भिंड के किसान शुभम सिंह भदौरिया ने ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक अपनाकर फसल की उपज 40% तक बढ़ाई और पानी की खपत में 30% तक कमी की।
मध्य प्रदेश के भिंड जिले के एक किसान ने आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर खेती को अधिक लाभदायक बनाने की दिशा में सफलता हासिल की है। ग्राम मानहड़ के रहने वाले शुभम सिंह भदौरिया ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के तहत ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक अपनाई। इससे उन्हें पानी की बचत करने, खेती की लागत कम करने और फसल उत्पादन बढ़ाने में मदद मिली। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इन तकनीकों के इस्तेमाल से उनकी फसलों की उपज में 30 से 40 प्रतिशत तक वृद्धि हुई, जबकि पानी की खपत में 20 से 30 प्रतिशत तक कमी आई।
पारंपरिक खेती में बढ़ती लागत बनी चुनौती
शुभम सिंह भदौरिया पहले मुख्य रूप से गेहूं और सरसों की खेती करते थे। पारंपरिक तरीके से खेती करने के बावजूद उन्हें उत्पादन में अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा था। खेती की लागत बढ़ने और उत्पादन में कमी आने से आमदनी बढ़ाना चुनौती बन गया था।
ऐसे में उन्होंने उद्यानिकी फसलों की खेती की ओर रुख किया। उद्यानिकी विभाग से तकनीकी मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का सहयोग मिलने के बाद उन्होंने खेती के आधुनिक तरीकों को अपनाना शुरू किया। इसका उद्देश्य कम संसाधनों में बेहतर उत्पादन हासिल करना और खेती को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना था।
ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग से पपीते की खेती को मिला फायदा
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत खेत में ड्रिप सिंचाई प्रणाली स्थापित की गई। इसके साथ मल्चिंग तकनीक का इस्तेमाल भी किया गया। इन दोनों तरीकों ने पपीते की खेती के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
ड्रिप सिंचाई के माध्यम से पौधों की जड़ों तक नियंत्रित मात्रा में पानी पहुंचाया जाता है। इससे जरूरत के मुताबिक सिंचाई करने और पानी की बर्बादी कम करने में मदद मिलती है।
वहीं, मल्चिंग से खेत की मिट्टी की सतह ढकी रहती है। इससे खरपतवारों की वृद्धि को नियंत्रित करने और मिट्टी में नमी बनाए रखने में सहायता मिलती है। नतीजतन, खेत में खरपतवार नियंत्रण के लिए होने वाला खर्च भी कम हो सकता है।
खेती की लागत घटी और फसल उत्पादन में हुआ सुधार
शुभम सिंह के भाई अमित सिंह भदौरिया फसलों की देखभाल में सहयोग करते हैं। उनके अनुसार, आधुनिक तकनीकों को अपनाने के बाद खेती में रासायनिक दवाओं और खाद के इस्तेमाल को कम करने में मदद मिली है। इससे उत्पादन लागत घटाने और मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर बनाए रखने की दिशा में लाभ मिला।
ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग के बेहतर प्रबंधन से फसलों को जरूरत के अनुसार पानी उपलब्ध कराया जा सका। इसके साथ खरपतवार नियंत्रण आसान हुआ और फसल की देखभाल अधिक व्यवस्थित तरीके से होने लगी।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन तकनीकों से फसल उत्पादन में 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी और पानी की खपत में 20 से 30 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई।
हालांकि, वास्तविक परिणाम फसल की किस्म, मिट्टी, मौसम और खेती के प्रबंधन के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं।
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पपीते के साथ कई सब्जियों की भी कर रहे खेती
शुभम सिंह भदौरिया केवल पपीते की खेती तक सीमित नहीं हैं। वे अपने खेत में मौसमी और अन्य सब्जियां भी उगा रहे हैं। इनमें पालक, मूली, लहसुन, प्याज, ग्वारफली, पत्तागोभी और तुअर जैसी फसलें शामिल हैं।
विभिन्न फसलों की खेती करने से किसान को उत्पादन के कई विकल्प मिलते हैं। इससे मौसम और बाजार की परिस्थितियों के अनुसार खेती की योजना बनाने में मदद मिल सकती है। साथ ही, एक ही फसल पर पूरी तरह निर्भर रहने का जोखिम भी कम किया जा सकता है।
PMKSY के तहत ड्रिप और स्प्रिंकलर पर मिलती है वित्तीय सहायता
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में पानी का बेहतर इस्तेमाल करना और सिंचाई सुविधाओं को बढ़ावा देना है। इस योजना के अंतर्गत ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों को अपनाने के लिए पात्र किसानों को वित्तीय सहायता दी जाती है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, छोटे और सीमांत किसानों के लिए ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिस्टम पर 55 प्रतिशत और अन्य किसानों के लिए 45 प्रतिशत तक सहायता का प्रावधान बताया गया है। हालांकि, वास्तविक पात्रता, स्वीकृत लागत और सहायता की शर्तें संबंधित राज्य के दिशा-निर्देशों के अनुसार जांची जानी चाहिए।
किसान अपने जिले के कृषि या उद्यानिकी विभाग से संपर्क करके योजना की पात्रता और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
आधुनिक खेती अपनाने वाले किसानों के लिए बने प्रेरणा
भिंड के शुभम सिंह भदौरिया की खेती का अनुभव बताता है कि सिंचाई और फसल प्रबंधन की बेहतर तकनीकों से खेती को अधिक संसाधन-कुशल बनाया जा सकता है। ड्रिप सिंचाई से पानी का बेहतर उपयोग और मल्चिंग से खरपतवार नियंत्रण आसान हो सकता है।
उनकी पहल दूसरे किसानों को भी आधुनिक कृषि तकनीकों, उद्यानिकी फसलों और सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी लेने के लिए प्रेरित कर सकती है।
यदि किसान अपनी जमीन, मिट्टी, पानी की उपलब्धता और बाजार की मांग के अनुसार सही तकनीक चुनें, तो खेती की लागत को नियंत्रित करने और आमदनी बढ़ाने के अवसर विकसित हो सकते हैं।

