नेपियर घास की खेती से एक बार रोपाई के बाद 2 से 3 साल तक हरा चारा पाएं। जानें खेती का तरीका, फायदे और पशुपालन विभाग से मिलने वाली ₹4,000 की सहायता की जानकारी।
पशुपालन करने वाले किसानों के लिए पशुओं को सालभर हरा चारा उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती होती है। बार-बार चारे की बुवाई करने में समय, मेहनत और खर्च लगता है। ऐसे में नेपियर घास की खेती किसानों के लिए एक उपयोगी विकल्प बन सकती है। इसकी खासियत यह है कि एक बार रोपाई करने के बाद उचित देखभाल से करीब 2 से 3 साल तक कई बार कटाई करके हरा चारा प्राप्त किया जा सकता है।
उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अमित कुमार वर्मा के अनुसार, नेपियर घास तेजी से बढ़ने वाली चारा फसल है। कटाई के बाद यह दोबारा बढ़ती है, जिससे पशुपालकों को लंबे समय तक हरे चारे की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलती है। इसके अलावा, पशुपालन विभाग की ओर से किसानों को इसकी खेती के लिए ₹4,000 की सहायता दिए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
नेपियर घास की खेती से बार-बार बुवाई की जरूरत होगी कम
आमतौर पर किसान पशुओं के लिए हरा चारा जुटाने के लिए अलग-अलग मौसम में चारा फसलों की बुवाई करते हैं। इससे खेत तैयार करने, बीज लगाने और फसल की देखभाल पर अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है। नेपियर घास इस परेशानी को कम करने में मदद कर सकती है।
इस घास की रोपाई के बाद नियमित देखभाल और उचित सिंचाई से बार-बार कटाई की जा सकती है। इससे डेयरी किसानों और अन्य पशुपालकों को अपने पशुओं के लिए हरा चारा जुटाने में सुविधा मिल सकती है।
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नेपियर घास लगाने के लिए मिल सकती है ₹4,000 की मदद
डॉ. अमित कुमार वर्मा के मुताबिक, नेपियर घास की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए पशुपालन विभाग की ओर से किसानों को ₹4,000 की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई है। इच्छुक किसान अपने क्षेत्र के पशुपालन विभाग से संपर्क करके सहायता की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और उपलब्ध नेपियर घास की जड़ों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
खेत के अलावा मेड़ पर भी लगा सकते हैं नेपियर घास
नेपियर घास की खेती के लिए केवल खेत का बड़ा हिस्सा होना जरूरी नहीं है। किसान इसे खेत की मेड़ों और बगीचे के किनारों पर भी लगा सकते हैं। इससे उपलब्ध जमीन का बेहतर उपयोग किया जा सकता है।
हालांकि, रोपाई के लिए ऐसी जगह चुनना जरूरी है, जहां पानी की निकासी अच्छी हो। पौधों की जड़ों के आसपास लंबे समय तक पानी जमा रहने से उनकी बढ़वार प्रभावित हो सकती है। इसलिए जरूरत के अनुसार सिंचाई करें और खेत में जलभराव से बचाएं।
पशुओं के पोषण में मददगार है नेपियर घास
नेपियर घास पशुओं के लिए हरे चारे का उपयोगी स्रोत है। इसे पशुओं के संतुलित आहार के साथ खिलाया जा सकता है। हरे चारे की नियमित उपलब्धता से पशुओं की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलती है। डेयरी व्यवसाय में चारे की बेहतर व्यवस्था होने से किसानों को पशुओं के रखरखाव की योजना बनाने में भी सुविधा होती है।
किसानों के लिए क्यों फायदेमंद है नेपियर घास?
नेपियर घास की खेती से बार-बार बुवाई का काम कम हो सकता है और लंबे समय तक हरे चारे की उपलब्धता बनी रह सकती है। खासकर उन किसानों के लिए यह उपयोगी विकल्प है, जो खेती के साथ डेयरी या पशुपालन का व्यवसाय भी करते हैं।
किसान रोपाई से पहले अपने क्षेत्र की मिट्टी, जलवायु और सिंचाई की सुविधा के अनुसार स्थानीय पशुपालन या कृषि विभाग से सलाह जरूर लें। साथ ही, ₹4,000 की सहायता और उसकी पात्रता की पुष्टि संबंधित विभाग से करना उचित रहेगा।

