खंडवा के किसान राकेश पगारे ने मल्चर मशीन से 125 खेतों में काम कर ₹60 हजार कमाए। जानें कृषि यंत्र पर ₹85,800 के अनुदान की पूरी जानकारी।
मध्य प्रदेश में किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों से जोड़ने और खेती की लागत कम करने के उद्देश्य से संचालित सरकारी योजनाएं किसानों के लिए उपयोगी साबित हो रही हैं। खंडवा जिले के पंधाना तहसील के शाहपुरा गांव के किसान राकेश पगारे ने मल्चर मशीन का इस्तेमाल करके अतिरिक्त आमदनी का जरिया तैयार किया है। उन्होंने अब तक करीब 125 खेतों में मल्चर चलाकर लगभग 60 हजार रुपये की कमाई की है।
राकेश पगारे को कृषि विभाग के माध्यम से ई-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल के तहत सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन योजना का लाभ मिला। सरकारी अनुदान की मदद से उन्होंने मल्चर मशीन खरीदी और अब दूसरे किसानों के खेतों में भी इसका उपयोग कर अपनी आय बढ़ा रहे हैं।
मल्चर मशीन खरीदने पर मिला ₹85,800 का अनुदान
किसान राकेश पगारे के मुताबिक, मल्चर मशीन की कुल कीमत 1 लाख 85 हजार 578 रुपये थी। इसमें मध्य प्रदेश सरकार की ओर से 85 हजार 800 रुपये का अनुदान दिया गया। इस आर्थिक सहायता से उनके लिए आधुनिक कृषि यंत्र खरीदना आसान हुआ।
मल्चर मशीन मिलने के बाद उन्होंने इसका उपयोग अपने खेत के साथ-साथ दूसरे किसानों के खेतों में भी करना शुरू किया। इससे उन्हें खेती के अलावा कृषि यंत्र के इस्तेमाल से अतिरिक्त कमाई करने का अवसर मिला।
125 खेतों में मल्चर चलाकर कमाए 60 हजार रुपये
राकेश पगारे ने बताया कि वह अब तक लगभग 125 खेतों में मल्चर मशीन चला चुके हैं। इस काम से उन्हें करीब 60 हजार रुपये की अतिरिक्त आमदनी हुई है।
मल्चर मशीन की मदद से खेतों में फसल कटाई के बाद बचे अवशेषों का प्रबंधन किया जा सकता है। इससे किसानों को नरवाई या फसल अवशेष जलाने के बजाय उनका उपयोग खेत में ही करने का विकल्प मिलता है।
राकेश के अनुसार, जिन 125 खेतों में उन्होंने मल्चर का उपयोग किया, वहां फसल अवशेषों को जलाने की जरूरत नहीं पड़ी। इससे वायु प्रदूषण कम करने और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिली।
क्या है मल्चर मशीन और खेती में कैसे आती है काम?
मल्चर एक आधुनिक कृषि यंत्र है, जिसका इस्तेमाल फसल कटाई के बाद खेतों में बचे डंठलों, पत्तियों और अन्य अवशेषों को छोटे टुकड़ों में काटने के लिए किया जाता है। इन अवशेषों को खेत में फैलाकर या मिट्टी में मिलाकर उनका प्रबंधन किया जा सकता है।
मल्चर के प्रमुख फायदे इस प्रकार हैं:
- फसल अवशेषों का प्रबंधन: खेत में बची नरवाई को जलाने की जरूरत कम होती है।
- मिट्टी की गुणवत्ता में मदद: अवशेषों के मिट्टी में मिल जाने से जैविक पदार्थ बढ़ाने में सहायता मिल सकती है।
- प्रदूषण में कमी: खेतों में अवशेष जलाने से होने वाले धुएं और वायु प्रदूषण को कम करने में मदद मिलती है।
- अतिरिक्त कमाई का अवसर: किसान मल्चर मशीन का इस्तेमाल दूसरे किसानों के खेतों में करके सेवा शुल्क के रूप में आय अर्जित कर सकते हैं।
हालांकि, मशीन का वास्तविक लाभ खेत की स्थिति, फसल के अवशेषों और मशीन के सही उपयोग पर निर्भर करता है।
सरकारी कृषि यंत्र अनुदान योजना से किसानों को मिल रहा लाभ
मध्य प्रदेश सरकार का ई-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल किसानों को कृषि यंत्रों की खरीद पर सहायता उपलब्ध कराने का माध्यम है। इसके अंतर्गत संबंधित योजनाओं के नियमों और पात्रता के अनुसार किसान निर्धारित कृषि उपकरणों पर अनुदान के लिए आवेदन कर सकते हैं।
राकेश पगारे की सफलता इस बात का उदाहरण है कि सरकारी सहायता से खरीदे गए कृषि यंत्र का उपयोग खेती को बेहतर बनाने के साथ-साथ कमाई के अतिरिक्त साधन के रूप में भी किया जा सकता है।
फसल अवशेष जलाने के बजाय मल्चर अपनाने की अपील
किसान राकेश पगारे ने कृषि यंत्र पर अनुदान उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने मल्चर मशीन के उपयोग को फसल अवशेषों के बेहतर प्रबंधन के लिए उपयोगी बताया।
मल्चर जैसी मशीनें किसानों को नरवाई जलाने के विकल्प उपलब्ध कराती हैं। इनका सही इस्तेमाल मिट्टी के संरक्षण, प्रदूषण में कमी और कृषि कार्यों को अधिक सुविधाजनक बनाने में मदद कर सकता है।

