धान की फसल: भारी बारिश के बाद धान में गंधी बग, गाल मिज और थ्रिप्स का खतरा बढ़ा। जानें ICAR की सलाह, कीट नियंत्रण के तरीके और फसल बचाने के उपाय।
मानसून के दौरान हुई भारी बारिश और खेतों में जलभराव के बाद धान की फसल में कीटों का प्रकोप बढ़ने की आशंका है। भाकृअनुप-केंद्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (ICAR-NRRI), कटक ने अक्टूबर के पहले पखवाड़े के लिए कृषि सलाह जारी करते हुए किसानों को गंधी बग, गाल मिज, थ्रिप्स, तना छेदक और पत्ती लपेटक जैसे कीटों की निगरानी करने की सलाह दी है।
संस्थान के अनुसार, लगातार बारिश, अधिक नमी, बादल छाए रहने और दिन-रात के तापमान में अंतर जैसी परिस्थितियां धान की फसल में कीटों और कुछ रोगों की समस्या बढ़ा सकती हैं। ऐसे में किसानों को फसल का नियमित निरीक्षण करने, कीटों की सही पहचान करने और जरूरत के अनुसार नियंत्रण के उपाय अपनाने की आवश्यकता है।
धान में थ्रिप्स और गंधी बग का प्रकोप बढ़ने की आशंका
रोपाई वाले धान में थ्रिप्स दिखाई देने पर संस्थान की सलाह में कुछ कीटनाशकों के उपयोग का उल्लेख किया गया है। इनमें एजाडिरेक्टिन 0.15%, लैम्ब्डा साइहेलोथ्रिन 5% EC और थायोमेथोक्सम 25% WG शामिल हैं।
वहीं, ऊंचाई वाले या असिंचित क्षेत्रों में धान की बालियों पर गंधी बग का प्रकोप दिखाई देने पर निगरानी करने की सलाह दी गई है। यदि प्रति बाली दो कीट या प्रति वर्ग मीटर पांच कीट से अधिक कीट मिलें, तो नियंत्रण उपायों पर विचार किया जा सकता है।
संस्थान की सलाह में मैलाथियान 5% चूर्ण, एथोफेनप्रॉक्स 10 EC और क्लोरपायरीफॉस 20% EC का उल्लेख किया गया है। हालांकि, किसी भी कीटनाशक का इस्तेमाल करने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि वह धान और संबंधित कीट के लिए वर्तमान नियमों के अनुसार अनुमोदित हो।
गाल मिज कीट से धान की फसल को कैसे बचाएं?
गाल मिज धान की फसल को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण कीट है। इसका प्रकोप होने पर पौधों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है और उत्पादन में नुकसान की आशंका रहती है।
ICAR-NRRI की सलाह में गाल मिज के नियंत्रण के लिए फिप्रोनिल 5% SC, थायोमेथोक्सम 25% WG, लैम्ब्डा साइहेलोथ्रिन 5% EC, क्लोरपायरीफॉस 20% EC और कार्बोफ्यूरान 3% CG जैसे उत्पादों का उल्लेख किया गया है।
किसानों को कीट की सही पहचान करने के बाद ही नियंत्रण का तरीका चुनना चाहिए। दवा की मात्रा, उपयोग की अनुमति और छिड़काव की विधि की पुष्टि स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग से करना जरूरी है। विशेष रूप से प्रतिबंधित या अत्यधिक जोखिम वाले कृषि रसायनों के इस्तेमाल से बचना चाहिए।
तना छेदक और पत्ती लपेटक के लिए फेरोमोन ट्रैप लगाएं
धान में तना छेदक और पत्ती लपेटक कीटों की समय रहते पहचान करने के लिए फेरोमोन ट्रैप उपयोगी हो सकते हैं। संस्थान ने निगरानी के उद्देश्य से प्रति एकड़ चार से पांच ट्रैप लगाने की सलाह दी है।
तना छेदक की निगरानी के लिए स्किर्पो ल्यूर और पत्ती लपेटक के लिए सीएनाफेलो ल्यूर वाले ट्रैप का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया गया है।
फेरोमोन ट्रैप में नर पतंगों की संख्या बढ़ने पर किसानों को खेत का अधिक बारीकी से निरीक्षण करना चाहिए। इससे कीटों की गतिविधि का शुरुआती संकेत मिल सकता है और समय रहते उपयुक्त प्रबंधन की योजना बनाई जा सकती है।
