धान की फसल: धान में शीथ ब्लाइट, ब्लास्ट और भूरा धब्बा रोग का खतरा बढ़ा। जानें ICAR-NRRI की सलाह, जलभराव से बचाव और रोग प्रबंधन के जरूरी उपाय।
लगातार बारिश, बादल छाए रहने और खेतों में अधिक नमी के कारण धान की फसल में कई रोगों का खतरा बढ़ सकता है। भाकृअनुप-केंद्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (ICAR-NRRI), कटक की कृषि सलाह में किसानों को शीथ ब्लाइट, पत्ती झुलसा (ब्लास्ट), भूरा धब्बा, झूठा कंड और जीवाणु जनित रोगों के प्रति सतर्क रहने को कहा गया है।
संस्थान ने विशेष रूप से उन खेतों पर ध्यान देने की सलाह दी है, जहां भारी बारिश के कारण पानी जमा हो गया है। ऐसे खेतों से अतिरिक्त पानी निकालना प्राथमिकता होनी चाहिए। साथ ही, फसल की स्थिति और रोग के लक्षणों के आधार पर उचित प्रबंधन अपनाने की सलाह दी गई है।
धान में शीथ ब्लाइट और ब्लास्ट रोग से कैसे बचाएं फसल?
लगातार नमी और अनुकूल मौसम की स्थिति में धान की फसल में शीथ ब्लाइट और ब्लास्ट रोग फैलने की आशंका बढ़ सकती है। इसलिए किसानों को खेतों का नियमित निरीक्षण करना चाहिए और शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेनी चाहिए।
संस्थान की सलाह के अनुसार, शीथ ब्लाइट के लक्षण दिखाई देने पर निम्नलिखित फफूंदनाशकों के उपयोग का उल्लेख किया गया है:
- टेबुकोनाजोल 50% + ट्राईफ्लॉक्सीस्ट्रोबिन 25% WG: 0.4 ग्राम प्रति लीटर पानी।
- प्रोपिकोनाजोल 75%: 1 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी।
- हेक्साकोनाजोल 50%: 2 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी।
- वैलिडामाइसिन 3L: 2 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी।
ब्लास्ट रोग के लिए टेबुकोनाजोल 50% + ट्राईफ्लॉक्सीस्ट्रोबिन 25% WG की 0.4 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी, एडिफेनफॉस 50 EC की 2 मिलीलीटर मात्रा प्रति लीटर पानी या ट्राइसाइक्लाजोल 75 WP की 0.6 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।
जरूरत पड़ने पर छिड़काव दोहराने का निर्णय फसल की स्थिति और उत्पाद के लेबल पर दिए निर्देशों के अनुसार लेना चाहिए।
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धान में भूरा धब्बा रोग दिखने पर क्या करें?
