राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान इंदौर में ‘सोया आद्या’ काउंटर शुरू हुआ। जानें टोफू, सोया बिस्कुट, नमकीन और सोया आधारित उत्पादों की खासियत।
सोयाबीन के खाद्य उपयोग को बढ़ावा देने और लोगों को पौष्टिक आहार के नए विकल्प उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर ने एक नई पहल की है। संस्थान के खंडवा रोड स्थित परिसर के मुख्य द्वार के पास ‘सोया आद्या’ नाम से सोया खाद्य उत्पाद काउंटर शुरू किया गया है। यहां उपभोक्ताओं को सोयाबीन से तैयार विभिन्न खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने की पहल की गई है।
संस्थान के निदेशक डॉ. के.एच. सिंह ने वैज्ञानिकों और कर्मचारियों की मौजूदगी में इस काउंटर का उद्घाटन किया। इस पहल का उद्देश्य सोयाबीन के उपयोग को केवल कृषि और व्यावसायिक उत्पादन तक सीमित न रखते हुए इसे लोगों के दैनिक भोजन का हिस्सा बनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।
टोफू से लेकर सोया बिस्कुट तक मिलेंगे कई उत्पाद
‘सोया आद्या’ काउंटर पर सोयाबीन से तैयार कई तरह के खाद्य पदार्थ रखे गए हैं। इनमें सोया पनीर यानी टोफू, सोयाबीन कुकीज, सोया आटे से बनी मठरी, नमकीन और बिस्कुट शामिल हैं। इसके अलावा, सोयाबीन प्रसंस्करण के दौरान प्राप्त होने वाले ओकारा यानी सोया पल्प से तैयार खाद्य उत्पाद भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
इन उत्पादों के माध्यम से उपभोक्ताओं को सोयाबीन से बनने वाले अलग-अलग खाद्य विकल्पों की जानकारी मिलेगी। संस्थान का प्रयास है कि लोग सोयाबीन का उपयोग पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ नए खाद्य पदार्थों के रूप में भी करें।
प्रोटीन और पोषक तत्वों से भरपूर है सोयाबीन
सोयाबीन प्रोटीन का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। इसमें आयरन, कैल्शियम और विभिन्न विटामिन सहित कई पोषक तत्व भी पाए जाते हैं। इसी वजह से सोयाबीन आधारित खाद्य पदार्थ संतुलित आहार में उपयोगी भूमिका निभा सकते हैं।
संस्थान की इस पहल का एक प्रमुख उद्देश्य सोयाबीन के पोषण संबंधी महत्व के बारे में लोगों को जागरूक करना और इसके खाद्य उपयोगों को लोकप्रिय बनाना है। खाद्य उत्पादों की विविधता बढ़ने से उपभोक्ताओं को अपने भोजन में सोयाबीन शामिल करने के अधिक विकल्प मिल सकते हैं।
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सोयाबीन को नकदी फसल के साथ खाद्य पदार्थ के रूप में भी पहचान दिलाने पर जोर
काउंटर के उद्घाटन के अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. के.एच. सिंह ने कहा कि सोयाबीन को अब तक मुख्य रूप से नकदी फसल के तौर पर देखा जाता रहा है, जबकि खाद्य और पोषण सुरक्षा के क्षेत्र में भी इसकी व्यापक संभावनाएं हैं।
उन्होंने सोयाबीन से तैयार खाद्य पदार्थों के उत्पादन और उनकी बाजार तक पहुंच बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके अनुसार, सोया आधारित उत्पादों को प्रोत्साहन मिलने से घरेलू बाजार में सोयाबीन की मांग बढ़ाने के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
कृषि व्यवसाय इन्क्यूबेशन केंद्र कर रहा नए उत्पादों पर काम
राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान का कृषि व्यवसाय इन्क्यूबेशन केंद्र सोयाबीन से जुड़े नए खाद्य उत्पाद विकसित करने और उनकी निर्माण प्रक्रियाओं को मानकीकृत करने की दिशा में काम कर रहा है। इस कार्य में खाद्य प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ डॉ. नेहा पांडे का महत्वपूर्ण योगदान बताया गया है।
इस पहल के जरिए सोयाबीन आधारित उत्पादों की गुणवत्ता, निर्माण विधियों और व्यावसायिक उपयोग को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है, ताकि इन उत्पादों को उपभोक्ताओं तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सके।
युवाओं को सोया खाद्य प्रसंस्करण का प्रशिक्षण
इन्क्यूबेशन केंद्र के प्रभारी डॉ. एम.पी. शर्मा ने बताया कि केंद्र के माध्यम से नए उद्यमियों और युवाओं को खाद्य प्रसंस्करण तथा सोयाबीन आधारित उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
आने वाले समय में प्रशिक्षित उद्यमियों द्वारा विकसित खाद्य उत्पादों को भी ‘सोया आद्या’ काउंटर के जरिए उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। इससे युवाओं के लिए स्वरोजगार और उद्यमिता के नए अवसर विकसित हो सकते हैं। साथ ही, सोयाबीन के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
खेत से रसोई तक सोयाबीन पहुंचाने की पहल
‘सोया आद्या’ काउंटर की शुरुआत सोयाबीन के खाद्य उपयोग को विस्तार देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके जरिए अनुसंधान संस्थान में विकसित उत्पादों को आम लोगों तक पहुंचाने और सोया आधारित खाद्य पदार्थों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
यह पहल पोषण जागरूकता के साथ-साथ खाद्य प्रसंस्करण, कृषि आधारित उद्यमिता और सोयाबीन के बेहतर व्यावसायिक उपयोग को प्रोत्साहित करने में मदद कर सकती है।

