यूपी की कृषक दुर्घटना कल्याण योजना में किसानों को 5 लाख रुपये तक मुआवजा मिलेगा। ऑनलाइन आवेदन, सत्यापन और DBT से भुगतान की सुविधा होगी।
उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना को लेकर राहत की खबर है। योगी सरकार इस योजना की प्रक्रिया को डिजिटल बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसके बाद दुर्घटना की स्थिति में किसान या उनके परिजन ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे और जरूरी दस्तावेज भी पोर्टल पर जमा किए जा सकेंगे।
डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद आवेदन से लेकर दस्तावेजों के सत्यापन और मुआवजे के भुगतान तक की प्रक्रिया ऑनलाइन करने की तैयारी है। पात्र लाभार्थियों को स्वीकृत सहायता राशि सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाएगी। इससे किसानों को आवेदन के लिए बार-बार सरकारी कार्यालय जाने की परेशानी से राहत मिलने की उम्मीद है।
5 लाख रुपये तक मिलती है आर्थिक सहायता
मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना की शुरुआत वर्ष 2019 में किसानों और उनके परिवारों को आकस्मिक दुर्घटनाओं से आर्थिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से की गई थी। योजना के तहत दुर्घटना में किसान की मृत्यु या गंभीर शारीरिक क्षति होने की स्थिति में निर्धारित नियमों के अनुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
मृत्यु की स्थिति में पात्र परिवार को अधिकतम 5 लाख रुपये तक की सहायता मिल सकती है। दुर्घटना से होने वाली स्थायी दिव्यांगता के स्तर के आधार पर भी मुआवजे की राशि निर्धारित की जाती है।
दिसंबर 2025 तक इस योजना के तहत 29,394 किसानों के आवेदन स्वीकृत किए जाने की जानकारी दी गई है। डिजिटल प्रणाली लागू होने के बाद आवेदन और भुगतान प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने का प्रयास किया जाएगा।
अलग-अलग स्थिति में अलग मुआवजा
योजना में दुर्घटना से हुए नुकसान के आधार पर सहायता राशि तय की जाती है। किसान की मृत्यु होने या दोनों हाथ अथवा दोनों पैर गंवाने जैसी गंभीर स्थिति में अधिकतम 5 लाख रुपये तक की सहायता का प्रावधान है।
वहीं एक हाथ और एक पैर के नुकसान की स्थिति में निर्धारित नियमों के अनुसार 2 से 3 लाख रुपये तक की सहायता मिल सकती है। 25 से 50 प्रतिशत तक दिव्यांगता होने पर 1 से 2 लाख रुपये तक सहायता का प्रावधान बताया गया है। आंख को गंभीर नुकसान पहुंचने जैसी स्थिति भी योजना के दायरे में शामिल हो सकती है।
किन हादसों में मिल सकता है लाभ?
मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के तहत विभिन्न प्रकार की दुर्घटनाओं को शामिल किया गया है। इनमें पेड़ गिरने, भूस्खलन, सड़क या यात्रा के दौरान दुर्घटना, आकाशीय बिजली गिरने, बाढ़ में बहने और पशुओं के हमले जैसी घटनाएं शामिल हैं।
इसके अलावा करंट लगना, आग से झुलसना, मकान गिरना, आतंकवादी घटना, मारपीट के दौरान गंभीर चोट, कमरे या अन्य स्थान से गिरना तथा लूट के दौरान हत्या जैसी घटनाएं भी निर्धारित शर्तों के तहत योजना के दायरे में आ सकती हैं।
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ऑनलाइन आवेदन से किसानों को मिलेगी राहत
योजना के डिजिटल स्वरूप को विकसित करने के लिए राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) की सहायता ली जा रही है। प्रस्तावित व्यवस्था में लाभार्थी ऑनलाइन आवेदन करने के साथ आवश्यक प्रमाण-पत्र और अन्य दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड कर सकेंगे।
आवेदन जमा होने के बाद संबंधित स्तर पर दस्तावेजों और दावे का सत्यापन किया जाएगा। पात्र पाए जाने पर मुआवजे की राशि DBT यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से लाभार्थी के बैंक खाते में भेजने की व्यवस्था होगी।
आवेदन की स्थिति भी ऑनलाइन देख सकेंगे
डिजिटल प्रक्रिया का एक बड़ा फायदा यह होगा कि आवेदक अपने आवेदन की स्थिति ऑनलाइन देख सकेगा। इससे फाइल की प्रगति जानने के लिए संबंधित कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी।
नई व्यवस्था से आवेदन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने, दस्तावेजों के सत्यापन को व्यवस्थित करने और पात्र लाभार्थियों तक सहायता राशि पहुंचाने में तेजी लाने का लक्ष्य है।
किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह योजना?
खेती से जुड़े परिवारों के लिए दुर्घटना की स्थिति में अचानक आर्थिक संकट पैदा हो सकता है। ऐसे समय में मिलने वाली सरकारी सहायता परिवार को तत्काल आर्थिक सहारा प्रदान कर सकती है। योजना को डिजिटल किए जाने से ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी सहायता तक पहुंच आसान होने और प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।
हालांकि, मुआवजे की पात्रता, दुर्घटना की श्रेणी और सहायता राशि के लिए संबंधित सरकारी नियम एवं निर्धारित दस्तावेजों को पूरा करना आवश्यक होगा। किसानों और उनके परिजनों को आवेदन से पहले योजना की आधिकारिक शर्तों की जानकारी जरूर जांचनी चाहिए।