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मित्र कीटों से भी किया जा सकता है कीट नियंत्रण
धान की फसल में कीट प्रबंधन के लिए जैविक उपाय भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। संस्थान की सलाह में तना छेदक के लिए ट्राइकोग्रामा जैपोनिकम और पत्ती लपेटक के लिए ट्राइकोग्रामा चिलोनिस जैसे परजीवी मित्र कीटों के उपयोग का उल्लेख किया गया है।
इनके अंडों वाले कार्ड, जिन्हें ट्राइकोकार्ड कहा जाता है, फसल में कीटों की गतिविधि के अनुसार इस्तेमाल किए जा सकते हैं। सलाह में प्रति हेक्टेयर तीन कार्ड लगाने का उल्लेख है, जिनमें लगभग 60 हजार परजीवी अंडे होते हैं।
पतंगों की गतिविधि और अंडों के समूह दिखाई देने की स्थिति में जैविक नियंत्रण की प्रक्रिया को उचित अंतराल पर दोहराने की सलाह दी गई है। हालांकि, कार्ड की सही संख्या, समय और दोहराव का निर्धारण संबंधित कृषि विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में करना चाहिए।
यदि धान के एक पौध-गुच्छे में दो से अधिक पत्तियां मुड़ी हुई दिखाई दें, तो पत्ती लपेटक के प्रकोप की जांच करनी चाहिए। नियंत्रण के लिए फसल की अवस्था और कीट की पहचान के अनुसार उपयुक्त उपाय अपनाना जरूरी है।
सैनिक सुंडी, केस वर्म और हिस्पा कीट से भी रहें सतर्क
देर से रोपी गई धान की फसल में सैनिक सुंडी, केस वर्म और हिस्पा जैसे कीट भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए किसानों को पत्तियों, पौधों और खेत के अलग-अलग हिस्सों का नियमित निरीक्षण करना चाहिए।
संस्थान की सलाह में इन कीटों के लिए क्लोरपायरीफॉस 20 EC और क्विनालफॉस 25% EC का उल्लेख किया गया है। इन रसायनों के उपयोग से पहले फसल एवं कीट के लिए उनके वर्तमान पंजीकरण और अनुमोदित मात्रा की पुष्टि आवश्यक है।
किसानों को केवल कीट दिखाई देने के आधार पर तुरंत रासायनिक छिड़काव करने के बजाय प्रकोप की गंभीरता का आकलन करना चाहिए। जरूरत पड़ने पर कृषि विशेषज्ञ की मदद लेकर उपयुक्त नियंत्रण विधि अपनानी चाहिए।
भूरा फुदका कीट से बचाव के लिए इन बातों का रखें ध्यान
धान की फसल में भूरा फुदका कीट का प्रकोप होने पर खेत की निगरानी और पोषक तत्व प्रबंधन पर ध्यान देना जरूरी है। संस्थान ने इस कीट की समस्या के दौरान यूरिया जैसी नाइट्रोजनयुक्त खाद का अनावश्यक इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी है, क्योंकि अधिक नाइट्रोजन से कीट का प्रकोप बढ़ सकता है।
इसके अलावा, खेत में लगातार पानी भरा रखने से बचने और फसल की जरूरत के अनुसार सिंचाई प्रबंधन करने पर जोर दिया गया है। उचित जल प्रबंधन और संतुलित उर्वरक उपयोग फसल की स्थिति सुधारने में मदद कर सकते हैं।
फसल में समस्या बढ़ने पर राइस हेल्थ क्लिनिक से लें सलाह
यदि धान की फसल में कीट या रोग की समस्या लगातार बढ़ रही है और किसान उसकी सही पहचान नहीं कर पा रहे हैं, तो विशेषज्ञों से संपर्क करना बेहतर है।
ICAR-NRRI, कटक में स्थित राइस हेल्थ क्लिनिक में पौधों के नमूने दिखाकर समस्या की पहचान और प्रबंधन संबंधी मार्गदर्शन लिया जा सकता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नमूनों की जांच के लिए सोमवार से शुक्रवार सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक का समय बताया गया है। जाने से पहले संस्थान से समय और नमूना लाने की प्रक्रिया की पुष्टि कर लें।

