NHRDF में 21 से 25 सितंबर तक मशरूम उत्पादन और कटाई उपरांत प्रबंधन पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पांच राज्यों के प्रतिभागी खेती, प्रसंस्करण और विपणन सीख रहे हैं।
राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (NHRDF) में मशरूम उत्पादन और कटाई के बाद प्रबंधन को लेकर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। 21 से 25 सितंबर 2026 तक चलने वाले इस कार्यक्रम में किसानों, युवाओं और उद्यमियों को मशरूम की वैज्ञानिक खेती से लेकर प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, विपणन और व्यवसाय शुरू करने से जुड़ी जानकारी दी जा रही है।
पांच राज्यों से पहुंचे प्रतिभागी
NHRDF के नई दिल्ली स्थित मुख्यालय में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में दिल्ली, बिहार, हरियाणा, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के प्रतिभागी शामिल हुए हैं। कार्यक्रम का विषय ‘मशरूम उत्पादन प्रौद्योगिकी एवं कटाई उपरांत प्रबंधन’ रखा गया है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ NABARD, नई दिल्ली के डायरेक्टर एवं जनरल मैनेजर नवीन कुमार राय ने किया। इस अवसर पर NHRDF के निदेशक डॉ. पी.के. गुप्ता ने मुख्य अतिथि का स्वागत पुष्पगुच्छ और शॉल भेंट करके किया।
मशरूम उत्पादन को बताया आय बढ़ाने का जरिया
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए नवीन कुमार राय ने कहा कि मशरूम उत्पादन मौजूदा समय में कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए एक संभावनाशील व्यवसाय बन सकता है। उचित प्रशिक्षण हासिल करने के बाद किसान, युवा और उद्यमी इसे आय का अतिरिक्त साधन बनाने की दिशा में काम कर सकते हैं।
उन्होंने मशरूम को खाद्य, पोषण और आर्थिक सुरक्षा से जोड़ते हुए इसके पोषण संबंधी गुणों और व्यावसायिक उपयोग की जानकारी दी। साथ ही मशरूम से तैयार होने वाले विभिन्न मूल्यवर्धित उत्पादों और उनके बाजार की संभावनाओं पर भी चर्चा की।
वैज्ञानिक तरीके से मशरूम उत्पादन की दी जाएगी जानकारी
NHRDF के निदेशक डॉ. पी.के. गुप्ता ने प्रशिक्षण में पहुंचे सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के दौरान मशरूम उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीकों के साथ अलग-अलग प्रजातियों और व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी जाएगी।
उनके मुताबिक प्रशिक्षण से मिली तकनीकी जानकारी का इस्तेमाल प्रतिभागी अपने क्षेत्रों में मशरूम की खेती और इससे जुड़े कारोबार को विकसित करने में कर सकते हैं।
also read: कम लागत में शुरू करें एलोवेरा की खेती, सालाना लाखों रुपये कमाने का मौका
धान और गेहूं के पुआल का होगा उपयोग
प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि अवशेषों के बेहतर इस्तेमाल पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रतिभागियों को धान और गेहूं के पुआल जैसे अवशेषों का उपयोग करके मशरूम उत्पादन की तकनीक समझाई जाएगी।
इसके साथ ही फसल अवशेषों को जलाने के बजाय उनका उपयोग करने के पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। इससे कृषि अवशेषों के प्रबंधन और मशरूम उत्पादन, दोनों को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।
प्रसंस्करण और विपणन की भी मिलेगी जानकारी
प्रशिक्षण केवल मशरूम की खेती तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें मशरूम के प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और बाजार में उत्पाद बेचने से जुड़े पहलुओं को भी शामिल किया गया है।
प्रतिभागियों को मशरूम से विभिन्न उत्पाद तैयार करने, उनकी बाजार संभावनाओं और विपणन की रणनीतियों के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा मशरूम आधारित उद्यम शुरू करने के लिए उपलब्ध विभिन्न सरकारी सहायता योजनाओं की जानकारी भी साझा की जाएगी।
मशरूम को टिकाऊ उद्यम बनाने पर जोर
प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य मशरूम उत्पादन को खाद्य एवं पोषण सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक अवसर के रूप में बढ़ावा देना है। NHRDF की ओर से प्रतिभागियों को उत्पादन तकनीक के साथ व्यवसाय के जरूरी पहलुओं की जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि वे प्रशिक्षण के बाद अपने क्षेत्र में इसे लागू कर सकें।
उद्घाटन समारोह में ये अधिकारी रहे मौजूद
कार्यक्रम में मनोज कुमार श्रीवास्तव, सलाहकार; राहुल डबास, वित्त सलाहकार एवं मुख्य लेखा अधिकारी; संजय सिंह, वरिष्ठ सलाहकार; डॉ. एस.के. तिवारी, सहायक निदेशक; एस.सी. तिवारी, सहायक निदेशक; सुधीर कुमार, सहायक निदेशक और जे.पी. शर्मा, वरिष्ठ प्रशासनिक सहायक सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
कार्यक्रम के अंत में NHRDF के सलाहकार मनोज कुमार श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। इसके बाद सामूहिक छायाचित्र के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

