Hinduism (हिंदू धर्म):
Hinduism में शादी में कई रस्म और रिवाजों का पालन किया जाता है। इसका कारण निश्चित रूप से होता है। इन रिवाजों को आज भी बदलते वक्त में निभाया जाता है।
- हिंदू धर्म के शादी में कई रीति-रिवाज निभाए जाते हैं।
- ध्रुव तारा को दुल्हन या दूल्हा को दिखाना शुभ माना जाता है।
Hinduism में विवाह के समय कई रीति-रिवाजों को निभाया जाता है, जिनके पीछे धार्मिक, वैज्ञानिक या ज्योतिषीय कारण निश्चित रूप से छिपे हैं। शादी के दौरान दूल्हा और दुल्हन को ध्रुव तारा दिखाना एक रीति है। ये नियम हमेशा फेरे के बाद ही पूरा होता है। इसका क्या प्रमाण है? इसका संबंध क्या है? ध्रुवतारा किसका प्रतीक है? हमारे सभी प्रश्नों का उत्तर भोपाल के ज्योतिष आचार्य योगेश चौरे दे रहे हैं।
ध्रुव तारा क्यों दिखाया जाता है?
Hinduism में शादी के दौरान कई रस्में निभाई जाती हैं, लेकिन एक में वर-वधु को सप्त ऋषि के साथ ध्रुव तारा दिखाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ध्रुव तारा आसमान में स्थिर होता है। ठीक उसी तरह, नवविवाहित दंपत्ति का प्रेम हमेशा स्थिर रहता है। साथ ही वे अपना सारा जीवन खुशहाल से व्यतीत करें।
दूसरे लोग ध्रुव को शुक्र तारा भी मानते हैं। इसका अर्थ है कि शुक्र मधुर संबंधों का प्रतीक है, इसलिए पति-पत्नी के रिश्ते हमेशा मधुर रहें। ध्रुव तारे की तरह, पति-पत्नी दोनों को निरंतर और मधुर प्रेम का आशीष मिलेगा।
सात फेरों के बाद ही ध्रुव तारा क्यों दिखता है?
मान्यता है कि वर-वधु की आधी शादी के बाद ही ध्रुव तारा दिखाया जाता है। सात फेरों के बाद मंगलसूत्र पहनाकर मांग भरने की प्रथा शेष रहती है। इस बीच, ध्रुव तारा दिखाने का उद्देश्य है कि पति-पत्नी अपने जीवन में स्थिरता लाएं और एक दूसरे के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझकर उनका पालन करें।
ध्रुव तारा को किस चीज का प्रतीक माना जाता है?
हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने ध्रुव तारा को आकाश में सबसे पहला तारा माना था। ध्रुव तारा उत्तर दिशा को दर्शाता है, इसलिए इसका नाम भी उत्तर तारा है। पुराने लोगों ने ध्रुव तारा देखकर दिशाओं का पता लगाया।

