क्या RO का पानी रोज पीना सुरक्षित है? जानें RO Water के फायदे-नुकसान, TDS की भूमिका और सही वॉटर प्यूरीफायर चुनने के जरूरी टिप्स।
घरों में साफ पानी के लिए RO वॉटर प्यूरीफायर का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। लेकिन क्या हर तरह के पानी के लिए RO जरूरी है और क्या लगातार RO का पानी पीना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है? इसका जवाब आपके घर में आने वाले पानी की गुणवत्ता और उसमें मौजूद प्रदूषकों पर निर्भर करता है।
RO यानी Reverse Osmosis एक ऐसी तकनीक है जो पानी से कई घुले हुए पदार्थों और कुछ प्रदूषकों को कम करने में मदद करती है। हालांकि, इस प्रक्रिया में कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे कुछ मिनरल्स भी कम हो सकते हैं। WHO ने भी लंबे समय तक कम-मिनरल या डिमिनरलाइज्ड पानी के सेवन से जुड़े संभावित प्रभावों पर चर्चा की है।
RO पानी कब उपयोगी हो सकता है?
अगर आपके पानी में घुले हुए लवण, कुछ भारी धातुएं या अन्य ऐसे प्रदूषक मौजूद हैं जिन्हें RO तकनीक प्रभावी ढंग से कम कर सकती है, तो RO उपयोगी हो सकता है। खासतौर पर ऐसे क्षेत्रों में जहां पानी की गुणवत्ता संदिग्ध हो, केवल स्वाद या TDS देखकर फैसला करने के बजाय पानी की जांच कराना बेहतर तरीका है।
BIS के IS 10500 पेयजल मानक में TDS की स्वीकार्य सीमा 500 mg/L दी गई है। हालांकि, TDS अकेले पानी की सुरक्षा का पूरा आकलन नहीं करता, क्योंकि पानी में माइक्रोबियल और अलग-अलग रासायनिक प्रदूषक भी हो सकते हैं।
क्या RO पानी के मिनरल्स निकाल देता है?
हां, RO प्रक्रिया पानी में मौजूद कई घुले हुए पदार्थों की मात्रा कम कर सकती है। इनमें कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स भी शामिल हो सकते हैं।
WHO के दस्तावेज के अनुसार बहुत कम मिनरल वाले या डिमिनरलाइज्ड पानी में कैल्शियम और मैग्नीशियम की मात्रा काफी कम हो सकती है। हालांकि, शरीर को इन पोषक तत्वों की आपूर्ति केवल पानी से नहीं, बल्कि मुख्य रूप से संतुलित आहार से भी होती है।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि RO पानी पीने से अपने-आप हड्डियां कमजोर हो जाती हैं या इम्युनिटी कम हो जाती है। ऐसे दावों को व्यक्ति की पूरी डाइट और स्वास्थ्य स्थिति के संदर्भ में देखना चाहिए।
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क्या कम TDS वाला पानी खतरनाक है?
कम TDS का मतलब केवल इतना है कि पानी में घुले हुए पदार्थों की मात्रा कम है। WHO के अनुसार TDS के लिए कोई स्वास्थ्य-आधारित सार्वभौमिक guideline value निर्धारित नहीं की गई है। इसलिए सिर्फ TDS मीटर की एक रीडिंग के आधार पर पानी को सुरक्षित या असुरक्षित घोषित नहीं किया जा सकता।
पानी की गुणवत्ता जानने के लिए यह देखना जरूरी है कि उसमें बैक्टीरिया, नाइट्रेट, फ्लोराइड, आर्सेनिक, सीसा या अन्य संभावित प्रदूषक तो मौजूद नहीं हैं।
RO पानी इस्तेमाल करते समय किन बातों का ध्यान रखें?
1. पहले पानी की गुणवत्ता जांचें
RO लगाने से पहले अपने घर के पानी की लैब टेस्टिंग कराना उपयोगी हो सकता है। इससे पता चलता है कि पानी में वास्तव में किस तरह के प्रदूषक मौजूद हैं और किस प्रकार की फिल्ट्रेशन की जरूरत है।
2. केवल TDS को आधार न बनाएं
TDS मीटर पानी में मौजूद कुल घुले पदार्थों का अनुमान देता है, लेकिन यह हर तरह के प्रदूषण की जानकारी नहीं देता। इसलिए केवल TDS के आधार पर प्यूरीफायर चुनना सही तरीका नहीं है।
3. RO की सर्विस समय पर कराएं
RO फिल्टर और मेम्ब्रेन की स्थिति खराब होने पर पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। निर्माता द्वारा बताए गए अंतराल पर फिल्टर की जांच और सर्विस कराना जरूरी है।
4. जरूरत से ज्यादा शुद्धिकरण से बचें
अगर आपके क्षेत्र में पानी पहले से सुरक्षित और अच्छी गुणवत्ता का है, तो हर स्थिति में RO की जरूरत नहीं होती। पानी की वास्तविक गुणवत्ता के अनुसार RO, UV, UF या किसी अन्य उपचार प्रणाली का चुनाव किया जा सकता है।
5. मिनरल्स के लिए संतुलित आहार जरूरी है
कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्वों की पर्याप्त मात्रा के लिए दूध-दही, हरी सब्जियां, दालें, नट्स और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करना महत्वपूर्ण है। केवल पानी को मिनरल्स का मुख्य स्रोत मानना सही नहीं है।
RO पानी से जुड़ी सबसे बड़ी गलतफहमी
RO पानी को लेकर अक्सर यह दावा किया जाता है कि इसमें से मिनरल्स निकल जाने के कारण इसे पीने से शरीर में कैल्शियम और मैग्नीशियम की गंभीर कमी हो जाती है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर ऐसा सीधा निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।
WHO ने डिमिनरलाइज्ड पानी में कम कैल्शियम और मैग्नीशियम सेवन की संभावना को जरूर चर्चा में रखा है, लेकिन पानी की गुणवत्ता और व्यक्ति की कुल डाइट दोनों को ध्यान में रखना जरूरी है।