सीधी बुवाई वाले धान में भूरा धब्बा रोग के लक्षण दिखाई देने पर भी समय रहते उचित कदम उठाना जरूरी है। संस्थान की सलाह में निम्नलिखित फफूंदनाशकों का उल्लेख किया गया है:
- प्रोपिकोनाजोल 25 EC: 200 मिलीलीटर प्रति एकड़।
- मैंकोजेब 75 WP: 400 ग्राम प्रति एकड़।
- कार्बेन्डाजिम 64% + मैंकोजेब 8% मिश्रण: 300 ग्राम प्रति एकड़।
बताई गई मात्रा को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करने की सलाह दी गई है। दवा चुनने से पहले रोग की सही पहचान और उत्पाद के वर्तमान लेबल पर दर्ज अनुमोदित उपयोग की पुष्टि करना आवश्यक है।
बालियां निकलने पर झूठे कंड रोग से रहें सतर्क
धान में बालियां निकलने की अवस्था में झूठा कंड यानी फॉल्स स्मट रोग का खतरा भी हो सकता है। इस रोग के लक्षण दिखाई देने पर संस्थान की सलाह में कॉपर हाइड्रॉक्साइड 77% की 400 ग्राम मात्रा प्रति एकड़ या टेबुकोनाजोल 25% की 400 ग्राम मात्रा प्रति एकड़ के इस्तेमाल का उल्लेख है।
जरूरत के अनुसार सात दिन बाद दोबारा छिड़काव करने की सलाह भी दी गई है। हालांकि, दोबारा छिड़काव से पहले रोग की पुष्टि, फसल की अवस्था और संबंधित उत्पाद के लेबल निर्देशों का पालन करना जरूरी है।
जीवाणु झुलसा और पत्ती धारी रोग पर भी रखें नजर
धान में जीवाणु झुलसा और जीवाणु पत्ती धारी रोग की आशंका होने पर खेतों की नियमित निगरानी करनी चाहिए। संस्थान की सलाह में प्लांटोमाइसिन और कॉपर ऑक्सीक्लोराइड के मिश्रण का उल्लेख किया गया है।
सामान्य स्थिति के लिए दी गई सलाह में दोनों उत्पादों की एक-एक ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर 200 लीटर घोल प्रति एकड़ इस्तेमाल करने की बात कही गई है।
हालांकि, जीवाणु रोगों के नियंत्रण में दवा की प्रभावशीलता और अनुमोदित उपयोग उत्पाद तथा क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकते हैं। इसलिए इस मिश्रण का इस्तेमाल करने से पहले स्थानीय कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र से इसकी पुष्टि अवश्य करें।
जलभराव वाले धान के खेतों के लिए विशेष सलाह
भारी बारिश के बाद खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहना फसल की स्थिति और रोग प्रबंधन को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में सबसे पहले जल निकासी की व्यवस्था करने पर जोर दिया गया है।
जलभराव वाले खेतों के लिए संस्थान की सलाह में जीवाणु रोगों के प्रबंधन हेतु 200 ग्राम प्लांटोमाइसिन और 200 ग्राम कॉपर ऑक्सीक्लोराइड को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करने का उल्लेख है। कम मात्रा में घोल तैयार करने के लिए 10 लीटर पानी में 1 ग्राम प्लांटोमाइसिन और 20 ग्राम कॉपर ऑक्सीक्लोराइड मिलाने की सलाह भी दी गई है।
ब्लास्ट रोग के प्रबंधन के लिए जलभराव की स्थिति में निम्न विकल्प बताए गए हैं:
- टेबुकोनाजोल 50% + ट्राईफ्लॉक्सीस्ट्रोबिन 25% WG: 4 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी।
- आइसोप्रोथायोलेन 40 EC: 15 मिलीलीटर प्रति 10 लीटर पानी।
- कार्बेन्डाजिम 50 WP: 400 ग्राम प्रति एकड़।
जरूरत के अनुसार सात से दस दिन के अंतराल पर दोबारा छिड़काव करने का उल्लेख भी किया गया है। हालांकि, इन मात्राओं और मिश्रणों को खेत में अपनाने से पहले वर्तमान आधिकारिक सलाह और उत्पाद के लेबल से मिलान करना जरूरी है।
बिना विशेषज्ञ की सलाह के न करें दवाओं का इस्तेमाल
कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार, रोग नियंत्रण के लिए केवल दवा पर निर्भर रहने के बजाय खेत की स्थिति सुधारना भी महत्वपूर्ण है। जलभराव वाले खेतों में अतिरिक्त पानी निकालना, फसल का नियमित निरीक्षण करना और रोग के शुरुआती लक्षणों की पहचान करना नुकसान कम करने में मदद कर सकता है।
किसानों को दवाओं की मात्रा, छिड़काव के अंतराल और मिश्रण संबंधी निर्देशों का पालन करना चाहिए। अलग-अलग उत्पादों को बिना पुष्टि के एक साथ नहीं मिलाना चाहिए। छिड़काव के दौरान व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करें और उत्पाद के लेबल पर दी गई सावधानियों का पालन करें।

