यूपी में Ola, Uber, Rapido समेत यात्री एग्रीगेटर्स और ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए लाइसेंस अनिवार्य, नियम तोड़ने पर कार्रवाई होगी।
उत्तर प्रदेश में कैब, बाइक टैक्सी और ऑनलाइन डिलीवरी सेवाओं से जुड़े कारोबार को लेकर राज्य सरकार ने नई व्यवस्था लागू की है। अब प्रदेश में Ola, Uber, Rapido जैसे यात्री वाहन एग्रीगेटर्स के साथ ऑनलाइन डिलीवरी सेवाएं संचालित करने वाली कंपनियों के लिए निर्धारित लाइसेंस लेना जरूरी होगा।
सरकार का उद्देश्य ऐप आधारित परिवहन और डिलीवरी सेवाओं को अधिक व्यवस्थित बनाने के साथ यात्रियों और ग्राहकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। नई व्यवस्था के तहत कंपनियों की जिम्मेदारी तय करने और बिना अनुमति संचालित होने वाली सेवाओं पर कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
किन कंपनियों पर लागू होगा नया नियम?
परिवहन विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक, दोपहिया, तीन-पहिया, ऑटो और चार-पहिया वाहनों के जरिए यात्री परिवहन सेवा उपलब्ध कराने वाले एग्रीगेटर्स को लाइसेंस लेना होगा।
इस दायरे में ऐप आधारित कैब और बाइक राइड उपलब्ध कराने वाली सेवाएं शामिल हैं। इसके अलावा ऑनलाइन डिलीवरी सर्विस से जुड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों पर भी यह व्यवस्था लागू होगी।
यानी Ola, Uber, Rapido जैसी कंपनियों के साथ Swiggy, Zomato, Amazon जैसी ऑनलाइन डिलीवरी और ई-कॉमर्स सेवाओं को भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत लाइसेंस प्राप्त करना होगा।
ऑनलाइन पोर्टल से लेना होगा लाइसेंस
राज्य सरकार ने कंपनियों के लिए लाइसेंस प्रक्रिया को ऑनलाइन रखा है। संबंधित कंपनियों को राज्य परिवहन प्राधिकरण के विशेष ऑनलाइन पोर्टल upmyfleet.com के माध्यम से आवेदन कर लाइसेंस प्राप्त करना होगा। सरकार की ओर से तय नियमों और शर्तों को पूरा करने के बाद ही संबंधित कंपनियां प्रदेश में अपनी सेवाएं संचालित कर सकेंगी।
यात्रियों और ग्राहकों को क्या फायदा होगा?
नई व्यवस्था का एक प्रमुख उद्देश्य ऐप आधारित सेवाओं में जवाबदेही और सुरक्षा को मजबूत करना है। लाइसेंस व्यवस्था लागू होने के बाद परिवहन और डिलीवरी सेवाएं देने वाली कंपनियों की निगरानी के लिए एक औपचारिक नियामकीय ढांचा तैयार होगा।
यात्रियों के लिए कैब या बाइक राइड बुक करने और ग्राहकों के लिए ऑनलाइन सामान या फूड डिलीवरी लेने के दौरान सेवा प्रदाता की जिम्मेदारी तय करने में भी मदद मिलेगी। किसी शिकायत या नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित कंपनी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकेगी।
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बिना लाइसेंस सेवा देने पर कार्रवाई
उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित लाइसेंस के बिना सेवाएं संचालित करने वाली कंपनियों के खिलाफ नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
इस व्यवस्था के जरिए सरकार बिना अनुमति या निर्धारित नियमों का पालन किए संचालित होने वाली ऐप आधारित सेवाओं पर निगरानी बढ़ाना चाहती है।
कैब और डिलीवरी कंपनियों के लिए बदलेगा ऑपरेशन
नई लाइसेंस व्यवस्था के बाद उत्तर प्रदेश में काम कर रही एग्रीगेटर और ऑनलाइन डिलीवरी कंपनियों को राज्य के नियमों के अनुरूप अपनी सेवाएं संचालित करनी होंगी।
इससे कंपनियों के लिए लाइसेंसिंग और अनुपालन की जिम्मेदारी बढ़ेगी, जबकि यात्रियों और ग्राहकों के लिए सेवा से जुड़ी शिकायतों और जवाबदेही का एक औपचारिक आधार उपलब्ध होगा।
यूपी में ऐप आधारित सेवाओं पर बढ़ेगी निगरानी
उत्तर प्रदेश में कैब, बाइक टैक्सी और ऑनलाइन डिलीवरी सेवाओं का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में सरकार की नई लाइसेंस व्यवस्था इन सेवाओं को नियामकीय दायरे में लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
अब संबंधित कंपनियों को लाइसेंस लेकर ही राज्य में अपनी सेवाएं संचालित करनी होंगी। नियमों का पालन नहीं करने पर संबंधित कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

