भारत और घाना ने कृषि अनुसंधान, वैज्ञानिक शिक्षा और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने के लिए दो MoU पर हस्ताक्षर किए। जानें ICAR समझौते की पूरी जानकारी।
भारत और घाना ने कृषि अनुसंधान, वैज्ञानिक शिक्षा और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इन समझौतों के जरिए दोनों देशों के संस्थानों के बीच शोध, शैक्षणिक गतिविधियों और क्षमता निर्माण को प्रोत्साहित किया जाएगा। इनमें एक समझौता भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और घाना के CSIR-क्रॉप रिसर्च इंस्टीट्यूट के बीच हुआ है, जो कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देगा।
भारत-घाना के बीच दो महत्वपूर्ण MoU पर हस्ताक्षर
इन समझौतों का आदान-प्रदान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और घाना के विदेश मंत्री सैम ओकुडजेटो अबलाकवा की मौजूदगी में किया गया। दोनों देशों का उद्देश्य वैज्ञानिक सहयोग को मजबूत करना और अनुसंधान से जुड़े संस्थानों के बीच साझेदारी को आगे बढ़ाना है।
समझौतों में शिक्षा, वैज्ञानिक शोध, कौशल विकास और कृषि क्षेत्र में ज्ञान साझा करने जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। इससे भारत और घाना के बीच संस्थागत सहयोग बढ़ने की उम्मीद है।
ICAR और घाना का क्रॉप रिसर्च इंस्टीट्यूट करेंगे सहयोग
भारत और घाना के बीच हुआ दूसरा समझौता कृषि क्षेत्र के लिए विशेष महत्व रखता है। यह समझौता नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और घाना के CSIR-क्रॉप रिसर्च इंस्टीट्यूट के बीच हुआ है।
इस साझेदारी का उद्देश्य कृषि अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र में दोनों संस्थानों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करना है। इससे वैज्ञानिक ज्ञान के आदान-प्रदान और कृषि से संबंधित शोध गतिविधियों को बढ़ावा देने का अवसर मिलेगा।
हालांकि, समझौते के तहत शुरू होने वाली विशिष्ट परियोजनाओं और उनके क्रियान्वयन से जुड़ी विस्तृत जानकारी अलग से सामने आने पर ही स्पष्ट होगी।
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भारतीय प्राणी सर्वेक्षण और घाना विश्वविद्यालय भी साथ आए
पहला समझौता भारत के भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (Zoological Survey of India) और घाना विश्वविद्यालय के बीच हुआ है। इसके अंतर्गत शैक्षणिक कार्यक्रमों, वैज्ञानिक अनुसंधान और क्षमता निर्माण से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग किया जाएगा।
इस साझेदारी से दोनों संस्थानों को अपने शोध अनुभव और विशेषज्ञता साझा करने का अवसर मिलेगा। साथ ही, वैज्ञानिक शिक्षा और अनुसंधान से जुड़ी गतिविधियों को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
दक्षिण-दक्षिण सहयोग को मिलेगी मजबूती: एस. जयशंकर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इन समझौतों को भारत और घाना के बीच दक्षिण-दक्षिण सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। दक्षिण-दक्षिण सहयोग का आशय विकासशील देशों के बीच ज्ञान, तकनीक, अनुभव और संसाधनों को साझा करने से है। दोनों देशों के बीच हुई यह पहल कृषि और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में साझेदारी के नए अवसर तैयार कर सकती है।
व्यापार, निवेश और तकनीक पर भी हुई चर्चा
समझौतों के अलावा एस. जयशंकर और घाना के विदेश मंत्री ने भारत-घाना व्यापक साझेदारी के विभिन्न पहलुओं पर भी विचार-विमर्श किया। चर्चा में व्यापार, निवेश, विकास सहयोग, फार्मास्यूटिकल्स, रक्षा, तकनीक और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे विषय शामिल रहे।
दोनों पक्षों ने बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ अफ्रीकी संघ और पश्चिम अफ्रीकी राज्यों के आर्थिक समुदाय (ECOWAS) के साथ जुड़ाव को मजबूत करने पर भी चर्चा की।
घाना के राष्ट्रपति से मिले एस. जयशंकर
घाना यात्रा के दौरान भारतीय विदेश मंत्री ने राष्ट्रपति जॉन द्रवामानी महामा से भी मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं दीं।
बैठक में भारत और घाना के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने तथा व्यापक साझेदारी को आगे बढ़ाने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
तीन अफ्रीकी देशों की यात्रा पर हैं भारतीय विदेश मंत्री
एस. जयशंकर 6 से 10 अक्टूबर तक घाना, कोट द’आइवोर और इथियोपिया की यात्रा पर हैं। इस दौरे का उद्देश्य अफ्रीकी देशों के साथ भारत के संबंधों को और मजबूत करना है।
यात्रा के दौरान व्यापार, आर्थिक साझेदारी, विकास सहयोग, क्षमता निर्माण और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की जा रही है। इसके अलावा, क्षेत्रीय और वैश्विक महत्व के विषयों पर भी विचार-विमर्श किया जा रहा है।
भारत और घाना के बीच हुए ये दोनों समझौते कृषि अनुसंधान, वैज्ञानिक शिक्षा और संस्थागत सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम कदम हैं। आने वाले समय में इनके प्रभाव इस बात पर निर्भर करेंगे कि दोनों देशों के संस्थान इन समझौतों को ठोस शोध कार्यक्रमों और व्यावहारिक पहलों में किस तरह बदलते हैं।

