भारत घाना कृषि समझौता: भारत और घाना के बीच 5 साल का कृषि समझौता हुआ। जानिए टमाटर उत्पादन, कृषि अनुसंधान, तकनीक हस्तांतरण और किसानों को मिलने वाले संभावित लाभ की पूरी जानकारी।
भारत घाना कृषि समझौता: भारत और घाना ने कृषि अनुसंधान, कृषि शिक्षा और आधुनिक तकनीकों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए पांच साल के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य घाना में टमाटर समेत प्रमुख फसलों की उत्पादकता बढ़ाना, कृषि तकनीक को मजबूत करना और फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करना है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और घाना के CSIR-क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट के बीच हुए इस समझौता ज्ञापन (MoU) की जानकारी विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 6 अक्टूबर को दी। यह समझौता उनकी घाना यात्रा के दौरान संपन्न हुआ। इस मौके पर घाना के विदेश मंत्री सैम ओकुद्ज़ेटो अबलाकवा भी मौजूद रहे।
अपनी यात्रा के दौरान जयशंकर ने घाना के राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा से भी मुलाकात की। उनकी तीन देशों की यात्रा में घाना के अलावा कोटे डी आइवर और इथियोपिया भी शामिल हैं। यह दौरा 6 से 10 अक्टूबर तक निर्धारित था।
घाना में टमाटर की खेती को मिलेगा बढ़ावा
भारत और घाना के बीच हुए कृषि सहयोग समझौते में टमाटर की खेती को विशेष महत्व दिया गया है। इसके तहत भारत घाना को अधिक उपज देने वाली टमाटर की किस्मों और बेहतर कृषि पद्धतियों से जुड़ी विशेषज्ञता उपलब्ध कराने में सहयोग करेगा।
घाना में टमाटर प्रमुख सब्जी फसलों में शामिल है। ऐसे में घरेलू उत्पादन बढ़ाना और किसानों को बेहतर खेती के तरीके उपलब्ध कराना इस साझेदारी के महत्वपूर्ण उद्देश्यों में शामिल है।
भारत के कृषि वैज्ञानिक घाना के स्थानीय मौसम और खेती की परिस्थितियों के अनुरूप उपयोगी तकनीकों को साझा करने में मदद कर सकते हैं। इससे किसानों की उत्पादकता बढ़ाने और कृषि क्षेत्र की चुनौतियों से निपटने के प्रयासों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
कसावा और याम की प्रोसेसिंग पर भी रहेगा फोकस
इस समझौते में सिर्फ सब्जियों की खेती ही नहीं, बल्कि कसावा और याम जैसी महत्वपूर्ण कंद फसलों के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन को भी शामिल किया गया है।
पश्चिम अफ्रीका में ये फसलें खाद्य आपूर्ति और किसानों की आजीविका के लिए अहम मानी जाती हैं। इनकी प्रोसेसिंग से जुड़े बेहतर तरीके अपनाने पर कृषि उत्पादों की उपयोगिता बढ़ाने और किसानों को अतिरिक्त आर्थिक लाभ दिलाने के अवसर बन सकते हैं।
इसके साथ ही भारत और घाना फसल कटाई के बाद उपज को सुरक्षित रखने की तकनीकों पर भी सहयोग करेंगे। इसमें कोल्ड स्टोरेज, रेफ्रिजरेटेड परिवहन और कृषि उत्पादों के भंडारण से संबंधित क्षमता निर्माण पर जोर दिया जाएगा।
also read: 15 दिन में 5 गुना से ज्यादा महंगी हुई चमेली! ₹1,600 प्रति अट्टे पहुंचा भाव, ज…
भारत घाना कृषि समझौता – वैज्ञानिकों और बीज संसाधनों का होगा आदान-प्रदान
भारत-घाना कृषि समझौते का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू दोनों देशों के वैज्ञानिकों के बीच सहयोग बढ़ाना है। इसके तहत अनुसंधान संबंधी अनुभव, वैज्ञानिक जानकारी और जर्मप्लाज्म यानी पौधों के आनुवंशिक संसाधनों के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित किया जाएगा।
जर्मप्लाज्म का उपयोग फसलों की नई और बेहतर किस्में विकसित करने में किया जाता है। अलग-अलग जलवायु और कृषि परिस्थितियों में उपयोगी आनुवंशिक गुणों का अध्ययन करके वैज्ञानिक फसल सुधार के नए विकल्प तलाश सकते हैं।
भारत को धान, गेहूं, दलहन और सब्जियों की उन्नत किस्मों के विकास में लंबा अनुभव हासिल है। इस विशेषज्ञता को अफ्रीकी देशों के साथ साझा करना कृषि अनुसंधान और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
संयुक्त कार्यदल करेगा समझौते की निगरानी
समझौते को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए भारत और घाना एक संयुक्त कार्यदल का गठन करेंगे। यह समूह दोनों संस्थानों के बीच चल रही गतिविधियों की समीक्षा करेगा और भविष्य की योजनाओं पर काम करेगा।
संयुक्त कार्यदल के माध्यम से अनुसंधान कार्यक्रमों की प्रगति का आकलन करने और सहयोग से जुड़े विषयों पर समन्वय स्थापित करने में मदद मिलेगी। हालांकि, इस कार्यदल की पहली बैठक की तारीख अभी घोषित नहीं की गई है।
कृषि के साथ दूसरे क्षेत्रों में भी बढ़ेगा सहयोग
विदेश मंत्री एस. जयशंकर की घाना यात्रा के दौरान कृषि के अलावा वैज्ञानिक अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। भारतीय जूलॉजिकल सर्वे और घाना विश्वविद्यालय के बीच अकादमिक गतिविधियों, वैज्ञानिक अनुसंधान और क्षमता निर्माण को लेकर अलग समझौता किया गया।
दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने व्यापार, निवेश, दवा उद्योग, रक्षा, प्रौद्योगिकी और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे विषयों पर भी चर्चा की। इसके अलावा अफ्रीकी संघ और पश्चिम अफ्रीकी आर्थिक समुदाय (ECOWAS) के साथ भारत के संबंधों को मजबूत करने पर भी बातचीत हुई।
भारत-अफ्रीका कृषि साझेदारी को मिलेगी नई दिशा
भारत अफ्रीकी देशों के साथ कृषि अनुसंधान और तकनीकी सहयोग को लगातार आगे बढ़ा रहा है। इस तरह की साझेदारियां कृषि उत्पादकता बढ़ाने, किसानों को नई तकनीकों से जोड़ने और खाद्य सुरक्षा से संबंधित चुनौतियों का समाधान तलाशने में मदद कर सकती हैं।
भारत और घाना के बीच हुआ पांच साल का समझौता दोनों देशों के कृषि संस्थानों को साथ काम करने का अवसर देगा। इससे भविष्य में उन्नत बीजों, कृषि तकनीकों और फसल प्रबंधन से संबंधित विशेषज्ञता साझा करने के रास्ते भी खुल सकते हैं।
भारतीय बीज कंपनियों और कृषि तकनीक से जुड़ी कंपनियों के लिए भी ऐसे सहयोग से दीर्घकाल में नए कारोबारी अवसर पैदा होने की संभावना है। हालांकि, इन अवसरों का वास्तविक विस्तार समझौते के क्रियान्वयन और भविष्य में होने वाले सहयोग पर निर्भर करेगा।
जयशंकर की घाना यात्रा भारत के अफ्रीकी देशों के साथ कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा रही। कृषि अनुसंधान, तकनीक हस्तांतरण और वैज्ञानिक सहयोग इस साझेदारी के प्रमुख क्षेत्र बने हुए हैं।

