इंदौर में सोयाबीन कटाई के बाद नरवाई न जलाने की अपील। जानें नरवाई जलाने पर जुर्माना, मिट्टी को नुकसान और फसल अवशेष प्रबंधन के तरीके।
इंदौर जिले में सोयाबीन की कटाई शुरू होने के साथ ही जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने किसानों को फसल अवशेष यानी नरवाई नहीं जलाने की सलाह दी है। अधिकारियों के अनुसार नरवाई जलाने से न केवल वायु प्रदूषण बढ़ता है, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता, उर्वरा शक्ति और जलधारण क्षमता पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है।
किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग और कृषि अभियांत्रिकी विभाग की ओर से किसानों को फसल अवशेषों के वैज्ञानिक प्रबंधन के प्रति जागरूक किया जा रहा है। जिले की ग्राम पंचायतों में कृषि, राजस्व और पंचायत विभाग के मैदानी कर्मचारी किसानों को नरवाई जलाने से होने वाले नुकसान और इसके वैकल्पिक उपयोग की जानकारी देंगे।
नरवाई जलाने पर देना पड़ सकता है आर्थिक दंड
मध्य प्रदेश में फसल अवशेष जलाने की स्थिति में पर्यावरण क्षतिपूर्ति राशि का प्रावधान है। भूमि के क्षेत्रफल के आधार पर किसानों पर अलग-अलग आर्थिक दंड लगाया जा सकता है।
- 2 एकड़ तक भूमि: प्रति घटना 2,500 रुपये
- 2 से 5 एकड़ भूमि: प्रति घटना 5,000 रुपये
- 5 एकड़ से अधिक भूमि: प्रति घटना 15,000 रुपये
नरवाई में आग लगाने के मामले में पुलिस कार्रवाई भी की जा सकती है। इसलिए किसानों को फसल अवशेषों को जलाने के बजाय उनका उपयोग करने की सलाह दी गई है।
खेत में नरवाई जलाने से मिट्टी को होता है नुकसान
फसल अवशेषों को आग लगाने से मिट्टी में मौजूद उपयोगी सूक्ष्मजीव और केंचुए प्रभावित होते हैं। ये जीव मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लगातार नरवाई जलाने से जमीन की संरचना खराब होने के साथ उसकी पानी रोकने की क्षमता भी घट सकती है।
इसके अलावा आग खेत के आसपास खड़ी फसलों तक पहुंच सकती है, जिससे फसल, संपत्ति और जन-धन को नुकसान होने की आशंका रहती है। नरवाई जलाने से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण को बढ़ाता है और पर्यावरण पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है।
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स्ट्रॉ रीपर और मल्चर से करें फसल अवशेषों का प्रबंधन
कृषि विभाग ने किसानों को नरवाई के बेहतर प्रबंधन के लिए कृषि यंत्रों का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। किसान स्ट्रॉ रीपर की मदद से फसल अवशेषों से भूसा तैयार कर सकते हैं।
इसी तरह वेलर मशीन से नरवाई की गांठें तैयार की जा सकती हैं, जिनका इस्तेमाल कागज उद्योग, बायोमास और डेयरी क्षेत्र में किया जा सकता है। वहीं मल्चर मशीन की सहायता से फसल अवशेषों को छोटे टुकड़ों में काटकर खेत में जैविक पदार्थ के रूप में मिलाया जा सकता है।
खेत में फसल अवशेष मिलाने से बढ़ेगी मिट्टी की गुणवत्ता
किसान कम्बाइन हार्वेस्टर में स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम का उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा कल्टीवेटर, रोटावेटर और डिस्क हैरो जैसे कृषि यंत्रों से नरवाई को मिट्टी में मिलाने का विकल्प भी अपनाया जा सकता है।
फसल अवशेषों को खेत में मिलाने से मिट्टी में जैविक पदार्थ और पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलती है। इससे मिट्टी की संरचना और उर्वरा शक्ति को बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।
नरवाई से किसान कमा सकते हैं अतिरिक्त आय
फसल अवशेषों को बेकार समझकर जलाने के बजाय किसान उनका उपयोग कई तरीकों से कर सकते हैं। नरवाई से पशुओं के लिए भूसा तैयार किया जा सकता है। इसके अलावा इसे जैविक खाद बनाने या अन्य उपयोगी कार्यों में इस्तेमाल किया जा सकता है।
प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे सोयाबीन की कटाई के बाद खेतों में नरवाई को आग न लगाएं। वैज्ञानिक तरीके से फसल अवशेषों का प्रबंधन करने से मिट्टी और पर्यावरण की सुरक्षा के साथ किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर भी मिल सकते हैं।
किसानों से यह भी आग्रह किया गया है कि वे खुद नरवाई न जलाएं और आसपास के अन्य किसानों को भी इसके नुकसान तथा वैज्ञानिक प्रबंधन के तरीकों के बारे में जागरूक करें।

