बिहार के रोहतास में ब्रॉड बेड तकनीक से धान के साथ 9 तरह की सब्जियां उगाई गईं। जानें छोटे किसानों के लिए इस खेती पद्धति के फायदे।
खेती के लिए कम जमीन होना अब किसानों के लिए बड़ी बाधा नहीं रह गई है। आधुनिक कृषि तकनीकों की मदद से सीमित खेत में भी कई फसलें उगाने की संभावनाएं बढ़ रही हैं। बिहार के रोहतास जिले में कृषि विज्ञान केंद्र, बिक्रमगंज के वैज्ञानिकों ने ब्रॉड बेड तकनीक का प्रयोग करके एक ही खेत में धान के साथ नौ प्रकार की सब्जियां उगाने का मॉडल तैयार किया है। यह तकनीक खासतौर पर उन किसानों के लिए उपयोगी हो सकती है, जिनके खेतों में बारिश के मौसम में जलभराव की समस्या रहती है।
इस पद्धति में खेत को अलग-अलग ऊंचाई वाले हिस्सों में बांटकर फसलों की जरूरत के अनुसार खेती की जाती है। इससे निचले हिस्से में धान और ऊंचे हिस्से में सब्जियां उगाने का अवसर मिलता है। इस तरह किसान एक ही खेत से विभिन्न फसलें प्राप्त करने की योजना बना सकते हैं।
क्या है ब्रॉड बेड तकनीक और कैसे करती है काम?
ब्रॉड बेड फार्मिंग एक ऐसी खेती पद्धति है, जिसमें खेत में ऊंचे और निचले बेड तैयार किए जाते हैं। प्रत्येक हिस्से का उपयोग अलग-अलग फसलों की जरूरत के अनुसार किया जाता है।
इस तकनीक के मॉडल में लगभग 6 फीट चौड़े ऊंचे बेड और 2 फीट चौड़े निचले हिस्से बनाए जाते हैं। ऊंचे बेड पर गाजर, मूली, पालक और धनिया जैसी सब्जियां लगाई जाती हैं, जबकि निचले हिस्से में धान की खेती की जाती है।
निचले हिस्से में पानी उपलब्ध रहने से धान की फसल को अनुकूल परिस्थितियां मिल सकती हैं। वहीं, ऊंचे बेड पर अतिरिक्त पानी जमा होने की आशंका कम रहती है, जिससे सब्जियों की जड़ों को जलभराव से बचाने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, बेड की चौड़ाई और ऊंचाई खेत की मिट्टी, ढलान, जल निकासी और फसल की जरूरत के अनुसार तय करना जरूरी है।
रोहतास के कृषि विज्ञान केंद्र ने किया सफल प्रयोग
बिहार के रोहतास जिले के बिक्रमगंज स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. रमाकांत सिंह के अनुसार, एक बीघा के प्लॉट में ब्रॉड बेड तकनीक का प्रयोग किया गया। इसमें धान के साथ धनिया, मटर, पालक, गाजर और मूली समेत नौ प्रकार की सब्जियों की खेती की गई।
इस प्रयोग का उद्देश्य सीमित कृषि भूमि का बेहतर उपयोग करना और एक ही खेत में अलग-अलग फसलों को उगाने की संभावना प्रदर्शित करना है।
इस मॉडल से किसानों को फसल विविधीकरण के बारे में जानकारी मिल सकती है। हालांकि, अलग-अलग फसलों से होने वाला वास्तविक उत्पादन और मुनाफा मिट्टी, मौसम, सिंचाई, बीज की गुणवत्ता तथा बाजार भाव पर निर्भर करेगा।
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बारिश में जलभराव वाले खेतों के लिए उपयोगी विकल्प
कई क्षेत्रों में मानसून के दौरान खेतों में पानी भर जाने से सब्जियों की खेती करना मुश्किल हो जाता है। ऐसी परिस्थितियों में ब्रॉड बेड तकनीक उपयोगी विकल्प बन सकती है।
इसके प्रमुख संभावित फायदे हैं:
- जमीन का बेहतर उपयोग: एक ही खेत में धान और विभिन्न सब्जियां उगाने की व्यवस्था की जा सकती है।
- जलभराव से बचाव: ऊंचे बेड पर खेती करने से सब्जियों की जड़ों के आसपास अतिरिक्त पानी रुकने की समस्या कम हो सकती है।
- फसल विविधीकरण: किसान मुख्य फसल के साथ दूसरी फसलें भी उगा सकते हैं।
- आय के नए अवसर: अलग-अलग फसलों की बिक्री से कमाई के अतिरिक्त विकल्प विकसित हो सकते हैं।
- मौसम के अनुसार खेती: खेत की संरचना और फसलों का चयन मौसम के हिसाब से किया जा सकता है।
इन लाभों को प्राप्त करने के लिए खेत में पानी की निकासी और फसलों की आवश्यकताओं का सही प्रबंधन जरूरी है।
रबी सीजन में भी अपनाई जा सकती है तकनीक
ब्रॉड बेड तकनीक का उपयोग केवल खरीफ सीजन तक सीमित नहीं है। रबी मौसम में भी खेत की परिस्थितियों और फसल की जरूरतों के अनुसार इस पद्धति को अपनाया जा सकता है।
इस दौरान ऊंचे बेड पर उपयुक्त सब्जियां और निचले हिस्से में गेहूं जैसी फसल उगाने की योजना बनाई जा सकती है। हालांकि, फसलों का चयन स्थानीय तापमान, मिट्टी की नमी और जल निकासी की स्थिति को ध्यान में रखकर करना चाहिए।
किसानों को किसी भी नई तकनीक को बड़े क्षेत्र में अपनाने से पहले छोटे प्लॉट पर प्रयोग करना चाहिए। कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों से बेड की बनावट, फसल चयन और सिंचाई प्रबंधन की जानकारी लेना भी उपयोगी रहेगा।
छोटे किसानों के लिए खेती में नवाचार का अवसर
ब्रॉड बेड तकनीक खेती में उपलब्ध जमीन का अधिक प्रभावी उपयोग करने का एक विकल्प प्रस्तुत करती है। रोहतास के कृषि विज्ञान केंद्र में किया गया प्रयोग दिखाता है कि उचित खेत प्रबंधन के जरिए धान के साथ सब्जियों की खेती की संभावनाएं तलाश की जा सकती हैं।
छोटे और सीमांत किसान अपनी जमीन, मौसम और बाजार की मांग के अनुसार इस पद्धति का मूल्यांकन कर सकते हैं। सही योजना और स्थानीय कृषि विशेषज्ञों की सलाह से फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने तथा खेती से होने वाली आय के नए अवसर तलाशने में मदद मिल सकती है।

