असम के किसान कृपानाथ प्रेमे ने धान के बाद तोरिया की खेती से 8.95 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज हासिल की और ₹29,863 की शुद्ध कमाई की।
असम के एक युवा किसान ने धान की कटाई के बाद खाली रहने वाली जमीन का इस्तेमाल कर खेती से अतिरिक्त कमाई का रास्ता खोज निकाला है। लखीमपुर जिले के मोहुरा चापोरी गांव के किसान कृपानाथ प्रेमे ने धान के बाद एक हेक्टेयर जमीन पर तोरिया की खेती की। इससे उन्हें 8.95 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज मिली और करीब 29,863 रुपये प्रति हेक्टेयर की शुद्ध आय हासिल हुई। उनकी इस पहल से दूसरे किसानों को भी फसल चक्र अपनाकर आमदनी बढ़ाने की प्रेरणा मिल रही है।
धान की खेती से पूरी नहीं हो रही थी परिवार की जरूरतें
कृपानाथ प्रेमे के परिवार के पास कुल 1.5 हेक्टेयर कृषि भूमि है। परिवार खरीफ सीजन में इस जमीन पर साली धान की खेती करता था। धान की कटाई के बाद रबी सीजन में खेत खाली रह जाते थे। इस वजह से जमीन का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाता था और परिवार की कमाई भी मुख्य रूप से धान की फसल पर निर्भर थी।
पोस्टग्रेजुएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद कृपानाथ ने नौकरी की तलाश में बाहर जाने के बजाय अपने पिता के साथ गांव में रहकर खेती करने का फैसला किया। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने के लिए उन्होंने धान के बाद दूसरी फसल उगाने की संभावना तलाशनी शुरू की। इसके लिए उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), लखीमपुर के वैज्ञानिकों से मार्गदर्शन लिया।
KVK लखीमपुर ने सुझाया तोरिया और सरसों की खेती का विकल्प
कृपानाथ की पहल के बाद कृषि विज्ञान केंद्र, लखीमपुर की टीम ने गांव में उपलब्ध कृषि भूमि का जायजा लिया। वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि धान की कटाई के बाद खाली रहने वाले खेतों में राई, सरसों और तोरिया जैसी रबी फसलें उगाई जा सकती हैं।
रबी सीजन 2025-26 में धान के बाद खाली रहने वाले क्षेत्रों में राई-सरसों की खेती को बढ़ावा देने के कार्यक्रम के तहत कृपानाथ के एक हेक्टेयर खेत में तोरिया की TS-38 किस्म का प्रदर्शन किया गया। यह किस्म देर से बुवाई की परिस्थितियों के लिए चुनी गई थी।
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नवंबर के चौथे सप्ताह में की तोरिया की बुवाई
कृपानाथ ने साली धान की कटाई के तुरंत बाद नवंबर के चौथे सप्ताह में तोरिया की बुवाई की। KVK के सुझाए गए कृषि प्रबंधन के अनुसार प्रति हेक्टेयर 10 किलोग्राम बीज का इस्तेमाल किया गया।
फसल के पोषण के लिए प्रति हेक्टेयर 87 किलोग्राम यूरिया, 220 किलोग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP), 25 किलोग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP) और 10 किलोग्राम बोरेक्स का उपयोग किया गया। वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार खेती करने से फसल का प्रदर्शन अच्छा रहा।
8.95 क्विंटल उपज और ₹29,863 प्रति हेक्टेयर की शुद्ध आय
धान के बाद खाली जमीन पर उगाई गई तोरिया की फसल से कृपानाथ प्रेमे को 8.95 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज मिली। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कार्यक्रम में शामिल किसानों के बीच यह सबसे अधिक उपज रही।
इस फसल से उन्हें प्रति हेक्टेयर 29,863 रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हुई। खेती का लाभ-लागत अनुपात (B Ratio) 2.24 दर्ज किया गया। ये नतीजे बताते हैं कि धान की कटाई के बाद खेतों को खाली छोड़ने के बजाय उपयुक्त रबी फसल उगाकर अतिरिक्त आमदनी हासिल की जा सकती है।
खाली खेतों से बढ़ सकती है किसानों की कमाई
कृपानाथ प्रेमे का यह अनुभव दिखाता है कि खेती से आय बढ़ाने के लिए हमेशा अतिरिक्त जमीन की जरूरत नहीं होती। उपलब्ध खेतों में फसल चक्र अपनाकर और स्थानीय मौसम के अनुकूल किस्म चुनकर भूमि का बेहतर उपयोग किया जा सकता है।
हालांकि, तोरिया की पैदावार और मुनाफा मिट्टी, मौसम, बुवाई के समय, सिंचाई, खाद प्रबंधन और बाजार भाव के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इसलिए किसानों को अपने क्षेत्र की परिस्थितियों के मुताबिक कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेकर ही फसल का चयन करना चाहिए।
अगले सीजन में ज्यादा जमीन पर तोरिया उगाने की तैयारी
तोरिया की खेती से मिले अच्छे परिणामों के बाद कृपानाथ प्रेमे अगले सीजन में धान की कटाई के बाद बड़े क्षेत्र में TS-38 किस्म उगाने की योजना बना रहे हैं। उनकी सफलता को देखकर गांव के अन्य किसान भी रबी सीजन में खाली खेतों का इस्तेमाल करने और तोरिया-सरसों की खेती अपनाने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
अगर इस तरह की पहल को कृषि वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन और उपयुक्त तकनीक मिलती है, तो धान के बाद खाली रहने वाली जमीन का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे खेती की तीव्रता बढ़ाने और किसानों की कुल आमदनी में अतिरिक्त योगदान देने की संभावना बनती है।

