पंजाब आढ़ती एसोसिएशन ने हरियाणा CM नायब सिंह सैनी से मुलाकात कर हड़ताल और सरकारी नीतियों पर चिंता जताई, MSP और कमीशन मॉडल पर चर्चा हुई।
नायब सिंह सैनी से पंजाब की आढ़ती एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात कर राज्य में आढ़तियों के सामने आ रही समस्याओं और जारी हड़ताल को लेकर चिंता जताई। यह बैठक मुख्यमंत्री आवास संत कबीर कुटीर में आयोजित हुई, जहां विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
📊 आढ़ती, मजदूर और किसानों पर असर
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि पंजाब में करीब 40 हजार आढ़ती, सवा लाख मुनीम और 6-7 लाख श्रमिक इस व्यवस्था से जुड़े हैं। वर्तमान में जारी हड़ताल के कारण व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं और लाखों परिवारों की आजीविका संकट में है।
उन्होंने कहा कि सरकार से बातचीत के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है, जिससे फसल खरीद सीजन में किसान, मजदूर और व्यापारी सभी परेशान हैं।
⚠️ पंजाब सरकार की नीतियों पर सवाल
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पंजाब में विभिन्न वर्गों—किसान, व्यापारी और श्रमिक—को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने राज्य सरकार की नीतियों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि इनसे आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई है।
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🌾 हरियाणा मॉडल का दिया उदाहरण
मुख्यमंत्री ने हरियाणा का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य में किसानों की फसलें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी जा रही हैं, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है।
साथ ही आढ़तियों को 55 रुपये प्रति क्विंटल कमीशन दिया जा रहा है, जो पंजाब की तुलना में अधिक है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों, आढ़तियों और व्यापारियों के हितों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
🤝 समाधान की उम्मीद और मांगें
आढ़ती एसोसिएशन ने अपनी समस्याओं और मांगों को रखते हुए एक स्थायी समाधान की अपेक्षा जताई। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि उन्हें ऐसी व्यवस्था चाहिए जहां उनकी बात सुनी जाए और व्यावहारिक समाधान मिले।
प्रतिनिधिमंडल में वियाह कालरा, अमरजीत सिंह बराड़, देवी दयाल, मुल्ख राज गुप्ता और शमीर जैन जैसे प्रमुख पदाधिकारी शामिल रहे।
📌 निष्कर्ष
इस मुलाकात ने पंजाब में आढ़ती संकट और कृषि-व्यापार से जुड़े मुद्दों को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले समय में सरकार और आढ़ती संगठनों के बीच बातचीत से समाधान निकलने की उम्मीद जताई जा रही है।

