पूसा मक्का की 5 उन्नत किस्मों की खासियत जानें। ये किस्में 74 से 95 दिनों में तैयार होती हैं और बेहतर प्रबंधन से 126.6 क्विंटल/हेक्टेयर तक उपज दे सकती हैं।
मक्का की खेती करने वाले किसानों के लिए उन्नत किस्मों का चयन बेहद महत्वपूर्ण होता है। अच्छी किस्म का चुनाव करने से फसल की अवधि कम करने के साथ उत्पादन और पोषण गुणवत्ता में भी सुधार किया जा सकता है। कृषि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित पूसा मक्का की कई हाइब्रिड किस्में अलग-अलग कृषि क्षेत्रों के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं।
इनमें कुछ किस्में कम समय में तैयार हो जाती हैं, जबकि कुछ में गुणवत्ता वाले प्रोटीन या प्रोविटामिन-ए जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। पूसा की इन पांच प्रमुख किस्मों में पूसा एचएम 8 उन्नत, पूसा सुपर स्वीट कॉर्न 1, पूसा एचएम 4 उन्नत, पूसा एचएम 9 उन्नत और पूसा विवेक QPM 9 उन्नत शामिल हैं।
पूसा एचएम 8 उन्नत
पूसा एचएम 8 उन्नत एक हाइब्रिड मक्का किस्म है, जिसे खरीफ सीजन में खेती के लिए विकसित किया गया है। यह किस्म आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना और महाराष्ट्र जैसे राज्यों के लिए उपयुक्त बताई गई है।
इस किस्म की फसल करीब 95 दिनों में तैयार हो जाती है। इसकी औसत उपज लगभग 62.6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बताई गई है, जबकि बेहतर परिस्थितियों में उत्पादन 92.6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंच सकता है।
यह किस्म Marker Assisted Selection यानी MAS तकनीक से विकसित की गई है। इसमें लाइसिन और ट्रिप्टोफैन जैसे आवश्यक अमीनो एसिड भी पाए जाते हैं, जिससे इसकी पोषण गुणवत्ता बेहतर मानी जाती है।
पूसा सुपर स्वीट कॉर्न 1
पूसा सुपर स्वीट कॉर्न 1 एक स्वीट कॉर्न हाइब्रिड किस्म है। इसे देश के विभिन्न कृषि क्षेत्रों में उगाया जा सकता है और यह खरीफ मौसम के लिए उपयुक्त है।
इसकी परिपक्वता अवधि करीब 74 से 81 दिन है। सामान्य परिस्थितियों में इसकी उपज लगभग 75.3 से 101.6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक हो सकती है। अच्छी कृषि तकनीक और उचित प्रबंधन के साथ संभावित उत्पादन 105.1 से 126.6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंच सकता है।
इस किस्म में Shrunken-2 जीन पाया जाता है, जिसकी वजह से इसमें मिठास अधिक होती है। इसकी ब्रिक्स वैल्यू करीब 15.9 प्रतिशत तक बताई गई है।
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पूसा एचएम 4 उन्नत
पूसा एचएम 4 उन्नत को खरीफ मौसम के लिए विकसित किया गया है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मैदानी इलाकों में इसकी खेती के लिए इसे उपयुक्त माना जाता है।
यह किस्म लगभग 87 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। इसकी औसत उपज करीब 64.2 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है, जबकि अनुकूल परिस्थितियों में संभावित उत्पादन 85.7 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक हो सकता है।
पूसा एचएम 4 उन्नत भी MAS तकनीक से विकसित किस्म है। इसमें लाइसिन और ट्रिप्टोफैन जैसे आवश्यक अमीनो एसिड मौजूद होते हैं, जिसके कारण इसे पोषण की दृष्टि से उपयोगी माना जाता है।
पूसा एचएम 9 उन्नत
पूसा एचएम 9 उन्नत को बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रों में खेती के लिए उपयुक्त बताया गया है। यह भी खरीफ सीजन की हाइब्रिड मक्का किस्म है।
फसल को तैयार होने में लगभग 89 दिन लगते हैं। इसकी औसत उपज करीब 52 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है, जबकि उचित प्रबंधन के साथ संभावित उत्पादन 74.1 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंच सकता है।
इस किस्म को भी MAS तकनीक से विकसित किया गया है। इसमें लाइसिन और ट्रिप्टोफैन की मात्रा अपेक्षाकृत अच्छी बताई गई है, जिससे इसकी पोषण गुणवत्ता बढ़ जाती है।
पूसा विवेक QPM 9 उन्नत
पूसा विवेक QPM 9 उन्नत मक्का की एक विशेष हाइब्रिड किस्म है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों और पूर्वोत्तर राज्यों में इसकी खेती के लिए इसे उपयुक्त माना गया है।
इसकी फसल करीब 83 से 93 दिनों में तैयार हो जाती है। औसत उत्पादन 55.9 से 59.2 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक बताया गया है, जबकि बेहतर परिस्थितियों में 79.6 से 98 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक संभावित उपज मिल सकती है।
इस किस्म की खासियत इसमें मौजूद प्रोविटामिन-A है। इसमें प्रोविटामिन-A करीब 8.15 पीपीएम, लाइसिन 2.67 प्रतिशत और ट्रिप्टोफैन 0.74 प्रतिशत तक पाया जाता है। यही वजह है कि पोषण के लिहाज से इसे महत्वपूर्ण किस्म माना जाता है।
मक्का की अच्छी पैदावार के लिए खेती प्रबंधन
मक्का की बेहतर उपज के लिए सिर्फ उन्नत बीज का चयन पर्याप्त नहीं है। किसान को बुवाई की दूरी, पोषक तत्व, सिंचाई और खरपतवार प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए।
सामान्य तौर पर मक्का की बुवाई के लिए करीब 20 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर की जरूरत होती है। पंक्तियों के बीच लगभग 60 से 75 सेंटीमीटर और पौधों के बीच 18 से 20 सेंटीमीटर की दूरी रखने की सलाह दी जाती है।
पोषक तत्व प्रबंधन के लिए 100:60:40:25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर NPK और जिंक के उपयोग का उल्लेख किया गया है। हालांकि उर्वरक की वास्तविक मात्रा मिट्टी की जांच और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह के आधार पर तय करना बेहतर है।
फसल में फूल आने और दाना बनने के समय पर्याप्त नमी बनाए रखना जरूरी होता है। इस अवधि में सिंचाई की कमी होने पर उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
खरपतवारों को नियंत्रित करने के लिए बुवाई के बाद उचित खरपतवारनाशी का इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं डाउनी मिल्ड्यू जैसी बीमारियों और तना छेदक या दीमक जैसे कीटों की स्थिति में स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार स्वीकृत दवाओं का प्रयोग करना चाहिए।
किसान किस्म का चुनाव क्षेत्र के अनुसार करें
मक्का की सभी किस्में हर क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी के लिए समान रूप से उपयुक्त नहीं होतीं। इसलिए किसान को अपने क्षेत्र, मौसम, मिट्टी की स्थिति और बाजार की मांग को ध्यान में रखते हुए किस्म का चुनाव करना चाहिए।
पूसा की ये उन्नत किस्में कम अवधि में तैयार होने, बेहतर उत्पादन और पोषण गुणवत्ता जैसी विशेषताओं के कारण किसानों के लिए उपयोगी विकल्प हो सकती हैं। सही किस्म के साथ संतुलित पोषण, समय पर सिंचाई और फसल सुरक्षा प्रबंधन अपनाने से मक्का की खेती से बेहतर उत्पादन प्राप्त करने की संभावना बढ़ सकती है।

