गुरुग्राम में वायु प्रदूषण नियंत्रण की तैयारियां तेज। 8 एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन, 404.61 किमी मैकेनिकल स्वीपिंग और ग्रेप से पहले संसाधन बढ़ाने की योजना।
दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए गुरुग्राम में नगर निगम ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। वायु गुणवत्ता में सुधार, सड़क से उड़ने वाली धूल पर नियंत्रण, निर्माण एवं विध्वंस कचरे के निस्तारण, मैकेनिकल रोड स्वीपिंग और ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने सहित कई बिंदुओं पर नगर निगम स्तर पर काम किया जा रहा है।
मंगलवार को नगर निगम कार्यालय में निगमायुक्त प्रदीप दहिया की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में वर्ष 2026 की वायु प्रदूषण नियंत्रण कार्ययोजना से जुड़े विभिन्न लक्ष्यों और उनकी प्रगति की समीक्षा की गई। अधिकारियों को आगामी ग्रेप अवधि से पहले जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने और जमीनी स्तर पर कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए गए।
8 एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन बनाने की तैयारी
गुरुग्राम में वायु प्रदूषण की स्थिति पर लगातार नजर रखने के लिए एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग नेटवर्क को विस्तार देने की योजना बनाई गई है। फिलहाल शहर में 3 वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र संचालित हैं। इनकी संख्या बढ़ाकर 8 करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
इसके लिए पांच नए स्टेशनों की आवश्यकता वाले स्थानों की पहचान की गई है। अतिरिक्त मॉनिटरिंग स्टेशनों को दिसंबर 2026 तक स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में प्रदूषण के स्तर से संबंधित अधिक स्थानीय और नियमित आंकड़े उपलब्ध हो सकेंगे।
404.61 किलोमीटर सड़क पर मैकेनिकल स्वीपिंग
सड़क की धूल को नियंत्रित करने के लिए नगर निगम ने मैकेनिकल रोड स्वीपिंग को प्रमुख उपायों में शामिल किया है। निगम के आकलन के अनुसार 404.61 किलोमीटर सड़क नेटवर्क मैकेनिकल स्वीपिंग के लिए उपयुक्त है।
फिलहाल निगम के पास 24 मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनें हैं। इनके जरिए प्रतिदिन 600 किलोमीटर से अधिक 4-लेन सड़क क्षेत्र की सफाई का प्रावधान किया गया है। मशीनों का संचालन मुख्य रूप से रात 9 बजे से सुबह 7 बजे के बीच किया जाता है।
सफाई व्यवस्था की निगरानी के लिए मशीनों में जीपीएस आधारित रूट मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया गया है। इसके अलावा फील्ड अधिकारियों को प्रतिदिन के प्रदर्शन का रिकॉर्ड तैयार करने और मौके पर मैनुअल सत्यापन करने की जिम्मेदारी दी गई है।
ग्रेप लागू होने से पहले अतिरिक्त रोड स्वीपिंग मशीनों की खरीद और तैनाती पर भी काम किया जा रहा है। 30 सितंबर 2026 तक अतिरिक्त मशीनों को मैदान में उतारने का लक्ष्य रखा गया है। खास तौर पर धूल वाले हॉटस्पॉट क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
वाटर स्प्रिंकलर और एंटी-स्मॉग गन की भी समीक्षा
वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए पानी के छिड़काव और एंटी-स्मॉग गन की उपलब्धता का भी जायजा लिया गया। नगर निगम के पास वर्तमान में 40 वाटर स्प्रिंकलर उपलब्ध हैं। ग्रेप अवधि के दौरान जरूरत के मुताबिक अतिरिक्त संसाधन किराये पर लेने का प्रावधान भी रखा गया है।
इसके साथ ही निगम के पास 10 ट्रक-माउंटेड और 3 ट्रैक्टर-माउंटेड एंटी-स्मॉग गन उपलब्ध हैं। प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए इनके प्रभावी इस्तेमाल की योजना पर भी चर्चा की गई।
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सीएंडडी वेस्ट के निस्तारण पर निगरानी
निर्माण एवं विध्वंस कचरे यानी सीएंडडी वेस्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन को भी प्रदूषण नियंत्रण योजना में अहम स्थान दिया गया है। वर्तमान में सीएंडडी वेस्ट के लिए 1,500 टीपीडी प्रोसेसिंग क्षमता उपलब्ध है।
