शिवराज सिंह चौहान ने सांची में महिला किसानों को पहचान दिलाने और रायसेन-विदिशा से गरीबी मुक्त गांव अभियान शुरू करने की घोषणा की।
मध्य प्रदेश के सांची में आयोजित महिला किसान सम्मेलन में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महिला किसानों के सशक्तिकरण और ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि खेती-किसानी में महिलाओं के वास्तविक योगदान को पहचान दिलाने के लिए प्रयास किए जाएंगे। इसके साथ ही रायसेन और विदिशा जिलों से गरीबी मुक्त गांव अभियान का पायलट चरण शुरू करने की घोषणा की गई।
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य गांवों के प्रत्येक परिवार को कम से कम एक स्थायी आजीविका के साधन से जोड़ना है। अभियान में कृषि, पशुपालन, मछली पालन, खाद्य प्रसंस्करण और छोटे व्यवसायों को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
खेती में योगदान के आधार पर महिला किसानों को मिलेगी पहचान
महिला किसान सम्मेलन को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसान की पहचान केवल जमीन के मालिकाना हक से नहीं होनी चाहिए, बल्कि खेती में उसके वास्तविक योगदान को भी महत्व दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि खेतों में बुवाई, फसल उत्पादन, कटाई, पशुपालन और अन्य कृषि गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली महिलाओं को भी महिला किसान के रूप में पहचान मिलनी चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने फल-सब्जियों की खेती, औषधीय पौधों के उत्पादन, मछली पालन और मुर्गी पालन जैसे क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी का उल्लेख करते हुए उनके आर्थिक सशक्तिकरण पर जोर दिया।
महिला किसानों को औपचारिक पहचान मिलने से उन्हें कृषि से जुड़ी योजनाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और वित्तीय सुविधाओं तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसके लिए लागू होने वाली व्यवस्था और पात्रता संबंधी नियमों का औपचारिक विवरण सामने आना बाकी है।
रायसेन और विदिशा से शुरू होगा गरीबी मुक्त गांव अभियान
सम्मेलन की प्रमुख घोषणा रायसेन और विदिशा जिलों में गरीबी मुक्त गांव अभियान के पायलट चरण को लेकर रही। इस पहल के तहत गांवों के ऐसे परिवारों को आजीविका के अवसरों से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है, जिनके पास आय का स्थायी साधन नहीं है।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि गरीबी से स्थायी रूप से बाहर निकलने के लिए प्रत्येक परिवार के पास कमाई का कोई न कोई साधन होना आवश्यक है।
इस अभियान के अंतर्गत ग्रामीण परिवारों को निम्न क्षेत्रों में आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा:
- खेती और कृषि आधारित गतिविधियां।
- पशुपालन और बकरी पालन।
- मछली पालन एवं अन्य संबद्ध व्यवसाय।
- कृषि उत्पादों का प्रसंस्करण।
- छोटे और स्थानीय स्तर के स्वरोजगार।
महिला किसानों को इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जाएगा, ताकि वे कृषि और ग्रामीण उद्यमों के माध्यम से परिवार की आय बढ़ाने में योगदान दे सकें।
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दाल मिल और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा
केंद्रीय मंत्री ने महिलाओं को केवल कृषि उत्पादन तक सीमित न रहने और कृषि उत्पादों से जुड़े छोटे उद्योग स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने दाल मिल, तेल मिल और टमाटर से केचप बनाने जैसे प्रसंस्करण कार्यों की संभावनाओं का उल्लेख किया।
इस दिशा में महिलाओं को प्रशिक्षण, मशीनों, तकनीकी मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने पर काम करने की बात कही गई।
कम या बिना गारंटी वाले ऋण की सुविधा विकसित करने पर भी जोर दिया गया, जिससे ग्रामीण महिलाएं छोटे उद्यम शुरू कर सकें और अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त करने के अवसर तलाश सकें।
खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा मिलने से कृषि उत्पादों की उपयोगिता बढ़ाने, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद मिल सकती है।
महिला किसान समूहों और FPO को प्रोत्साहन
शिवराज सिंह चौहान ने महिला किसान संगठनों और किसान उत्पादक संगठनों यानी FPO को प्रोत्साहित करने की बात भी कही। उन्होंने सरकारी खरीद व्यवस्था में ऐसे संगठनों को प्राथमिकता देने के प्रयासों का उल्लेख किया।
किसान उत्पादक संगठनों के माध्यम से महिलाएं सामूहिक रूप से कृषि सामग्री खरीदने, अपनी उपज का विपणन करने और बाजारों तक सीधी पहुंच बनाने में सक्षम हो सकती हैं।
इस तरह के प्रयासों से महिला किसानों की सामूहिक भागीदारी बढ़ाने और उन्हें कृषि व्यवसाय से जोड़ने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
पौधरोपण कर महिलाओं को पर्यावरण संरक्षण का संदेश
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने महिला किसानों के साथ पौधरोपण भी किया। उन्होंने महिलाओं से पौधरोपण अभियान में भाग लेने और इसके तहत अपना नाम दर्ज कराने का आग्रह किया।
अपने संबोधन में उन्होंने महिलाओं के सम्मान, बेहतर जीवन और आर्थिक आत्मनिर्भरता की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य ऐसे गांव विकसित करना है, जहां प्रत्येक परिवार के पास आजीविका का साधन उपलब्ध हो।
उन्होंने महिलाओं से खेती के नए तरीकों और वैकल्पिक रोजगार गतिविधियों को अपनाने की अपील करते हुए सरकारी सहयोग का भरोसा दिलाया।
महिला किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने की उम्मीद
खेती-किसानी में महिलाओं की भागीदारी लंबे समय से महत्वपूर्ण रही है। बुवाई, निराई, कटाई, फसल भंडारण और पशुपालन जैसे कार्यों में महिलाएं सक्रिय भूमिका निभाती हैं। इसके बावजूद, जमीन के दस्तावेजों में नाम दर्ज नहीं होने सहित विभिन्न कारणों से कुछ महिलाओं को किसान-केंद्रित योजनाओं और संस्थागत ऋण तक पहुंच बनाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, खेती में वास्तविक योगदान को मान्यता देने वाली व्यवस्था विकसित होने पर महिला किसानों की किसान क्रेडिट कार्ड, बीमा, कृषि प्रशिक्षण और वित्तीय सेवाओं तक पहुंच बेहतर हो सकती है। हालांकि, इन लाभों की उपलब्धता संबंधित योजनाओं के नियमों और पात्रता पर निर्भर करेगी।
पायलट अभियान की रूपरेखा का इंतजार
रायसेन और विदिशा में प्रस्तावित गरीबी मुक्त गांव अभियान को लेकर अभी योजना का विस्तृत आधिकारिक स्वरूप, बजट और क्रियान्वयन की समय-सीमा सार्वजनिक नहीं की गई है।
शुरुआती चरण में चयनित गांवों के परिवारों की आजीविका संबंधी स्थिति का आकलन किए जाने की बात कही गई है, ताकि जरूरतमंद परिवारों को उपयुक्त योजनाओं और रोजगार के अवसरों से जोड़ा जा सके।
यदि यह पहल प्रभावी साबित होती है, तो भविष्य में इसके विस्तार की संभावनाओं पर विचार किया जा सकता है। फिलहाल, महिला किसानों को पहचान दिलाने और ग्रामीण परिवारों के लिए स्थायी आय के अवसर विकसित करने की घोषणा ने कृषि एवं ग्रामीण विकास के क्षेत्र में नई उम्मीदें जगाई हैं।

