राजस्थान निकाय चुनाव 2026 में वार्डों के नतीजों और मेयर-अध्यक्ष पदों का गणित बदला। जानें BJP, कांग्रेस और निर्दलीयों के प्रदर्शन और स्थानीय समीकरण।
राजस्थान के शहरी निकाय चुनावों के नतीजों ने वार्ड स्तर और निकाय प्रमुख के चुनाव के बीच अंतर को सामने ला दिया है। 10,244 वार्डों के अंतिम परिणामों में भाजपा ने 4,182, कांग्रेस ने 3,619 और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 2,273 वार्डों में जीत दर्ज की।
हालांकि निकायों के मेयर, सभापति और अध्यक्ष पदों के चुनाव में भाजपा का आंकड़ा अलग तस्वीर दिखाता है। 301 घोषित निकाय प्रमुख पदों में भाजपा ने 197 और कांग्रेस ने 94 पद जीते, जबकि सात पद निर्दलीयों के खाते में गए।
वार्डों में भाजपा-कांग्रेस के बीच कितना अंतर रहा?
राजस्थान के 10,244 वार्डों में भाजपा सबसे ज्यादा सीटें जीतने वाली पार्टी रही। कांग्रेस दूसरे स्थान पर रही, जबकि निर्दलीयों ने भी बड़ी संख्या में वार्ड जीतकर कई निकायों में सत्ता के समीकरण को प्रभावित किया।
निर्दलीय उम्मीदवारों की 2,273 वार्डों में जीत ने खास तौर पर उन निकायों में महत्व बढ़ाया, जहां भाजपा या कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। ऐसे मामलों में बोर्ड गठन के लिए निर्दलीय पार्षदों का समर्थन अहम हो गया।
अध्यक्ष और मेयर चुनाव में बदली तस्वीर
वार्ड चुनाव के बाद जब मेयर, सभापति और अध्यक्ष पदों के लिए मतदान हुआ तो कई जगह समीकरण बदलते नजर आए। भाजपा ने 301 तय हो चुके निकाय प्रमुख पदों में 197 पर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस 94 पदों पर रही। निर्दलीयों ने सात निकायों में शीर्ष पद हासिल किए।
इस अंतर की वजह कई निकायों में स्पष्ट बहुमत का नहीं होना, निर्दलीय पार्षदों का समर्थन और मतदान के दौरान बने स्थानीय समीकरण रहे।
अजमेर में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी, फिर भी भाजपा का मेयर
अजमेर नगर निगम में कांग्रेस ने 37 वार्ड जीते, जबकि भाजपा के खाते में 32 और निर्दलीयों के 11 वार्ड आए। इसके बावजूद भाजपा की अनामिका शर्मा ने 43 वोट हासिल कर मेयर पद जीता।
यह नतीजा दिखाता है कि पार्षद चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें जीतना और मेयर चुनाव में बहुमत हासिल करना अलग-अलग राजनीतिक गणित हो सकता है।
अलवर में भी बदला समीकरण
अलवर में भाजपा के 28, कांग्रेस के 23 और निर्दलीयों के 13 पार्षद रहे। इसके बाद भाजपा की सुमनलता अग्रवाल मेयर चुनी गईं। यहां भी मेयर चुनाव का परिणाम केवल वार्ड संख्या के आधार पर तय नहीं हुआ।
भरतपुर में निर्दलीयों की मजबूत मौजूदगी
भरतपुर का परिणाम भी अलग रहा। यहां निर्दलीय पार्षदों की संख्या काफी मजबूत रही, लेकिन मेयर पद भाजपा के खाते में गया। अनुराधा सिंह निर्विरोध मेयर चुनी गईं।
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पाली में कांग्रेस के ज्यादा वार्ड, मेयर भाजपा का
पाली में कांग्रेस ने 29 वार्ड जीते, जबकि भाजपा को 21 और निर्दलीयों को 15 वार्ड मिले। इसके बावजूद भाजपा की नमिता बुबकिया मेयर निर्वाचित हुईं। यह भी उन उदाहरणों में शामिल है जहां वार्डों की संख्या और शीर्ष पद का परिणाम अलग रहा।
निर्दलीयों ने सात निकायों में हासिल किए शीर्ष पद
निर्दलीय पार्षदों ने बड़ी संख्या में वार्ड जीतने के साथ सात निकाय प्रमुख पद भी अपने नाम किए। इनमें धौलपुर, हनुमानगढ़ और सादुलशहर नगर परिषद के अलावा सूरजगढ़, टोडाभीम, रियांबड़ी और फतहनगर-सनवाड़ शामिल हैं।
इन निकायों में कई जगह निर्दलीय उम्मीदवार सबसे बड़े समूह के रूप में सामने आए, जबकि कुछ स्थानों पर उन्होंने अन्य दलों के समर्थन से बहुमत का आंकड़ा हासिल किया।
हनुमानगढ़ और सादुलशहर में निर्दलीयों का दबदबा
हनुमानगढ़ नगर परिषद में निर्दलीयों ने 60 में से 34 वार्ड जीते। वहीं सादुलशहर में 25 में से 22 वार्ड निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में गए। दोनों जगह निर्दलीय पार्षदों की संख्या ने स्थानीय सत्ता के समीकरण को काफी प्रभावित किया।
भाजपा और कांग्रेस के अलावा छोटे दल भी सक्रिय
राजस्थान निकाय चुनाव में सिर्फ भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय ही प्रमुख भूमिका में नहीं रहे। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP), आम आदमी पार्टी (AAP), CPI(M), BSP और अन्य दलों ने भी अलग-अलग वार्डों में जीत दर्ज की। अंतिम परिणामों में RLP के 63, AAP के 42, CPI(M) के 38 और BSP के 19 वार्ड रहे।
निकाय चुनाव का बड़ा संदेश
राजस्थान निकाय चुनाव के आंकड़े बताते हैं कि वार्ड स्तर पर भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला कई जगह करीबी रहा, जबकि निकाय प्रमुखों के चुनाव में परिणामों का अंतर ज्यादा दिखाई दिया। निर्दलीय उम्मीदवारों की 2,273 वार्डों में जीत ने भी स्थानीय राजनीति में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण बनाया।
मेयर और अध्यक्ष पदों के चुनाव में सामने आए परिणामों से यह भी स्पष्ट हुआ कि निकाय स्तर पर वार्ड संख्या के अलावा स्थानीय गठजोड़, समर्थन और मतदान का गणित भी परिणाम को प्रभावित कर सकता है।

