एलन मस्क के यूनिवर्सल हाई इनकम प्लान पर अर्थशास्त्री संजीव सान्याल ने जताई चिंता, कहा इससे देश की अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ पड़ेगा।
दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच Elon Musk द्वारा दिया गया ‘यूनिवर्सल हाई इनकम’ का विचार चर्चा में है। मस्क का मानना है कि आने वाले समय में ऑटोमेशन और मशीनें इंसानों की जगह लेंगी, जिससे बड़े पैमाने पर रोजगार प्रभावित हो सकता है। ऐसे में सरकार को सभी नागरिकों को एक निश्चित आय प्रदान करनी चाहिए, ताकि लोग अपनी जरूरतें पूरी कर सकें और आर्थिक संतुलन बना रहे।
हालांकि इस विचार को भारत के प्रसिद्ध अर्थशास्त्री संजीव सान्याल ने सख्ती से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि इस तरह की योजना किसी भी देश की अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ डाल सकती है और अंततः आर्थिक संकट या दिवालियापन की स्थिति पैदा कर सकती है।
मस्क का तर्क है कि AI और रोबोटिक्स के कारण उत्पादन क्षमता में भारी वृद्धि होगी, जिससे वस्तुओं और सेवाओं की उपलब्धता बढ़ेगी। ऐसे में यदि लोगों को सीधे आय दी जाए, तो वे उपभोग कर सकेंगे और अर्थव्यवस्था गतिशील बनी रहेगी। लेकिन सान्याल इस सोच को अधूरा मानते हैं।
उनका कहना है कि इतिहास गवाह है कि हर नई तकनीक शुरुआत में नौकरियों को प्रभावित करती है, लेकिन समय के साथ नई इंडस्ट्री और रोजगार के अवसर भी पैदा होते हैं। 19वीं और 20वीं सदी के औद्योगिक बदलाव इसका उदाहरण हैं, जहां तकनीकी विकास के साथ रोजगार के नए रास्ते खुले।
सान्याल ने मस्क के उस दावे पर भी सवाल उठाया जिसमें कहा गया है कि उत्पादन बढ़ने से महंगाई नहीं बढ़ेगी। उनके मुताबिक, अर्थव्यवस्था में मांग और आपूर्ति का संतुलन इतना सरल नहीं होता। अगर सरकार बड़े पैमाने पर लोगों को आय देगी, तो इससे राजकोषीय घाटा बढ़ेगा और वित्तीय असंतुलन पैदा हो सकता है।
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उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी अर्थव्यवस्था की असली ताकत उसकी लचीलापन (Flexibility) में होती है। मजबूत बाजार व्यवस्था, नवाचार को बढ़ावा और आसान कारोबारी प्रक्रियाएं ही दीर्घकाल में बेहतर परिणाम देती हैं। इसके विपरीत, स्थायी आय जैसी योजनाएं अल्पकालिक राहत तो दे सकती हैं, लेकिन दीर्घकाल में आर्थिक जोखिम बढ़ा सकती हैं।
इस बहस ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि AI के दौर में रोजगार और आय का संतुलन कैसे बनाए रखा जाए। जहां एक ओर मस्क जैसे तकनीकी दिग्गज भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए नए समाधान पेश कर रहे हैं, वहीं अर्थशास्त्री इसे व्यावहारिकता के पैमाने पर परखने की जरूरत बता रहे हैं।
कुल मिलाकर, यूनिवर्सल हाई इनकम का विचार भले ही आकर्षक लगे, लेकिन इसके आर्थिक प्रभावों को समझे बिना इसे लागू करना किसी भी देश के लिए जोखिम भरा कदम साबित हो सकता है।