नगर निगम द्वारा 12 सेकेंडरी कलेक्शन प्वाइंट विकसित किए गए हैं और इन्हें एमसीजी के सीएंडडी वेस्ट पोर्टल पर लाइव किया जा चुका है।
आंकड़ों के मुताबिक 1 जनवरी से 31 अगस्त 2026 के बीच 3,38,071 टन सीएंडडी वेस्ट का ऑफटेक किया गया। इसके अलावा सीएक्यूएम के निर्देशों के तहत कचरे की निगरानी और व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए वेब कैमरों के इस्तेमाल पर भी जोर दिया जा रहा है।
611 किलोमीटर सड़कों को पुनर्विकास की जरूरत
बैठक में गुरुग्राम रोड रिडेवलपमेंट प्लान की भी समीक्षा की गई। नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में कुल 2,091 किलोमीटर सड़कें हैं। इनमें से 1,480 किलोमीटर सड़कें अच्छी स्थिति में बताई गई हैं, जबकि 611 किलोमीटर सड़कों को पुनर्विकास के लिए चिन्हित किया गया है।
वर्ष 2026 में नगर निगम ने 396 किलोमीटर सड़क के पुनर्विकास का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसमें 376.72 किलोमीटर के लिए प्रशासनिक स्वीकृति, 371.2 किलोमीटर के लिए टेंडर और 335.24 किलोमीटर के लिए वर्क ऑर्डर जारी किए जा चुके हैं।
अब तक 179.04 किलोमीटर सड़क का पुनर्विकास पूरा किया जा चुका है। वहीं 162 किलोमीटर सड़कें सीएक्यूएम के गुणवत्ता मानकों के अनुरूप तैयार की जा चुकी हैं।
31 ट्रैफिक कंजेशन हॉटस्पॉट की पहचान
वायु प्रदूषण को कम करने के साथ ट्रैफिक जाम की समस्या को दूर करने पर भी नगर निगम का फोकस है। वर्ष 2026 के लिए शहर में 31 शॉर्ट-टर्म ट्रैफिक कंजेशन हॉटस्पॉट चिन्हित किए गए थे।
इनमें से चार स्थानों पर निर्धारित कार्य पूरा हो चुका है, जबकि बाकी स्थानों पर तय समयसीमा के अनुसार काम जारी है। ट्रैफिक फ्लो बेहतर होने से वाहनों के लंबे समय तक जाम में खड़े रहने की स्थिति को कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
आईटीएमएस और एएनपीआर से निगरानी होगी मजबूत
गुरुग्राम में ट्रैफिक मैनेजमेंट को तकनीक से जोड़ने के लिए इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) के तहत भी काम चल रहा है।
पहले चरण में 218 स्थानों पर 1,200 कैमरे लाइव किए जा चुके हैं। दूसरे चरण में 258 स्थानों पर 2,722 कैमरे लगाने की दिशा में कार्य प्रगति पर है। इसके अलावा करीब 80 किलोमीटर फाइबर नेटवर्क और 88 सीसीटीवी लोकेशन पर भी काम किया जा रहा है।
कुल 2,722 कैमरों में से करीब 1,400 आईटीएमएस कैमरों में एएनपीआर सुविधा का प्रावधान है। वहीं 17 सीसीटीवी लोकेशन पर 350 कैमरे लाइव किए गए हैं, जिनमें 150 एएनपीआर कैमरे शामिल हैं।
पार्किंग क्षमता बढ़ाने पर भी जोर
बैठक में शहर की पार्किंग व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। वर्तमान में सरकारी विभागों द्वारा संचालित 64 सरफेस पार्किंग सुविधाओं में दोपहिया और चारपहिया वाहनों के लिए कुल 19,585 वाहनों की क्षमता उपलब्ध है।
इसके अलावा सदर बाजार स्थित एमसीजी की मल्टीलेवल पार्किंग में 230 चारपहिया और 100 दोपहिया वाहनों के लिए जगह उपलब्ध है।
भविष्य की पार्किंग जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कमान सराय सरफेस पार्किंग का काम पूरा किया जा चुका है। पोस्ट ऑफिस और अग्रसेन चौक के पास मल्टीलेवल पार्किंग समेत अन्य स्थानों पर भी पार्किंग सुविधाओं को विकसित करने की दिशा में काम जारी है।
ग्रेप से पहले तैयारियां पूरी करने के निर्देश
निगमायुक्त प्रदीप दहिया ने अधिकारियों से कहा कि वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए सभी संबंधित विभाग और एजेंसियां आपसी तालमेल के साथ निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा करें।
उन्होंने रोड डस्ट मैनेजमेंट, मैकेनिकल स्वीपिंग, वाटर स्प्रिंकलिंग, एंटी-स्मॉग गन, धूल नियंत्रण, सड़क सुधार और सीएंडडी वेस्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि आगामी ग्रेप अवधि शुरू होने से पहले जरूरी मशीनरी, उपकरण और अन्य संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े उपायों को प्रभावी तरीके से जमीन पर लागू किया जा सके।

