इंदौर में नरवाई जलाने पर किसानों को ₹15,000 तक जुर्माना भरना पड़ सकता है। जानें फसल अवशेष प्रबंधन के वैज्ञानिक तरीके और मिट्टी को नुकसान से बचाने के उपाय।
मध्य प्रदेश के इंदौर जिले में सोयाबीन की कटाई शुरू होने के साथ ही प्रशासन ने किसानों को खेतों में नरवाई नहीं जलाने की सलाह दी है। फसल कटने के बाद खेतों में बचे अवशेषों को आग लगाने से मिट्टी की उर्वरता कम होने के साथ वायु प्रदूषण भी बढ़ता है। इसे रोकने के लिए जिला प्रशासन और कृषि विभाग किसानों को फसल अवशेषों के वैज्ञानिक प्रबंधन के तरीके बताएंगे। निर्धारित प्रावधानों के तहत नरवाई जलाने पर किसानों को 2,500 रुपये से लेकर 15,000 रुपये तक पर्यावरण क्षतिपूर्ति राशि देनी पड़ सकती है।
जिला प्रशासन, किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग और कृषि अभियांत्रिकी विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे फसल अवशेषों को जलाने के बजाय उनका उपयोग खाद, पशु चारे और अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार करने में करें।
नरवाई जलाने पर कितना लगेगा जुर्माना?
मध्य प्रदेश शासन के निर्धारित प्रावधानों के अनुसार, खेतों में नरवाई जलाने की घटना पर भूमि के रकबे के आधार पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति राशि वसूलने का प्रावधान है।
जुर्माने का विवरण इस प्रकार है:
- 2 एकड़ तक जमीन: नरवाई जलाने की प्रत्येक घटना पर 2,500 रुपये।
- 2 से 5 एकड़ तक जमीन: प्रत्येक घटना पर 5,000 रुपये।
- 5 एकड़ से अधिक जमीन: प्रत्येक घटना पर 15,000 रुपये।
इसके अतिरिक्त, नरवाई में आग लगाने के मामले में पुलिस द्वारा प्रकरण भी दर्ज किया जा सकता है। इसलिए किसानों को फसल कटाई के बाद अवशेषों के निपटान में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक करेगा कृषि विभाग
नरवाई प्रबंधन को लेकर जिले के सभी विकासखंडों की ग्राम पंचायतों में जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इसके लिए कृषि विभाग के मैदानी अधिकारियों, राजस्व विभाग के पटवारियों और पंचायत विभाग के पंचायत सचिवों की मदद ली जाएगी।
किसानों को समझाया जाएगा कि फसल अवशेष जलाने से मिट्टी, पर्यावरण और आसपास की संपत्ति को किस तरह नुकसान पहुंचता है। साथ ही, उन्हें ऐसे कृषि यंत्रों और वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी दी जाएगी, जिनकी सहायता से नरवाई का उपयोगी तरीके से प्रबंधन किया जा सकता है।
नरवाई जलाने से मिट्टी की उर्वरता पर पड़ता है असर
फसल अवशेषों को खेत में जलाना मिट्टी की सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। आग की गर्मी से मिट्टी में मौजूद लाभदायक सूक्ष्मजीवों और केंचुओं को नुकसान पहुंचता है। ये जीव मिट्टी में जैविक पदार्थों के विघटन और पोषक तत्वों के चक्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
लगातार नरवाई जलाने से मिट्टी की संरचना प्रभावित हो सकती है और उसकी जल धारण क्षमता में भी कमी आ सकती है। इससे भविष्य की फसलों के विकास पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका रहती है।
इसके अलावा, नरवाई जलाने से धुआं और प्रदूषक तत्व हवा में फैलते हैं। खेतों में लगी आग आसपास की खड़ी फसलों, संपत्तियों और लोगों के लिए भी खतरा पैदा कर सकती है।
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स्ट्रॉ रीपर और बेलर मशीन से करें फसल अवशेषों का उपयोग
