राकेश टिकैत के नेतृत्व में नोएडा प्राधिकरण के खिलाफ किसानों का धरना जारी है। 17 सूत्रीय मांगों पर अधिकारियों संग करीब 2 घंटे बैठक हुई।
नोएडा प्राधिकरण के खिलाफ किसानों का आंदोलन जारी है। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत भी किसानों के प्रदर्शन में शामिल हुए। सेक्टर-96 स्थित नोएडा प्राधिकरण कार्यालय के बाहर चल रहे धरने के दौरान किसानों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर अधिकारियों से बातचीत की।
किसानों का यह आंदोलन नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना क्षेत्र से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर चल रहा है। इनमें भूमि अधिग्रहण से संबंधित मुआवजा, विकसित भूखंड और आबादी से जुड़े मामलों के निस्तारण जैसी मांगें शामिल हैं।
ट्रैक्टर पर सवार होकर प्राधिकरण कार्यालय पहुंचे टिकैत
राकेश टिकैत किसानों के साथ ट्रैक्टर पर सवार होकर नोएडा प्राधिकरण कार्यालय पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। इससे पहले भी किसान संगठनों ने तीनों प्राधिकरणों से जुड़ी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन और महापंचायत का आयोजन किया था।
ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, किसानों ने मांगों पर ठोस कार्रवाई और लिखित आश्वासन की आवश्यकता पर जोर दिया है।
अधिकारियों के साथ हुई बैठक में मांगों पर चर्चा
किसान प्रतिनिधियों और प्राधिकरण अधिकारियों के बीच बैठक में किसानों के 17 सूत्रीय मांगपत्र से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। बातचीत में किसानों की जमीन, मुआवजे और विकसित भूखंडों से संबंधित विषय प्रमुख रहे।
किसान नेताओं के अनुसार, लंबे समय से लंबित मामलों का समाधान किए जाने की मांग की जा रही है। राकेश टिकैत ने कहा कि आगे की रणनीति बातचीत के नतीजों की समीक्षा के बाद तय की जाएगी।
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क्या हैं किसानों की प्रमुख मांगें?
किसानों की ओर से उठाए जा रहे प्रमुख मुद्दों में अतिरिक्त मुआवजा, विकसित आवासीय भूखंडों का आवंटन और आबादी से जुड़े मामलों का निस्तारण शामिल हैं।
कुछ किसान संगठनों ने भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों में 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के प्रावधानों को लागू करने की मांग भी उठाई है। रिपोर्टों के अनुसार, तीनों प्राधिकरणों से जुड़े हजारों भू-स्वामियों के आबादी भूखंडों के मामले भी आंदोलन का हिस्सा हैं।
तीनों प्राधिकरणों से जुड़े हैं किसान
आंदोलन का दायरा केवल नोएडा प्राधिकरण तक सीमित नहीं है। किसान नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना विकास प्राधिकरण से संबंधित मुद्दों को लेकर भी अपनी मांगें रख रहे हैं।
रिपोर्टों में बताया गया है कि अलग-अलग प्राधिकरण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में किसान आबादी भूखंड और मुआवजे से जुड़े मामलों के समाधान की मांग कर रहे हैं।
बातचीत के बाद आगे की रणनीति पर फैसला
बैठक के बाद किसान नेताओं ने संकेत दिया कि अधिकारियों के साथ हुई बातचीत और उसके परिणामों की समीक्षा की जाएगी। इसके आधार पर आंदोलन की अगली रणनीति तय होगी।
राकेश टिकैत ने पहले भी कहा है कि किसानों की लंबित मांगों पर ठोस समाधान मिलने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही गई है।

