हरियाणा सरकार ने नागरिकों को समयबद्ध और पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। हरियाणा सेवा का अधिकार अधिनियम, 2014 के अंतर्गत प्रशासनिक सुधार विभाग की 31 दिसंबर 2021 की अधिसूचना में संशोधन करते हुए पशुपालन एवं डेयरी विभाग से जुड़ी सेवाओं में बदलाव किया गया है। इस संशोधन के तहत जहां पहले से अधिसूचित तीन सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाया गया है, वहीं दो नई सेवाओं को भी अधिसूचित किया गया है।
इस संबंध में मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी द्वारा अधिसूचना जारी की गई है। सरकार का उद्देश्य इन सेवाओं को और अधिक सरल, पारदर्शी तथा समयबद्ध बनाना है, ताकि आम नागरिकों, खासकर पशुपालकों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को सीधा लाभ मिल सके।
नए प्रावधानों के अनुसार, अब स्वदेशी पशुधन (देसी गाय) के संरक्षण एवं विकास तथा मुर्राह विकास योजना से संबंधित सेवाएं 180 दिनों की समय-सीमा में प्रदान की जाएंगी। वहीं, हाई-टेक डेयरी इकाइयों की स्थापना और अनुसूचित जातियों के लाभार्थियों को पशुधन इकाइयों की स्थापना के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराने की योजना के लिए 100 दिनों की समय-सीमा तय की गई है। इससे इन योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी और लाभार्थियों को अनावश्यक इंतजार से राहत मिलेगी।
अधिसूचना में क्रम संख्या 4 के बाद दो नई सेवाएं भी जोड़ी गई हैं। इनमें सूकर, भेड़ और बकरी इकाइयों की स्थापना के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराने की सामान्य योजना के लिए 100 दिन की समय-सीमा निर्धारित की गई है। इसके अलावा, बैकयार्ड पोल्ट्री इकाइयों की स्थापना योजना के लिए 60 दिन की समय-सीमा तय की गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ये सभी सेवाएं लक्ष्यों की उपलब्धता के अधीन होंगी, ताकि योजनाओं का लाभ सही पात्र लाभार्थियों तक पहुंच सके।
इन सेवाओं के बेहतर क्रियान्वयन और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों की जिम्मेदारियां भी तय की गई हैं। संबंधित जिले के उपमंडल अधिकारी, पशुपालन एवं डेयरी को इन सेवाओं के लिए पदनामित अधिकारी बनाया गया है। वहीं, उपनिदेशक, पशुपालन एवं डेयरी या सघन पशुधन विकास परियोजना के अधिकारी को प्रथम शिकायत निवारण अधिकारी नियुक्त किया गया है। इसके अलावा, निदेशालय स्तर पर क्रेडिट प्लानिंग ऑफिसर या संयुक्त निदेशक (योजना) को अपीलीय प्राधिकारी के रूप में नामित किया गया है।
सरकार का मानना है कि इन बदलावों से पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। साथ ही, राइट टू सर्विस एक्ट के तहत तय समय-सीमा में सेवाएं मिलने से प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की पहल से न केवल योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होगा, बल्कि आम लोगों का सरकारी तंत्र पर भरोसा भी बढ़ेगा। हरियाणा सरकार की यह पहल राज्य में सुशासन और सेवा वितरण प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।


