अरविंद केजरीवाल ने CEC ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग की और दिल्ली समेत कई चुनाव दोबारा कराने की बात कही। जानें SIR विवाद पर उनका पूरा बयान।
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर बड़ा बयान दिया है। केजरीवाल ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और Special Intensive Revision (SIR) से जुड़े विवाद के बीच ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग की है।
केजरीवाल ने यह मांग द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए की। रिपोर्ट में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर दर्ज कराई गई आपत्तियों का उल्लेख किया गया है।
ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग
प्रेस कॉन्फ्रेंस में केजरीवाल ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के कामकाज में नियमों और प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार किया जाना चाहिए और उनके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलाया जाना चाहिए।
यह केजरीवाल का राजनीतिक आरोप और मांग है। उपलब्ध रिपोर्टों में फिलहाल उनके इस आरोप को किसी न्यायिक निष्कर्ष के रूप में स्थापित नहीं किया गया है।
दिल्ली समेत कई चुनाव रद्द करने की मांग
केजरीवाल ने पिछले कुछ वर्षों में हुए कई चुनावों को रद्द कर दोबारा कराने की मांग भी रखी। उनके बयान के मुताबिक इसमें दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, हरियाणा और मध्य प्रदेश के चुनाव शामिल हैं।
उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची में हुए बदलावों और SIR की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं और इसलिए संबंधित चुनावों की वैधता पर भी पुनर्विचार होना चाहिए।
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SIR को लेकर क्या है विवाद?
Special Intensive Revision (SIR) मतदाता सूची के व्यापक पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। द इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कई मौकों पर चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट में उनके द्वारा कुछ कदमों को ‘अनधिकृत’ और ‘अवैध’ बताए जाने का उल्लेख है।
रिपोर्ट के अनुसार, SIR प्रक्रिया के दौरान 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए। यह प्रक्रिया और मतदाता सूची में बदलाव फिलहाल राजनीतिक बहस का विषय बने हुए हैं।
चुनाव आयोग में आंतरिक मतभेद का दावा
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में बताया गया है कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने कई मामलों में इस बात पर आपत्ति जताई कि उनके साथ फैसलों को लेकर पर्याप्त जानकारी या परामर्श नहीं किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों आयुक्तों ने विभिन्न आदेशों, नए मतदाताओं को जोड़ने और मतदाता नाम हटाने से संबंधित प्रक्रियाओं पर सवाल उठाए।
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद विपक्षी दलों के कई नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, इन आरोपों और आपत्तियों को लेकर संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया तथा चुनाव आयोग की आधिकारिक स्थिति को अलग-अलग देखना जरूरी है।
केजरीवाल ने चुनाव आयोग की व्यवस्था पर उठाए सवाल
केजरीवाल ने अपने बयान में कहा कि चुनाव आयोग एक सामूहिक संस्था है और मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ दो अन्य चुनाव आयुक्त भी इसके सदस्य होते हैं। उनका आरोप है कि यदि आयोग के औपचारिक अनुमोदन के बिना आदेश जारी किए गए हैं, तो उनकी वैधता पर सवाल उठता है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयुक्तों की ओर से इस संबंध में कई बार लिखित आपत्तियां दी गई थीं।
SIR में करोड़ों नाम हटने का मुद्दा
केजरीवाल ने SIR के तहत मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि यह पूरी प्रक्रिया आयोग की औपचारिक मंजूरी के बिना आगे बढ़ाई गई।
हालांकि, SIR से संबंधित प्रक्रियाओं और चुनाव आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक दस्तावेजों और चुनाव आयोग की स्थिति को देखना महत्वपूर्ण है।
राजनीतिक विवाद हुआ तेज
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट सामने आने के बाद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्षी दलों की प्रतिक्रियाएं तेज हुई हैं। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी समेत कई विपक्षी नेताओं ने रिपोर्ट में सामने आई आपत्तियों पर सवाल उठाए हैं।
फिलहाल विवाद का केंद्र SIR की प्रक्रिया, चुनाव आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियां और मतदाता सूची में किए जा रहे बदलाव हैं। केजरीवाल ने इसी मुद्दे को आधार बनाकर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई और कई चुनावों को दोबारा कराने की मांग की है।

