मध्य प्रदेश सरकार ने पैराक्वेट डाइक्लोराइड की बिक्री रोकने, स्टॉक वापस लेने और नष्ट करने के निर्देश दिए। जानें मूंग की फसल और किसानों पर इसका असर।
मध्य प्रदेश सरकार ने पैराक्वेट डाइक्लोराइड की बिक्री और भंडारण पर रोक को प्रभावी बनाने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। राज्य के कृषि विभाग ने संबंधित कीटनाशक कंपनियों को इस रसायन की बिक्री तत्काल बंद करने, उपलब्ध स्टॉक वापस लेने और निर्धारित नियमों के अनुसार उसे नष्ट करने के निर्देश दिए हैं। यह कार्रवाई केंद्र सरकार के उस आदेश के बाद की गई है, जिसके तहत पैराक्वेट डाइक्लोराइड के मौजूदा पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द कर दिए गए हैं और नए पंजीकरण पर रोक लगाई गई है।
यह मामला खास तौर पर मूंग की फसल को कटाई से पहले जल्दी सुखाने के लिए इस रसायन के कथित इस्तेमाल से जुड़ा है। राज्य सरकार का उद्देश्य केंद्रीय आदेश का पालन सुनिश्चित करना और किसानों के बीच इस रसायन के अनधिकृत उपयोग को रोकना है।
कीटनाशक कंपनियों को बिक्री रोकने के निर्देश
जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार ने कीटनाशक अधिनियम, 1968 के तहत 22 सितंबर 2026 को जारी आदेश के माध्यम से पैराक्वेट डाइक्लोराइड के मौजूदा पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द करने और नए पंजीकरण पर रोक लगाने का निर्णय लिया था। संबंधित आदेश राजपत्र में प्रकाशित होने के बाद प्रभावी होता है।
इसके बाद मध्य प्रदेश के किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग ने राज्य स्तर पर कार्रवाई करते हुए संबंधित कंपनियों को निर्देश जारी किए। कंपनियों से अपने पंजीकरण प्रमाणपत्र केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड एवं पंजीकरण समिति (CIB&RC) को वापस करने के लिए कहा गया है।
निर्देशों में रसायन की बिक्री और भंडारण रोकने के साथ मौजूदा स्टॉक वापस लेने तथा उसका नियमानुसार निपटान करने की व्यवस्था भी शामिल है। इस कदम का उद्देश्य प्रतिबंध से जुड़े नियमों को राज्य में प्रभावी ढंग से लागू करना है।
मूंग की फसल जल्दी सुखाने में इस्तेमाल को लेकर चिंता
पैराक्वेट डाइक्लोराइड का मुद्दा उस समय चर्चा में आया, जब ऐसी खबरें सामने आईं कि कुछ किसान मूंग की कटाई से पहले फसल को तेजी से सुखाने के लिए इस रसायन का छिड़काव कर रहे थे। रिपोर्टों के मुताबिक, इससे फसल को 24 से 72 घंटे के भीतर सुखाने की कोशिश की जा रही थी, ताकि कटाई और दौनी की प्रक्रिया जल्दी पूरी हो सके।
हालांकि, मूंग की फसल को इस तरह सुखाने के लिए पैराक्वेट डाइक्लोराइड के इस्तेमाल को स्वीकृत उपयोग नहीं बताया गया है। ऐसे में कृषि विभाग की ओर से किसानों को निर्धारित नियमों का पालन करने और केवल स्वीकृत कृषि उत्पादों एवं तरीकों का उपयोग करने की सलाह दी गई है।
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स्वास्थ्य जोखिमों को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?
पैराक्वेट डाइक्लोराइड एक शाकनाशी रसायन है, जिसका उपयोग खरपतवार नियंत्रण के लिए किया जाता रहा है। इसके संपर्क में आने से गंभीर विषाक्तता हो सकती है। अधिक मात्रा में संपर्क या इसे निगल लेना विशेष रूप से खतरनाक हो सकता है और इससे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंच सकता है।
इस रसायन के संभावित स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर चिंता के बीच इसके अनधिकृत इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग भी उठती रही है। पैराक्वेट विषाक्तता के गंभीर मामलों में उपचार बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकता है और इसका कोई स्थापित विशिष्ट प्रतिविष उपलब्ध नहीं है।
हालांकि, दूषित मूंग के सेवन से कैंसर होने जैसे विशिष्ट दावों की पुष्टि के लिए विश्वसनीय वैज्ञानिक साक्ष्य और संबंधित खाद्य सुरक्षा जांच जरूरी हैं। इसलिए खाद्य पदार्थों में अवशेषों से जुड़े जोखिमों का आकलन प्रमाणित परीक्षणों के आधार पर किया जाना चाहिए।
मूंग की सरकारी खरीद को लेकर पहले भी उठ चुका है विवाद
मध्य प्रदेश में पैराक्वेट डाइक्लोराइड का मामला मूंग उत्पादक किसानों और सरकार के बीच पहले से चले आ रहे विवाद से भी जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पिछले गर्मी के मौसम में राज्य सरकार ने फसल को सुखाने के इस तरीके से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों का हवाला देते हुए ग्रीष्मकालीन मूंग की खरीद को लेकर आपत्ति जताई थी।
इस मुद्दे पर किसानों ने विरोध प्रदर्शन भी किए थे। नर्मदापुरम से भोपाल तक निकाले गए मार्च के दौरान किसानों ने अपनी मांगें उठाई थीं। इस विवाद ने फसल सुखाने के तरीकों, कृषि रसायनों के इस्तेमाल और किसानों की उपज की सरकारी खरीद जैसे विषयों को चर्चा में ला दिया।
अब राज्य सरकार की ताजा कार्रवाई का उद्देश्य केंद्रीय आदेश के अनुपालन को सुनिश्चित करना और संबंधित रसायन की आपूर्ति पर नियंत्रण स्थापित करना है।
किसानों को अपनाने होंगे स्वीकृत कृषि विकल्प
मध्य प्रदेश में मूंग और अन्य दलहनी फसलों की खेती बड़े पैमाने पर होती है। ऐसे में फसल कटाई और सुखाने की प्रक्रिया किसानों के लिए महत्वपूर्ण है। कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे पैराक्वेट डाइक्लोराइड पर निर्भर रहने के बजाय विभाग द्वारा अनुशंसित और स्वीकृत तरीकों का इस्तेमाल करें।
किसानों को फसल सुखाने, खरपतवार नियंत्रण और कटाई के लिए अपनाई जाने वाली तकनीकों के संबंध में कृषि विशेषज्ञों से मार्गदर्शन लेने की जरूरत है। किसी भी रसायन का इस्तेमाल करने से पहले उसके पंजीकरण, स्वीकृत उपयोग और लेबल पर दिए गए निर्देशों की जांच करना भी आवश्यक है।
प्रतिबंध लागू करने की दिशा में मध्य प्रदेश सरकार का कदम
पैराक्वेट डाइक्लोराइड के पंजीकरण रद्द होने के बाद मध्य प्रदेश सरकार की कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य राज्य में इसकी बिक्री, भंडारण और अनधिकृत उपयोग को रोकना है। कंपनियों को स्टॉक वापस लेने और निर्धारित नियमों के अनुसार नष्ट करने के निर्देश इसी प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
इस फैसले से किसानों के बीच सुरक्षित कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने और कृषि रसायनों के जिम्मेदार इस्तेमाल पर जोर देने की उम्मीद है। हालांकि, आदेश के प्रभावी क्रियान्वयन और वैकल्पिक तरीकों की उपलब्धता पर आगे की स्थिति महत्वपूर्ण रहेगी।

