बड़वानी में APEDA और सेडमैप की कार्यशाला में कृषि निर्यात, अदरक के मूल्य संवर्धन, खाद्य प्रसंस्करण और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई।
मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि आधारित व्यवसायों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कृषि उद्यमिता एवं आयात-निर्यात विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) और उद्यमिता विकास केंद्र मध्यप्रदेश (सेडमैप) के संयुक्त तत्वावधान में शहीद भीमा नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में यह कार्यक्रम हुआ।
कार्यशाला में किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (FPO), स्थानीय उद्यमियों, स्टार्टअप शुरू करने के इच्छुक युवाओं और कृषि से जुड़े विद्यार्थियों ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन करने, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने के तरीकों की जानकारी दी।
कृषि उत्पादों के निर्यात और कारोबार की दी जानकारी
सेडमैप के जिला समन्वयक अरविन्द चौहान ने कार्यशाला के उद्देश्य बताते हुए कहा कि स्थानीय किसानों और युवाओं को कृषि के माध्यम से आर्थिक रूप से मजबूत बनाना तथा उन्हें वैश्विक बाजार की संभावनाओं से जोड़ना कार्यक्रम का प्रमुख लक्ष्य है।
कार्यशाला में APEDA के विषय विशेषज्ञ प्रशांत बसोड ने कृषि क्षेत्र में उद्यमिता की संभावनाओं, कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन और खाद्य प्रसंस्करण तकनीकों पर विस्तार से जानकारी दी।
प्रतिभागियों को कृषि उत्पादों के आयात-निर्यात की प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेज, अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों और केंद्र एवं राज्य सरकार की निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं के बारे में भी बताया गया।
अदरक के निर्यात में गुणवत्ता मानकों का पालन जरूरी
एक जिला एक उत्पाद (ODOP) योजना के तहत अदरक उत्पादकों, व्यापारियों और किसान उत्पादक संगठनों को विशेष जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि खाड़ी देशों और यूरोपीय संघ जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अदरक और अन्य कृषि उत्पादों की आपूर्ति के लिए निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन करना जरूरी है।
निर्यात के दौरान कीटनाशक अवशेषों की निर्धारित सीमा का ध्यान रखने, बागवानी उत्पादों के प्रमाणन और सीधे खरीदार-विक्रेता बैठकों के माध्यम से कारोबार के अवसर तलाशने की प्रक्रिया भी समझाई गई।
विशेषज्ञों ने किसानों और उद्यमियों को सलाह दी कि वे निर्यात बाजार में प्रवेश करने से पहले उत्पाद की गुणवत्ता, पैकेजिंग और आवश्यक दस्तावेजों की तैयारी पर ध्यान दें।
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अदरक से तैयार उत्पाद बढ़ा सकते हैं किसानों का मुनाफा
नाबार्ड के जिला विकास अधिकारी नवीन श्रीवास्तव ने अदरक के मूल्य संवर्धन पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि किसान केवल कच्चा अदरक बेचने तक सीमित न रहें, बल्कि उससे सोंठ, अदरक पाउडर, पेस्ट, तेल और फ्लेक्स जैसे उत्पाद तैयार करने की संभावनाएं भी तलाशें।
ऐसे प्रसंस्कृत उत्पादों से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं और किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य हासिल करने में मदद मिल सकती है।
कार्यशाला में बताया गया कि मूल्य संवर्धन के जरिए किसानों को स्थानीय स्तर पर 30 से 40 प्रतिशत तक अधिक लाभ मिलने की संभावना हो सकती है। हालांकि, वास्तविक लाभ उत्पादन लागत, बाजार की मांग, प्रसंस्करण और बिक्री व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
नाबार्ड की ओर से किसान उत्पादक संगठनों और कृषि आधारित उद्यमियों के लिए संचालित योजनाओं की जानकारी भी दी गई।
मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना से स्वरोजगार को बढ़ावा
जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक एस.एल. सोलंकी ने मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना और मध्य प्रदेश सरकार द्वारा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं की जानकारी दी।
उन्होंने युवाओं और स्थानीय उद्यमियों को कृषि आधारित व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया। कार्यशाला में यह भी बताया गया कि कृषि प्रसंस्करण, पैकेजिंग और उत्पादों के विपणन से जुड़े कारोबार ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर पैदा कर सकते हैं।
खाद्य प्रसंस्करण योजनाओं की भी दी जानकारी
वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी संगीता मंडलोई और प्रकाश चौहान ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना के बारे में जानकारी दी। उन्होंने खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े व्यवसायों और उपलब्ध सरकारी सहायता के बारे में प्रतिभागियों को मार्गदर्शन दिया।
कार्यक्रम के दौरान किसानों और उद्यमियों ने अपनी समस्याएं और जिज्ञासाएं भी साझा कीं। प्रतिभागियों ने APEDA के विशेषज्ञों से मिली जानकारी को उपयोगी बताया और भविष्य में भी मार्गदर्शन एवं सहयोग मिलने की अपेक्षा जताई।
किसानों और युवाओं के लिए नए अवसर
कार्यशाला में प्रगतिशील किसानों, किसान उत्पादक संगठनों के सदस्यों, कृषि आधारित उद्योगों से जुड़े उद्यमियों, स्टार्टअप शुरू करने के इच्छुक युवाओं और जैविक खेती के विद्यार्थियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. मधुसूदन चौबे ने किया। आयोजन में महाविद्यालय के करियर सेल के सदस्यों ने सहयोग दिया। अंत में कार्यक्रम समन्वयक अरविन्द चौहान ने सभी प्रतिभागियों और अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

