रातभर भिगोए काले चने सुबह खाने से डाइट में प्रोटीन, फाइबर, आयरन और फोलेट जैसे पोषक तत्व शामिल होते हैं। जानें भीगे चने खाने के फायदे और सही तरीका।
दिन की शुरुआत पौष्टिक नाश्ते से करना सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है। अगर आप नाश्ते में कोई ऐसा विकल्प तलाश रहे हैं जिसमें प्रोटीन और फाइबर के साथ कई जरूरी पोषक तत्व भी मिलें, तो काले चने डाइट का हिस्सा बनाए जा सकते हैं। इन्हें रातभर पानी में भिगोकर सुबह खाना काफी आम तरीका है।
काले चनों में प्लांट बेस्ड प्रोटीन, फाइबर, आयरन, फोलेट, मैग्नीशियम और पोटैशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। हालांकि, किसी एक खाद्य पदार्थ को संपूर्ण डाइट का विकल्प नहीं माना जा सकता।
रातभर भिगोकर काले चने खाने का तरीका
काले चनों को रात में साफ पानी में भिगोकर रखा जा सकता है। सुबह उनका पानी निकालकर चनों को अच्छी तरह धो लें। जिन्हें कच्चे चने पचाने में परेशानी होती है, वे इन्हें उबालकर या अच्छी तरह पकाकर खा सकते हैं। स्वाद बढ़ाने के लिए इनमें खीरा, टमाटर, नींबू और थोड़े मसाले मिलाए जा सकते हैं।
प्रोटीन का अच्छा शाकाहारी स्रोत
काले चनों में प्लांट बेस्ड प्रोटीन मौजूद होता है। प्रोटीन शरीर के ऊतकों और मांसपेशियों के लिए जरूरी पोषक तत्व है। ऐसे लोग जो शाकाहारी स्रोतों से प्रोटीन लेना चाहते हैं, उनके लिए चने डाइट में शामिल किए जा सकते हैं। हालांकि, शरीर की प्रोटीन जरूरत उम्र, गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
also read: आलस या तनाव? शरीर और दिमाग के ये संकेत बताएंगे असली वजह
फाइबर से भरपूर होते हैं काले चने
काले चनों में डाइटरी फाइबर पाया जाता है। फाइबर पाचन तंत्र के सामान्य कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और भोजन के बाद लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराने में मदद कर सकता है। इसी वजह से भीगे हुए चने एक ऐसा नाश्ता हो सकते हैं जिसे संतुलित डाइट के साथ शामिल किया जा सकता है।
वजन प्रबंधन में हो सकते हैं उपयोगी
जो लोग अपने वजन को मैनेज करना चाहते हैं, वे भी काले चनों को अपने भोजन का हिस्सा बना सकते हैं। फाइबर और प्रोटीन की मौजूदगी के कारण ये पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद कर सकते हैं।
हालांकि, केवल काले चने खाने से वजन कम नहीं होता। वजन प्रबंधन के लिए संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और नियमित शारीरिक गतिविधि भी महत्वपूर्ण हैं।
आयरन और फोलेट भी मिलता है
काले चनों में आयरन और फोलेट जैसे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं। आयरन शरीर में हीमोग्लोबिन से जुड़ी प्रक्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण है, जबकि फोलेट कोशिकाओं के निर्माण और सामान्य वृद्धि में भूमिका निभाता है। इसलिए संतुलित आहार में चने जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थों को शामिल करना रोजाना के पोषण को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।
मैग्नीशियम और पोटैशियम का स्रोत
काले चनों में मैग्नीशियम और पोटैशियम समेत अन्य मिनरल्स भी मौजूद होते हैं। ये पोषक तत्व शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली में भूमिका निभाते हैं।
हालांकि, किसी खास पोषक तत्व की कमी होने पर केवल चने पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लेना बेहतर है।
गैस या पेट फूलने की समस्या हो तो बरतें सावधानी
कुछ लोगों को चने खाने के बाद गैस, पेट फूलने या भारीपन की शिकायत हो सकती है। ऐसी स्थिति में कम मात्रा से शुरुआत करना बेहतर हो सकता है।
चनों को भिगोने के बाद पानी निकालकर अच्छी तरह धो लें। अगर कच्चे चने पचाने में परेशानी होती है, तो उन्हें अच्छी तरह उबालकर खाना एक आसान विकल्प हो सकता है।
कितने चने खाने चाहिए?
काले चनों की सही मात्रा हर व्यक्ति के लिए एक जैसी नहीं होती। उम्र, शारीरिक गतिविधि, डाइट और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार मात्रा अलग हो सकती है। इसलिए इन्हें अपनी कुल डाइट का हिस्सा मानें और संतुलित मात्रा में सेवन करें।
अगर आपको किसी खाद्य पदार्थ से एलर्जी है या डॉक्टर ने किसी विशेष डाइट की सलाह दी है, तो उसी सलाह को प्राथमिकता दें।

