डॉलर के मुकाबले रुपया 82 पैसे टूटकर अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया, कच्चे तेल की तेजी और वैश्विक तनाव ने बढ़ाई चिंता।
भारतीय मुद्रा बाजार में सोमवार का दिन बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया बड़ी गिरावट के साथ अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। विदेशी मुद्रा बाजार में आई इस कमजोरी ने निवेशकों, कारोबारियों और आर्थिक विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।
दिनभर के कारोबार के दौरान रुपया लगातार दबाव में बना रहा और आखिरकार भारी गिरावट के साथ बंद हुआ। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भारतीय मुद्रा पर जबरदस्त दबाव बनाया है।
ऐतिहासिक गिरावट ने बढ़ाई चिंता
विदेशी मुद्रा बाजार में कारोबार शुरू होते ही रुपये पर दबाव दिखाई देने लगा। शुरुआती कारोबार में ही रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ और दिनभर उतार-चढ़ाव के बीच लगातार नीचे जाता रहा।
अंत में भारतीय मुद्रा अपने अब तक के सबसे कमजोर स्तर पर पहुंच गई। इतनी बड़ी गिरावट को बाजार विशेषज्ञ असामान्य मान रहे हैं क्योंकि सामान्य परिस्थितियों में रुपये में इतनी तेज कमजोरी कम ही देखने को मिलती है।
कच्चे तेल की तेजी बनी बड़ी वजह
विशेषज्ञों के अनुसार रुपये में आई इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आई तेजी है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक अनिश्चितता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़े हैं।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था और मुद्रा बाजार पर पड़ता है। जब तेल महंगा होता है तो देश को ज्यादा विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ जाता है।
वैश्विक तनाव का असर
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने भी बाजार की चिंता बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी राजनीतिक और सैन्य अनिश्चितताओं ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश की ओर मोड़ दिया है।
ऐसे समय में वैश्विक निवेशक डॉलर को सुरक्षित विकल्प मानते हैं, जिससे डॉलर मजबूत होता है और उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव बढ़ जाता है। भारतीय रुपया भी इसी दबाव का शिकार हुआ।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बढ़ा दबाव
विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार निकासी भी रुपये की कमजोरी की बड़ी वजह मानी जा रही है। बाजार आंकड़ों के अनुसार इस साल विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से बड़ी मात्रा में पूंजी निकाली है।
जब विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकालते हैं, तो वे रुपये बेचकर डॉलर खरीदते हैं। इससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर होने लगता है।
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शेयर बाजार पर भी पड़ा असर
रुपये की गिरावट का असर शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। बैंकिंग, ऊर्जा और आयात आधारित कंपनियों के शेयरों में दबाव देखने को मिला।
विशेषज्ञों का कहना है कि कमजोर रुपया आयात लागत बढ़ा देता है, जिससे कई कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है। खासकर तेल, विमानन और इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्र की कंपनियों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बन सकती है।
आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर
रुपये में कमजोरी का असर केवल बाजार तक सीमित नहीं रहता बल्कि आम लोगों की जेब पर भी पड़ता है।
अगर रुपया लगातार कमजोर रहता है तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। इसके अलावा विदेश यात्रा, विदेशी शिक्षा और आयातित वस्तुएं भी महंगी हो सकती हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले दिनों में महंगाई पर भी इसका असर दिखाई दे सकता है।
सरकार और रिजर्व बैंक की नजर
बाजार की इस स्थिति पर सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक की नजर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर रुपये में गिरावट लगातार जारी रहती है तो केंद्रीय बैंक बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है।
रिजर्व बैंक आमतौर पर विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल कर बाजार में स्थिरता बनाए रखने की कोशिश करता है। हालांकि वैश्विक परिस्थितियों के कारण चुनौती अभी भी बनी हुई है।
प्रधानमंत्री की अपील का भी असर
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से ईंधन की बचत करने, अनावश्यक खर्च कम करने और विदेशी वस्तुओं पर निर्भरता घटाने की अपील की थी।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह अपील मौजूदा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए की गई है ताकि विदेशी मुद्रा पर दबाव कम किया जा सके।
आगे क्या रह सकती है स्थिति
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में वैश्विक हालात और कच्चे तेल की कीमतें रुपये की दिशा तय करेंगी। अगर अंतरराष्ट्रीय तनाव बढ़ता है तो भारतीय मुद्रा पर और दबाव देखने को मिल सकता है।
हालांकि कुछ जानकारों का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद लंबे समय में स्थिति को संभाल सकती है। फिर भी फिलहाल बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है और निवेशक सतर्क नजर आ रहे हैं।