कृषि विभाग ने किसानों को नरवाई के प्रबंधन के लिए कई उपयोगी विकल्प अपनाने की सलाह दी है। इन तरीकों से अवशेषों को जलाने के बजाय उनका दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है।
1. स्ट्रॉ रीपर से बनाएं पशु चारा
स्ट्रॉ रीपर यानी भूसा बनाने वाली मशीन की मदद से फसल के बचे अवशेषों से भूसा तैयार किया जा सकता है। इससे पशुओं के चारे के लिए उपयोगी सामग्री मिल सकती है।
2. बेलर मशीन से बनाएं फसल अवशेषों की गांठें
बेलर मशीन की सहायता से फसल अवशेषों को दबाकर गांठों का रूप दिया जा सकता है। इनका इस्तेमाल कागज उद्योग, बायोमास आधारित ऊर्जा उत्पादन और अन्य उपयोगों में किया जा सकता है।
3. मल्चर से बनाएं जैविक खाद
मल्चर मशीन फसल अवशेषों को छोटे टुकड़ों में काटती है। इन अवशेषों को खेत में फैलाकर मिट्टी में मिलाया जा सकता है, जहां वे धीरे-धीरे विघटित होकर जैविक पदार्थ बढ़ाने में मदद करते हैं।
4. स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम वाले हार्वेस्टर का करें इस्तेमाल
किसान फसल कटाई के दौरान ऐसे कंबाइन हार्वेस्टर का उपयोग कर सकते हैं, जिनमें स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम लगा हो। इससे खेत में बचे अवशेषों का बेहतर प्रबंधन करने में सहायता मिलती है।
खेत में फसल अवशेष मिलाने से बढ़ सकते हैं पोषक तत्व
नरवाई को खेत से हटाने के अलावा उसे मिट्टी में मिलाना भी एक विकल्प है। इसके लिए कल्टीवेटर, रोटावेटर और डिस्क हैरो जैसे कृषि यंत्रों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
उचित प्रबंधन के साथ फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाने से जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ाने और मिट्टी की संरचना बनाए रखने में मदद मिल सकती है। अवशेषों के विघटन से पोषक तत्व भी मिट्टी में वापस पहुंचते हैं, जो अगली फसल के लिए उपयोगी हो सकते हैं।
हालांकि, अवशेषों को मिट्टी में मिलाने का सही तरीका और समय खेत की स्थिति, नमी, उपलब्ध मशीनों और अगली फसल की बुवाई के समय के अनुसार तय करना चाहिए।
नरवाई प्रबंधन से किसानों को हो सकती है अतिरिक्त कमाई
फसल अवशेष किसानों के लिए केवल अपशिष्ट नहीं हैं। सही तकनीक अपनाकर इनका इस्तेमाल पशु चारा, जैविक खाद और बायोमास जैसे उपयोगी उत्पाद तैयार करने में किया जा सकता है।
इससे एक तरफ खेतों में आग लगाने की जरूरत कम हो सकती है, वहीं दूसरी तरफ अवशेषों के उपयोग से अतिरिक्त आय के अवसर भी बन सकते हैं। इसके लिए किसानों को अपने क्षेत्र में उपलब्ध मशीनों, स्थानीय मांग और अवशेषों के उपयोग से जुड़े विकल्पों की जानकारी लेनी चाहिए।
प्रशासन की किसानों से अपील, नरवाई जलाने से बचें
इंदौर जिला प्रशासन और संबंधित विभागों ने किसानों से अपील की है कि सोयाबीन सहित अन्य फसलों की कटाई के बाद खेतों में बचे अवशेषों को आग न लगाएं। किसानों को वैज्ञानिक तरीके अपनाकर नरवाई का प्रबंधन करने और दूसरे किसानों को भी इसके नुकसान के प्रति जागरूक करने के लिए कहा गया है।
नरवाई का उचित उपयोग मिट्टी की सेहत बनाए रखने, प्रदूषण कम करने और खेती की लागत तथा आय को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने में मदद कर सकता है। किसानों के लिए फसल अवशेषों को जलाने के बजाय उनका उपयोग करना पर्यावरण और कृषि, दोनों के लिहाज से बेहतर विकल्प है।

