंत्रालय की यह समीक्षा बैठक ऐसे समय हुई है जब खरीफ सीजन समाप्त होने के बाद देश के कई हिस्सों में रबी फसलों की तैयारी शुरू हो रही है। किसान गेहूं, चना और सरसों जैसी प्रमुख रबी फसलों की बुवाई की तैयारी में जुटे हैं।
ऐसे समय में मिट्टी परीक्षण, उर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल और फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर जागरूकता अभियान किसानों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम
मंत्रालय के इस अभियान को प्राकृतिक खेती, टिकाऊ कृषि और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल को बढ़ावा देने की सरकार की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के साथ डिजिटल कृषि व्यवस्था को मजबूत करने पर भी सरकार लगातार जोर दे रही है।
आने वाले समय में मासिक समीक्षा बैठकों के माध्यम से इन योजनाओं की प्रगति पर नजर रखी जाएगी। खास तौर पर राज्यों में ‘खेत बचाओ अभियान’ के क्रियान्वयन और किसानों तक डिजिटल कृषि सेवाओं की पहुंच को प्रमुखता से मॉनिटर किया जाएगा।

