हरियाणा विधानसभा में महिलाओं के अधिकारों को लेकर प्रस्ताव पारित, CM नायब सैनी ने कांग्रेस के वॉकआउट को दोहरा रवैया बताया।
हरियाणा विधानसभा के विशेष सत्र में महिलाओं के अधिकारों और सशक्तिकरण को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया गया, जिसने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। Nayab Singh Saini द्वारा प्रस्तुत यह प्रस्ताव ‘नारी शक्ति वंदन’ के समर्थन में था, जिसे सदन ने ध्वनि मत से मंजूरी दे दी।
मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि किसी भी समाज का समग्र विकास तब तक संभव नहीं है, जब तक उसकी आधी आबादी—माताओं और बहनों—को समान अवसर, सम्मान और अधिकार नहीं मिलते। उन्होंने इसे ‘विकसित भारत-2047’ के विजन का अहम आधार बताते हुए महिलाओं की भागीदारी को अनिवार्य बताया।
मुख्यमंत्री ने Narendra Modi के नेतृत्व में चल रहे महिला सशक्तिकरण अभियानों का जिक्र करते हुए कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने बताया कि इस कानून को निर्धारित समय से पहले लागू करने के लिए संसद में विशेष सत्र आयोजित कर संशोधन विधेयक लाया गया, ताकि 2029 के आम चुनाव तक महिलाओं को इसका लाभ मिल सके।
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हरियाणा की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य ने महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने बताया कि ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ जैसे अभियानों से लिंगानुपात में सुधार हुआ है और यह 871 से बढ़कर 923 तक पहुंच गया है। साथ ही ‘सुकन्या समृद्धि योजना’, ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’, ‘जन धन योजना’ और ‘मुद्रा योजना’ जैसी पहलों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त किया जा रहा है। राज्य में पंचायती राज संस्थाओं में 50 प्रतिशत आरक्षण, ‘लखपति दीदी’ और ‘ड्रोन दीदी’ जैसी योजनाएं भी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभा रही हैं।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के दौरान विपक्ष की भूमिका को लेकर विवाद भी सामने आया। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि महिलाओं के अधिकारों के मुद्दे पर पार्टी ने एक बार फिर अपना “दोहरा चेहरा” दिखाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने सदन के भीतर चर्चा से बचते हुए वॉकआउट किया, जबकि बाहर महिलाओं के अधिकारों की बात करता रहा। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह आचरण न केवल राजनीतिक है, बल्कि महिलाओं के अधिकारों के प्रति गंभीरता की कमी को भी दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव विपक्ष के लिए एक अवसर था, जिसके जरिए वे अपने रुख को स्पष्ट कर सकते थे और महिलाओं के हित में सकारात्मक संदेश दे सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। मुख्यमंत्री ने विपक्ष के इस व्यवहार को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि ऐसे आचरण की निंदा होनी चाहिए, क्योंकि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अंत में सभी दलों से अपील की कि वे राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर महिलाओं के अधिकारों और सशक्तिकरण के इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव का समर्थन करें। उन्होंने कहा कि यह केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि समाज में समानता, सम्मान और न्याय स्थापित करने की दिशा में एक सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह घटनाक्रम हरियाणा की राजनीति में महिला अधिकारों को लेकर गंभीर विमर्श को आगे बढ़ाने वाला माना जा रहा है।

