यूपी में गन्ने की नई किस्म को.शा. 23232 के 2 लाख सिंगल बड 5 मिनट में बुक हुए। जानें को.शा. 19231, ऑनलाइन बुकिंग और सीड किट वितरण की जानकारी।
उत्तर प्रदेश में गन्ने की नई किस्मों के बीज पाने के लिए किसानों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। शाहजहांपुर स्थित उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद की ऑनलाइन बुकिंग शुरू होते ही को.शा. 23232 किस्म के दो लाख सिंगल बड महज पांच मिनट में बुक हो गए। इस बार किसानों के लिए को.शा. 23232 और को.शा. 19231 किस्मों की कुल तीन लाख सिंगल बड उपलब्ध कराई जा रही हैं।
गन्ने की नई किस्मों की बुकिंग शुरू होते ही खत्म हुआ कोटा
उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए नई किस्मों की मिनी सीड किट हासिल करना आसान नहीं रहा। गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर की ओर से शुक्रवार सुबह 10 बजे ऑनलाइन पंजीकरण शुरू किया गया। वेबसाइट खुलते ही बड़ी संख्या में किसानों ने आवेदन करना शुरू कर दिया।
बुकिंग की रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि को.शा. 23232 किस्म के लिए निर्धारित दो लाख सिंगल बड का कोटा केवल पांच मिनट में पूरा हो गया। सीमित उपलब्धता और नई किस्मों से बेहतर पैदावार की उम्मीद के कारण किसानों ने तेजी से पंजीकरण कराया।
किसानों को मिलेंगी तीन लाख सिंगल बड
इस सीजन में किसानों के लिए दो नई गन्ना किस्मों की मिनी सीड किट उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इनमें को.शा. 23232 के दो लाख और को.शा. 19231 के एक लाख सिंगल बड शामिल हैं।
को.शा. 23232 किस्म को सितंबर में प्रदेश में खेती के लिए जारी किया गया था। गन्ना शोध परिषद के अनुसार, इन किस्मों में बेहतर उत्पादन क्षमता, अधिक शर्करा प्रतिशत और रोगों व कीटों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता जैसे गुण हैं। इन विशेषताओं से किसानों को गन्ने की खेती में होने वाले नुकसान को कम करने और उत्पादन बेहतर करने में मदद मिल सकती है।
सिर्फ ऑनलाइन होगी बुकिंग, एक किसान कोड पर एक आवेदन
नई किस्मों की मिनी सीड किट के लिए आवेदन केवल आधिकारिक वेबसाइट enquiry.caneup.in के माध्यम से किया जा रहा है। किसानों को ध्यान रखना होगा कि ऑफलाइन आवेदन की सुविधा उपलब्ध नहीं है।
व्यवस्था के तहत एक कृषक कोड से केवल एक बार ही बुकिंग की जा सकती है। इसका उद्देश्य सीमित मात्रा में उपलब्ध बीज को अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाना है।
सफल पंजीकरण के बाद किसान के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर चार अंकों का पंजीकरण नंबर भेजा जाता है। बीज वितरण की तारीख और स्थान की जानकारी भी किसानों को मोबाइल संदेश के जरिए उपलब्ध कराई जाएगी।
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मिठास मेला-2026 में होगा मिनी सीड किट का वितरण
गन्ने की नई किस्मों की मिनी सीड किट का वितरण अक्टूबर में प्रस्तावित मिठास मेला-2026 के दौरान किए जाने की योजना है। हालांकि, मेले की अंतिम तारीख बाद में घोषित की जाएगी।
बीज प्राप्त करने के लिए किसानों को वितरण स्थल पर अपना चार अंकों का पंजीकरण नंबर और आधार कार्ड की मूल प्रति लेकर पहुंचना होगा। वहां दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा। सत्यापन पूरा होने के बाद किसान को टोकन मिलेगा, जिसके आधार पर वितरण काउंटर से मिनी सीड किट दी जाएगी।
किसानों को सलाह है कि वे अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर पर आने वाले संदेशों को सुरक्षित रखें और वितरण से संबंधित आधिकारिक सूचना का इंतजार करें।
लाल सड़न रोग से बचाव के लिए विकसित की गईं नई किस्में
गन्ने की इन नई किस्मों को जारी करने के पीछे प्रमुख वजह फसल को नुकसान पहुंचाने वाले लाल सड़न रोग की समस्या भी है। इस रोग ने पहले बड़े क्षेत्र में बोई जाने वाली को-0238 किस्म को प्रभावित किया था। इसके चलते तराई और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में किसानों को नुकसान उठाना पड़ा।
इस चुनौती को ध्यान में रखते हुए नई किस्मों का लगभग दस वर्षों तक खेतों में परीक्षण किया गया। इसके बाद इन्हें किसानों के लिए जारी किया गया। बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाली किस्मों को अपनाने से किसानों को फसल संबंधी जोखिम कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
मिनी सीड किट से किसानों तक पहुंचेगा नया बीज
नई किस्मों की मांग अधिक होने और बीज सीमित मात्रा में उपलब्ध होने के कारण मिनी सीड किट के माध्यम से वितरण किया जा रहा है। इस व्यवस्था में किसानों को शुरुआत में थोड़ी मात्रा में बीज दिया जाता है, जिसे वे अपने खेत के छोटे हिस्से में लगाकर आगे बीज उत्पादन के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।
समय के साथ किसान अपने खेत में तैयार गन्ने से रोपण सामग्री विकसित कर सकते हैं। इससे नई किस्मों का विस्तार धीरे-धीरे अधिक क्षेत्रों में संभव हो सकता है।
जिन किसानों को इस बार ऑनलाइन बुकिंग के दौरान बीज नहीं मिल पाया है, वे अगली उपलब्धता से जुड़ी आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रख सकते हैं। तब तक अपने क्षेत्र के कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार उपयुक्त और प्रमाणित किस्मों का चयन करना बेहतर रहेगा।
किसानों के लिए क्यों अहम हैं ये नई किस्में?
गन्ने की खेती में किस्म का चयन उत्पादन, शर्करा की मात्रा और फसल की सेहत को प्रभावित करता है। रोगों के प्रति संवेदनशील किस्मों के कारण किसानों को उपज में नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। इसके विपरीत, स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल और रोग प्रतिरोधक क्षमता वाली किस्में खेती को अधिक टिकाऊ बनाने में मदद कर सकती हैं।
उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद की इस पहल से नई किस्मों के बीज किसानों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। अब किसानों की नजर मिनी सीड किट के वितरण कार्यक्रम और भविष्य में बीज की उपलब्धता से जुड़ी घोषणाओं पर रहेगी।

