अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार की विदेश नीति, भारत की संप्रभुता और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए।
आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार की विदेश नीति और राष्ट्रीय हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि देश की संप्रभुता, सम्मान और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा किसी भी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
विदेशी संबंधों को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल
अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संदर्भ में टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने हितों और नागरिकों की सुरक्षा को मजबूती से रखना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपेक्षित दृढ़ता नहीं दिखा रही है।
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भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर जताई चिंता
AAP प्रमुख ने उन घटनाओं का उल्लेख किया जिनमें भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे हैं। उन्होंने कहा कि जब भी भारतीय नागरिकों के जीवन और हित प्रभावित होते हैं, तब सरकार को स्पष्ट और मजबूत रुख अपनाना चाहिए।
भारत की संप्रभुता और सम्मान को प्राथमिकता देने की मांग
केजरीवाल ने कहा कि भारत एक मजबूत लोकतंत्र और वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रहा है। ऐसे में देश की संप्रभुता, राष्ट्रीय गौरव और नागरिकों के हितों की रक्षा हर परिस्थिति में सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में भारत की आवाज स्पष्ट और प्रभावशाली होनी चाहिए।
PM Modi is saying ‘thank you’ to Trump.
Thank you for exactly what? For attacking ships with Indians on board and killing Indian nationals? The situation has become hopelessly embarrassing for our country now.
Modi ji has completely surrendered India’s sovereignty, pride and… https://t.co/EXP1FKmR7D pic.twitter.com/1Qbk5SVQlE
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) June 11, 2026
मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता पर दिया जोर
AAP नेता ने कहा कि देश को ऐसा नेतृत्व चाहिए जो राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए मजबूती से खड़ा हो सके। उन्होंने दावा किया कि भारत के नागरिक अपेक्षा करते हैं कि उनकी सुरक्षा और सम्मान से जुड़े मुद्दों पर सरकार निर्णायक और प्रभावी कदम उठाए।
राजनीतिक बहस के केंद्र में विदेश नीति
केजरीवाल के इस बयान के बाद विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विभिन्न राजनीतिक दल इन मुद्दों पर अपनी-अपनी राय रख रहे हैं और केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं।

