राजस्थान के अमावरा में आत्मा योजना के तहत कृषक गोष्ठी आयोजित हुई। किसानों को सरसों, चना, गेहूं की खेती और DAP के विकल्प SSP की जानकारी दी गई।
कृषि विभाग की आत्मा योजना के अंतर्गत ग्राम अमावरा में रबी सीजन की तैयारियों को लेकर कृषक गोष्ठी आयोजित की गई। इसमें किसानों को सरसों, चना और गेहूं की वैज्ञानिक खेती, बीजोपचार, उर्वरक प्रबंधन, सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। गोष्ठी में किसानों को डीएपी के विकल्प के रूप में सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) के इस्तेमाल और उर्वरकों का संतुलित उपयोग करने के बारे में भी समझाया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से परिचित कराना, खेती की लागत कम करने के उपाय बताना और रबी फसलों की बेहतर पैदावार के लिए जागरूक करना था। इस दौरान कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं और उनके लाभ लेने की प्रक्रिया पर भी चर्चा हुई।
डीएपी के विकल्प के रूप में एसएसपी की उपयोगिता समझाई
गोष्ठी में सहायक कृषि अधिकारी पिन्टू मीना पहाड़ी ने किसानों को सिंगल सुपर फॉस्फेट यानी एसएसपी खाद के पोषक तत्वों और उपयोग के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एसएसपी फसल को फास्फोरस के साथ सल्फर भी उपलब्ध कराता है। सल्फर सरसों जैसी तिलहनी फसलों के लिए विशेष रूप से उपयोगी पोषक तत्व है।
उन्होंने किसानों को समझाया कि डीएपी के स्थान पर एसएसपी का उपयोग करते समय फसल की जरूरत के अनुसार फास्फोरस की उचित मात्रा सुनिश्चित करना जरूरी है। डीएपी से मिलने वाली नाइट्रोजन की पूर्ति के लिए आवश्यकता के अनुसार यूरिया या किसी अन्य उपयुक्त स्रोत का इस्तेमाल किया जा सकता है।
किसानों को सलाह दी गई कि खाद का चयन मिट्टी परीक्षण और कृषि विभाग की अनुशंसाओं के आधार पर करें, ताकि अनावश्यक खर्च से बचने के साथ फसल को आवश्यक पोषक तत्व भी मिल सकें।
सरसों, चना और गेहूं की उन्नत खेती के बताए तरीके
कृषक गोष्ठी में रबी सीजन की प्रमुख फसलों की बुवाई और देखभाल को लेकर विस्तार से जानकारी दी गई।
- सरसों की खेती: किसानों को समय पर बुवाई करने, क्षेत्र के अनुकूल उन्नत किस्मों का चयन करने और संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाने की सलाह दी गई। सरसों में सल्फर की आवश्यकता पर भी विशेष जोर दिया गया। शुरुआती अवस्था में खरपतवार नियंत्रण और फसल की नियमित निगरानी को बेहतर उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।
- चना की खेती: चने की बुवाई से पहले बीजोपचार करने और उपयुक्त परिस्थितियों में राइजोबियम कल्चर का इस्तेमाल करने की जानकारी दी गई। साथ ही, फास्फोरस का संतुलित उपयोग करने, खेत में जलभराव रोकने और रोगों व कीटों की नियमित निगरानी करने की सलाह दी गई।
- गेहूं की खेती: किसानों को स्थानीय जलवायु के अनुकूल किस्म चुनने और समय पर बुवाई करने के लिए प्रेरित किया गया। बीज दर, कतारों के बीच दूरी और खाद की मात्रा निर्धारित करते समय मिट्टी की स्थिति तथा बुवाई की विधि को ध्यान में रखने की बात कही गई। फसल की महत्वपूर्ण अवस्थाओं में जरूरत के अनुसार सिंचाई करने पर भी जोर दिया गया।
कृषि अधिकारियों ने किसानों को प्रमाणित बीज खरीदने और बिना आवश्यकता के उर्वरकों या कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी।
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कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ लेने की अपील
सहायक निदेशक कृषि सियाराम मीना ने किसानों को विभाग की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसान नई कृषि तकनीकों को अपनाकर खेती की लागत को नियंत्रित करने और उत्पादन की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में प्रयास करें।
उन्होंने किसानों से सरकारी योजनाओं की पात्रता और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त कर समय पर आवेदन करने का आग्रह किया। साथ ही, खेती से संबंधित नई तकनीकों और उपलब्ध सरकारी सहायता का लाभ उठाने के लिए भी प्रोत्साहित किया।
खाद, बीज और कीटनाशक खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
सहायक कृषि अधिकारी सुमित भारद्वाज ने किसानों को खाद, बीज और कीटनाशक दवाइयां अधिकृत विक्रेताओं से खरीदने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि कृषि सामग्री खरीदने के बाद पक्का बिल लेना जरूरी है।
किसानों को बिल में उत्पाद का नाम, मात्रा और कीमत की जांच करने के लिए जागरूक किया गया। बिना बिल के सामग्री खरीदने, जरूरत से ज्यादा उत्पाद लेने और जबरन टैगिंग जैसी स्थितियों से सावधान रहने की सलाह भी दी गई।
वहीं, कृषि पर्यवेक्षक शिवकेश ने कृषि विभाग की योजनाओं और उपयोगी कृषि गतिविधियों की जानकारी साझा की। उन्होंने किसानों से आवश्यक दस्तावेजों और आवेदन की प्रक्रिया के संबंध में संबंधित कृषि कार्यालय से संपर्क करने का आग्रह किया।
मिट्टी परीक्षण से कम हो सकता है खाद का खर्च
गोष्ठी में मिट्टी की जांच के महत्व पर भी चर्चा की गई। किसानों को रबी फसलों की बुवाई से पहले मिट्टी परीक्षण कराने की सलाह दी गई, ताकि खेत में उपलब्ध पोषक तत्वों की जानकारी के आधार पर उर्वरकों का सही इस्तेमाल किया जा सके।
मिट्टी परीक्षण से जरूरत के अनुसार खाद डालने में मदद मिलती है। इससे अनावश्यक उर्वरक खर्च कम करने, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और फसल की उत्पादकता सुधारने की संभावनाएं बढ़ती हैं।
किसानों को फसल चक्र अपनाने, खेत में उपलब्ध नमी का उचित उपयोग करने और कृषि संसाधनों का विवेकपूर्ण इस्तेमाल करने के लिए भी प्रेरित किया गया।
वैज्ञानिक खेती अपनाकर बढ़ाएं रबी फसलों का उत्पादन
अमावरा में आयोजित इस कृषक गोष्ठी के माध्यम से किसानों को रबी सीजन की बेहतर तैयारी के लिए जरूरी जानकारी दी गई। बीजोपचार, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, मिट्टी परीक्षण और सही सिंचाई जैसी तकनीकों को अपनाकर खेती को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
कृषि विभाग का जोर किसानों को वैज्ञानिक पद्धतियों से जोड़ने, अनावश्यक लागत कम करने और गुणवत्तापूर्ण कृषि उत्पादन के लिए जागरूक करने पर रहा। किसानों के लिए इन सुझावों का लाभ स्थानीय परिस्थितियों, मिट्टी की स्थिति और फसल की जरूरतों के अनुसार सही तरीके से लागू करने पर निर्भर करेगा।

