मध्य प्रदेश के धार जिले के किसान असलम शाह 0.750 हेक्टेयर में गुलाब, गेंदा और गुलदाउदी की खेती से सालाना 3 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं।
पारंपरिक खेती के साथ फूलों की खेती अपनाकर किसान अपनी आमदनी बढ़ाने के नए अवसर तलाश सकते हैं। मध्य प्रदेश के धार तहसील के तुर्क बगड़ी गांव के किसान असलम शाह ने इसे सच कर दिखाया है। गुलाब, गेंदा और गुलदाउदी की खेती करके वे हर साल लगभग 3 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं। उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन और सरकारी योजना के तहत मिले अनुदान ने उन्हें फूलों की खेती को आगे बढ़ाने में मदद की है।
असलम शाह पिता मकबूल शाह पहले मुख्य रूप से सोयाबीन और गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों की खेती करते थे। हालांकि, मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों और अपेक्षाकृत कम उत्पादन के कारण उनकी आमदनी उम्मीद के मुताबिक नहीं हो पा रही थी। इसके बाद उन्होंने खेती के दूसरे विकल्पों पर विचार किया और उद्यानिकी फसलों की ओर रुख किया।
सोयाबीन और गेहूं की खेती के साथ शुरू किया फूलों का उत्पादन
असलम शाह ने अपनी कृषि आय बढ़ाने के लिए पारंपरिक फसलों के साथ पुष्प उत्पादन को अपनाने का फैसला किया। इसके लिए उन्होंने उद्यानिकी विभाग से संपर्क किया और फूलों की खेती से जुड़ी संभावनाओं तथा आधुनिक तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।
विभागीय अधिकारियों से मार्गदर्शन मिलने के बाद उन्होंने गुलाब, गेंदा और गुलदाउदी की खेती शुरू की। इन फूलों की खेती से उन्हें पारंपरिक फसलों के अलावा आमदनी का एक नया स्रोत मिला।
0.750 हेक्टेयर में गुलाब, गेंदा और गुलदाउदी की खेती
वर्तमान में असलम शाह लगभग 0.750 हेक्टेयर कृषि भूमि पर विभिन्न प्रकार के फूलों का उत्पादन कर रहे हैं। वे पुष्प क्षेत्र विस्तार योजना के तहत फूलों की खेती कर रहे हैं, जिससे उन्हें सरकारी सहायता भी प्राप्त हुई है।
इस योजना के अंतर्गत उन्हें 37,500 रुपये की अनुदान राशि मिली। इस आर्थिक सहायता से फूलों की खेती को बढ़ावा देने और उत्पादन संबंधी गतिविधियों को आगे बढ़ाने में मदद मिली।
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आधुनिक कृषि तकनीकों से मिला फायदा
फूलों की खेती को बेहतर तरीके से संचालित करने के लिए असलम शाह को उद्यानिकी विभाग से तकनीकी जानकारी दी गई। इसमें मल्चिंग, संरक्षित खेती और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत ड्रिप सिंचाई जैसी आधुनिक तकनीकों की जानकारी शामिल थी।
इन तकनीकों का उद्देश्य पानी का बेहतर उपयोग करना, फसलों की देखभाल में सुधार लाना और उत्पादन प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है। विभागीय मार्गदर्शन से उन्हें फूलों की खेती की आवश्यकताओं को समझने और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने में सहायता मिली।
फूलों की खेती से सालाना 3 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा
असलम शाह की मेहनत और फूलों की खेती के प्रति उनकी पहल का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। वर्तमान में वे गुलाब, गेंदा और गुलदाउदी के उत्पादन से हर साल लगभग 3 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा अर्जित कर रहे हैं।
फूलों की खेती ने उनकी कृषि गतिविधियों में विविधता बढ़ाई है और पारंपरिक फसलों पर पूरी तरह निर्भर रहने की जरूरत को कम किया है। इससे वे अपने परिवार का बेहतर तरीके से भरण-पोषण कर पा रहे हैं।
उनकी सफलता यह भी दिखाती है कि किसान अपनी भूमि, स्थानीय परिस्थितियों और बाजार की मांग के अनुसार वैकल्पिक फसलों को अपनाकर आय बढ़ाने की संभावनाएं तलाश सकते हैं।
सरकारी योजनाओं और विभागीय मार्गदर्शन से किसानों को मिल सकता है लाभ
असलम शाह की कहानी दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है। पारंपरिक खेती के साथ उद्यानिकी और पुष्प उत्पादन को जोड़ने से कृषि आय के नए विकल्प विकसित किए जा सकते हैं।
पुष्प क्षेत्र विस्तार योजना के तहत मिली सहायता और उद्यानिकी विभाग से प्राप्त तकनीकी मार्गदर्शन ने उनकी इस पहल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आधुनिक सिंचाई और खेती की तकनीकों का सही इस्तेमाल भी फूलों के उत्पादन को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है।
हालांकि, फूलों की खेती शुरू करने से पहले किसानों के लिए बाजार की मांग, बिक्री की व्यवस्था, उत्पादन लागत और स्थानीय जलवायु का आकलन करना जरूरी है।

