सरसों की खेती: RH 725 सरसों की किस्म से 36 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज मिल सकती है। जानें इसकी खासियत, बुवाई का सही समय, तेल की मात्रा और सिंचाई की जरूरत।
सरसों की खेती: रबी सीजन में सरसों किसानों के लिए प्रमुख तिलहनी फसलों में शामिल है। बेहतर उत्पादन और अच्छी आमदनी के लिए किसान ऐसी किस्म का चुनाव करना चाहते हैं, जो कम पानी में भी अच्छा प्रदर्शन करे। ऐसे किसानों के लिए आरएच 725 सरसों की किस्म एक विकल्प हो सकती है।
आरएच 725 को चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU), हिसार के वैज्ञानिकों ने विकसित किया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उचित समय पर बुवाई और वैज्ञानिक तरीके से फसल प्रबंधन करने पर इस किस्म की उपज काफी अच्छी मिल सकती है।
RH 725 से कितनी मिल सकती है पैदावार?
आरएच 725 की सामान्य परिस्थितियों में औसत उपज करीब 25 से 26 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बताई जाती है। वहीं, बेहतर कृषि तकनीक, समय पर बुवाई और उचित देखभाल के साथ इसकी उपज 36 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंच सकती है।
इसलिए अधिक उत्पादन की तलाश कर रहे किसानों के लिए यह किस्म रबी सीजन में उपयोगी विकल्प हो सकती है।
कब करें RH 725 सरसों की बुवाई?
सरसों की अच्छी फसल के लिए बुवाई का समय काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 25 सितंबर से 20 अक्टूबर के बीच आरएच 725 की बुवाई की जा सकती है।
हालांकि, बुवाई का सही समय स्थानीय मौसम, मिट्टी और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार तय करना बेहतर रहेगा।
RH 725 सरसों की पहचान कैसे करें?
आरएच 725 को इसकी कुछ प्रमुख शारीरिक विशेषताओं से पहचाना जा सकता है। इस किस्म में:
- फलियां अपेक्षाकृत लंबी और मोटी होती हैं।
- एक फली में लगभग 17 से 20 दाने पाए जा सकते हैं।
- इसके बीज आकार में मोटे और वजनदार होते हैं।
- पौधे का तना मजबूत होता है, जिससे फसल के गिरने की संभावना को कम करने में मदद मिल सकती है।
इन विशेषताओं के कारण किसानों को फसल की पहचान और प्रबंधन में सुविधा मिल सकती है।
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RH 725 में कितना होता है तेल?
सरसों की खेती में तेल की मात्रा भी एक महत्वपूर्ण गुणवत्ता मानक है। आरएच 725 में करीब 40 से 42 प्रतिशत तेल की मात्रा बताई जाती है।
तेल की अच्छी मात्रा वाली सरसों को प्रसंस्करण और व्यापार के लिहाज से बेहतर माना जा सकता है। हालांकि, किसान को वास्तविक बाजार भाव फसल की गुणवत्ता, स्थानीय मंडी और उस समय की बाजार परिस्थितियों के आधार पर ही मिलेगा।
कम पानी में भी खेती के लिए उपयुक्त
आरएच 725 की एक खास विशेषता इसकी कम सिंचाई में उत्पादन देने की क्षमता बताई जाती है। यह किस्म समय पर बुवाई के साथ-साथ वर्षा आधारित परिस्थितियों में भी उगाई जा सकती है।
पूरे फसल चक्र में सामान्य तौर पर 1 से 2 सिंचाई की जरूरत बताई जाती है। हालांकि, वास्तविक सिंचाई आवश्यकता मिट्टी, मौसम और खेत की नमी के अनुसार बदल सकती है।
इन क्षेत्रों के किसानों के लिए उपयोगी हो सकती है RH 725
कम पानी या अपेक्षाकृत शुष्क परिस्थितियों वाले क्षेत्रों में यह किस्म किसानों के लिए उपयोगी विकल्प हो सकती है। विशेष रूप से दक्षिणी हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, जम्मू और उत्तरी राजस्थान जैसे क्षेत्रों में इसकी खेती की जानकारी सामने आती है।
कम सिंचाई में बेहतर उत्पादन की क्षमता के कारण किसान पानी की उपलब्धता के अनुसार इस किस्म पर विचार कर सकते हैं।
किसानों के लिए क्यों खास है RH 725?
आरएच 725 में अच्छी उपज क्षमता, मोटे दाने, लंबी फलियां, मजबूत तना और अपेक्षाकृत कम सिंचाई की जरूरत जैसी विशेषताएं बताई जाती हैं। यही कारण है कि रबी सीजन में सरसों की खेती करने वाले किसान इस किस्म को अपने क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुसार विकल्प के तौर पर देख सकते हैं।

