मूंगफली की कटाई के बाद गेहूं की खेती से बढ़ाएं कमाई। जानें सुजाता, C-306, HD-2932 और पूसा तेजस किस्मों की खासियत और सही चयन के तरीके।
मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में मूंगफली की फसल कटने के बाद किसान खाली खेतों में गेहूं की खेती करके अतिरिक्त उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए सही गेहूं किस्म का चयन करना बेहद जरूरी है। कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों के अनुसार, किसानों को गेहूं की किस्म चुनते समय सिंचाई की सुविधा, मिट्टी की स्थिति और उपलब्ध कृषि संसाधनों का ध्यान रखना चाहिए।
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. पुष्पेंद्र सिंह के मुताबिक, मूंगफली की फसल सामान्यतः 100 से 120 दिनों में तैयार हो जाती है। इसकी कटाई के बाद किसान खेत की नमी और सिंचाई की उपलब्धता के आधार पर अगली फसल के रूप में गेहूं की बुवाई की योजना बना सकते हैं।
कम पानी वाले खेतों में लगाएं सुजाता और C-306
जिन किसानों के पास सिंचाई के सीमित साधन हैं और वे कम खाद का इस्तेमाल करना चाहते हैं, उनके लिए सुजाता और C-306 जैसी गेहूं की किस्मों पर विचार किया जा सकता है। इन किस्मों को उनकी खाद्य गुणवत्ता, खासकर रोटी बनाने के गुणों के लिए जाना जाता है।
हालांकि, किस्म का चुनाव करने से पहले स्थानीय कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है। जरूरत से ज्यादा सिंचाई और उर्वरकों का असंतुलित इस्तेमाल कुछ परिस्थितियों में पौधों के गिरने की समस्या बढ़ा सकता है। इसलिए खेत की स्थिति के अनुसार ही खाद और पानी का प्रबंधन करें।
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पर्याप्त सिंचाई वाले खेतों के लिए HD-2932 और पूसा तेजस
जिन किसानों के पास पर्याप्त सिंचाई सुविधा और बेहतर कृषि संसाधन उपलब्ध हैं, वे उन्नत गेहूं की किस्मों पर विचार कर सकते हैं। डॉ. पुष्पेंद्र सिंह ने HD-2932, पूसा तेजस और HI-1544 जैसी किस्मों का उल्लेख किया है।
इनमें से किसी किस्म का चयन करने से पहले यह जांच लें कि वह आपके क्षेत्र, बुवाई के समय और उपलब्ध सिंचाई व्यवस्था के लिए उपयुक्त है या नहीं। प्रमाणित बीज और स्थानीय कृषि विश्वविद्यालय की सिफारिशों को प्राथमिकता देना बेहतर रहता है।
गेहूं की बुवाई से पहले इन बातों का रखें ध्यान
मूंगफली की कटाई के बाद गेहूं की अच्छी फसल लेने के लिए किसान कुछ जरूरी बातों पर ध्यान दें:
- खेत की तैयारी: मिट्टी की स्थिति के अनुसार खेत तैयार करें और उचित नमी बनाए रखें।
- बीज का चयन: क्षेत्र के लिए अनुशंसित और प्रमाणित बीजों का इस्तेमाल करें।
- सिंचाई प्रबंधन: उपलब्ध पानी के अनुसार फसल की जरूरत पूरी करें।
- खाद एवं उर्वरक: मिट्टी की जांच और कृषि विशेषज्ञ की सलाह के आधार पर संतुलित पोषण दें।
- समय पर बुवाई: स्थानीय कृषि सलाह के अनुसार सही समय पर गेहूं की बुवाई करें।
किसानों के लिए कौन-सी किस्म बेहतर रहेगी?
गेहूं की कोई एक किस्म हर खेत के लिए सबसे अच्छी नहीं होती। कम सिंचाई वाले खेतों में उपयुक्त किस्म का चयन अलग हो सकता है, जबकि पर्याप्त पानी और संसाधन वाले खेतों में दूसरी किस्में बेहतर विकल्प बन सकती हैं।
इसलिए शिवपुरी के किसानों को मूंगफली की कटाई के बाद गेहूं की बुवाई से पहले कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लेनी चाहिए। सही किस्म, प्रमाणित बीज और वैज्ञानिक फसल प्रबंधन अपनाकर किसान उपलब्ध जमीन का बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं और उत्पादन बढ़ाने की दिशा में कदम उठा सकते हैं।

