गन्ने की खेती में वाइड रो स्पेसिंग तकनीक अपनाकर किसान पानी और बीज की लागत घटा सकते हैं। जानें इस तकनीक के फायदे, इंटरक्रॉपिंग और सब्सिडी की पूरी जानकारी।
गन्ना देश की प्रमुख नकदी फसलों में शामिल है और बड़ी संख्या में किसान इसकी खेती से अपनी आय प्राप्त करते हैं। हालांकि, खेती की बढ़ती लागत, पानी की जरूरत और मजदूरों की कमी के कारण किसानों के लिए आधुनिक तकनीक अपनाना जरूरी होता जा रहा है।
ऐसे में वाइड रो स्पेसिंग यानी चौड़ी कतार दूरी तकनीक गन्ना किसानों के लिए उपयोगी विकल्प बन सकती है। इस पद्धति में गन्ने की कतारों के बीच सामान्य खेती की तुलना में अधिक जगह रखी जाती है। इससे खेत में हवा और सूर्य की रोशनी का बेहतर आवागमन हो सकता है और मशीनों से कई कृषि कार्य करना आसान हो जाता है।
क्या है वाइड रो स्पेसिंग तकनीक?
गन्ने की पारंपरिक बुवाई में आमतौर पर कतारों के बीच करीब 2 से 2.5 फीट का अंतर रखा जाता है। वहीं, वाइड रो स्पेसिंग पद्धति में यह दूरी बढ़ाकर लगभग 4 फीट तक रखी जाती है।
कतारों के बीच ज्यादा जगह होने से पौधों को पर्याप्त प्रकाश और हवा मिल सकती है। साथ ही पोषक तत्वों के बेहतर प्रबंधन और खेत में कृषि मशीनों के इस्तेमाल में भी सुविधा मिलती है।
इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य कम संसाधनों में गन्ने की फसल का बेहतर प्रबंधन करना और खेती की लागत को नियंत्रित करना है।
कम पानी में गन्ने की खेती
गन्ना अधिक पानी की आवश्यकता वाली फसलों में शामिल है। ऐसे में सिंचाई पर होने वाला खर्च किसानों के लिए बड़ी चुनौती हो सकता है।
वाइड रो स्पेसिंग तकनीक में खेत की संरचना और सिंचाई प्रबंधन के कारण पानी की खपत को कम करने में मदद मिल सकती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पारंपरिक तरीके से एक एकड़ गन्ने की फसल में करीब 18 से 20 लाख लीटर पानी की जरूरत बताई जाती है, जबकि चौड़ी कतार पद्धति में यह मात्रा लगभग 9 से 10 लाख लीटर तक हो सकती है।
हालांकि, वास्तविक पानी की आवश्यकता मिट्टी, मौसम, सिंचाई प्रणाली और क्षेत्र की परिस्थितियों के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।
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गन्ने के बीज की लागत भी हो सकती है कम
वाइड रो स्पेसिंग का एक बड़ा फायदा कम मात्रा में बीज का इस्तेमाल बताया जाता है। पारंपरिक पद्धति में एक एकड़ खेत के लिए करीब 35 क्विंटल गन्ने के बीज की आवश्यकता हो सकती है।
वहीं, चौड़ी कतार पद्धति में लगभग 18 से 20 क्विंटल बीज से बुवाई की जा सकती है। इससे शुरुआती समय में बीज पर होने वाला खर्च कम करने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा, कतारों के बीच अधिक जगह होने के कारण निराई-गुड़ाई और दूसरे कृषि कार्य मशीनों के माध्यम से करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है। इससे मजदूरी की लागत को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है।
गन्ने के साथ दूसरी फसल से अतिरिक्त कमाई
वाइड रो स्पेसिंग तकनीक में कतारों के बीच पर्याप्त खाली जगह बचती है। किसान इस जगह का इस्तेमाल अंतरवर्ती फसल यानी इंटरक्रॉपिंग के लिए कर सकते हैं।
गन्ने के साथ किसान अपने क्षेत्र और मौसम के अनुसार दालों, सब्जियों या कम अवधि वाली दूसरी फसलों की खेती कर सकते हैं। इनमें से कई फसलें कुछ महीनों में तैयार हो जाती हैं।
इस तरह किसान को गन्ने की मुख्य फसल से आय मिलने के अलावा बीच की खाली जमीन से भी अतिरिक्त आमदनी का अवसर मिल सकता है।
मशीनों से खेती करना होता है आसान
गन्ने की खेती में निराई, गुड़ाई, सिंचाई और अन्य कार्यों में काफी श्रम की जरूरत पड़ती है। खेत में कतारों के बीच ज्यादा दूरी होने पर कृषि मशीनों के संचालन के लिए अतिरिक्त जगह मिल सकती है।
इससे किसान कई कार्यों में मशीनों का उपयोग कर सकते हैं और श्रम पर निर्भरता कम करने का प्रयास कर सकते हैं।
सरकार भी दे रही प्रोत्साहन
गन्ने की खेती में आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए कुछ राज्यों में किसानों को आर्थिक सहायता भी दी जाती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वाइड रो स्पेसिंग तकनीक अपनाने वाले किसानों को कुछ स्थानों पर प्रति एकड़ ₹5,000 तक की सहायता दिए जाने की व्यवस्था बताई गई है।
हालांकि, सब्सिडी की राशि, पात्रता और नियम राज्य के अनुसार अलग हो सकते हैं। इसलिए किसानों को आवेदन करने से पहले अपने राज्य के कृषि या गन्ना विभाग से मौजूदा नियमों की जानकारी जरूर लेनी चाहिए।
किसानों के लिए क्यों फायदेमंद हो सकती है यह तकनीक?
वाइड रो स्पेसिंग तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें किसान खेती के संसाधनों का बेहतर तरीके से इस्तेमाल कर सकते हैं। कम बीज, पानी की संभावित बचत, मशीनों के इस्तेमाल की सुविधा और अंतरवर्ती फसल से अतिरिक्त आय जैसे फायदे किसानों के लिए उपयोगी हो सकते हैं।
हालांकि, इस तकनीक को अपनाने से पहले किसान को अपने क्षेत्र की मिट्टी, पानी की उपलब्धता, गन्ने की किस्म और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह को ध्यान में रखना चाहिए। सही तरीके से अपनाने पर वाइड रो स्पेसिंग तकनीक गन्ने की खेती को अधिक व्यवस्थित और लागत प्रभावी बनाने में मदद कर सकती है।

